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हिमाचल प्रदेश में उद्योग और धंधे

हिमाचल प्रदेश औद्योगिक दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ राज्य है. अभी तक यहां कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं गया है। उद्योगों के आधारभूत सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए उद्देश्य से राज्य में 38 औद्योगिक बस्तियों एवं 15 औद्योगिक एस्टेट्स की स्थापना की गई है। दिसंबर 2014 तक प्रदेश में 502 मध्यम एवं बड़े तथा लगभग 40,429 लघु पैमाने की औद्योगिक इकाइयां कार्यरत है।

प्रदेश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध बिजली सबसे बड़ा संसाधन है। जो बिजली की कमी से परेशान पड़ोसी राज्यों के उद्यमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, लेकिन जहां तक औद्योगिक विकास का प्रश्न है। और राज्य अभी भी बहुत पिछड़ा हुआ है। प्रदेश में बड़े एवं छोटे पैमाने के विनिर्माण का योगदान लगभग 7% है।

औद्योगिक विकास के सिलसिले में राज्य की वर्तमान कठिनाइयों को देखते हुए यह औद्योगिक पिछड़ापन आश्चर्यजनक नहीं है। प्रदेश में पर्याप्त यातायात के साधनों का अभाव अभी भी एक प्रमुख समस्या है। प्रदेश के बाहर से कच्चा माल लाने तथा मैदानों के बाजारों के लिए उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयां यातायात की ऊंची लागत के कारण किफायती साबित नहीं होती।

इसके अतिरिक्त बुनियादी सुविधाओं के उनुपलब्धता पूंजी और साज-सामान की कमी, आधुनिक कुशलताओं का अभाव एवं स्थानीय जनता में उद्यमशीलता का अभाव अन्य बाधाएँ हैं।

अभी पिछले एक दशक तक मैदानी ढर्रे पर परंपरागत औद्योगिकीकरण पर जरूरत से ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यह विश्वास ही आम रहा है कि प्रदेश में केवल कुटीर उद्योग की उपयुक्त है ये भी औद्योगिकरण में बाधक तत्व बने हुए हैं।

प्रदेश के औद्योगिक चिंतन के आठवें दशक में परिवर्तन आना शुरू हुआ जब सरकार और जनता ने महसूस किया कि राज्य को कुटीर उद्योगों के युग से निकालना होगा। यह समझ कर कि आरंभ में अंदरूनी इलाकों का औद्योगिक विकास संभव नहीं है। निश्चय किया गया कि बुनियादी सुविधाओं से लैस औद्योगिक क्षेत्र हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड को सीमाओं से सटे अपेक्षाकृत मैदानी क्षेत्रों में स्थित स्थानों पर बनाए जाएंगे।

राज्य के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान

जिला औद्योगिक प्रतिष्ठान के क्षेत्र
बिलासपुर नंगल, घुमारबीं, गंगल (ब्रमाणा)
कांगड़ा जसुर, नूरपुर, आलमपुर, भागसु, इंदौरा, कांगड़ा, पपरोला, बैजनाथ, खनिपारा
चंबा बैरास्थूल, चमेरा, बैसरोल।
ऊना मैहतपुर, रायपुर, गगरेट, अम्ब्र, मुबारकपुर
मंडी संभावित सीमेंट- नालनी (सुंदर नगर), अलसीढी (करसोग) पडोह, सुंदर नगर, गोदर, जंजैहली, तातापानी, रिवाल्सर, जोगिंद्र नगर, बरोट, चैल चौक

राज्य सरकार ने एक नई औद्योगिक नीति की घोषणा की गई जिसमें सस्ती बिजली, राज्य वित्त निगम और राष्ट्रीय बैंकों से नए उद्योगों की स्थापना के लिए सस्ते ऋणों की व्यवस्था के अलावा 25% अनुदान जैसे विभिन्न प्रोत्साहन दिए गए थे। प्रदेश में उद्योग धंधों के लिए कम दरों पर 99 वर्षीय पट्टे पर जमीन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है।

प्रदेश में नए उद्योगों के लिए 5 वर्षों के लिए कच्चे माल तथा तैयार वस्तुओं दोनों को बिक्री कर ख़रीदकर तथा चुंगी कर से मुक्त कर दिया गया है।

महत्वपूर्ण सामान्य तथ्य

  • प्रदेश के बाहर के निकटतम रेलवे स्टेशन से कच्चे माल के यातायात के भाड़े पर रियायत दी गई है। रियासतों से उद्गमियों एवं औद्योगिक घरानों को राज्य की और आकर्षित करने में काफी सहयोग मिला है।
  • राज्य के परवानू, बरोटीवाला, बट्टी पोंटा साहब मेहतपुर शामशी, नगरकोट, बागवान, बिलासपुर रेकांग पेयो, और संसारपुर, टेरा में औद्योगिक क्षेत्र बनाए गए हैं। इस समय इन क्षेत्रों में कोई 100 मझोली और बड़ी इकाइयां स्थापित है। जिनका पूंजी निवेश 255 करोड रुपए हैं।
  • प्रदेश में सटीक तापमापी यंत्र उद्योग, घड़ी उद्योग, सूक्ष्मदर्शी, अस्पतालों एवं प्रयोगशालाओं में काम आने वाले उपकरण बनाने वाली इकाइयां स्थापित की जा रही है।
  • राज्य में अब टेलीविजन, टेपरिकॉर्डर, वीडियो, कैसेट, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने एवं कंप्यूटर के कल पुर्जे बनाने की कार्य तेजी से स्थापित हो रही है।
  • प्रदेश में 120 करोड रुपए की लागत से एक्रीलीट धागे बनाने का कारखाना खड़ा करने की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है।
  • पंजाब के नजदीक होने के कारण, मेहतपुर एवं ऊना जिला औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
  • प्रदेश में नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास का बढ़ावा देने, रोजगार सृजन व नए निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
  • नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन प्राप्त करने, पर कम-से-कम 70% हिमाचली लोगों को रोजगार देना होगा।
  • प्रदेश में खादी उद्योगों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को कर से मुक्त कर दिया गया है।
  • प्रदेश में विनिर्दिष्ट गतिविधियों की नई श्रेणी बनायी गई है जिसमें कृषि, बागवानी एवं पर्यटन पर आधारित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है, इनको अनेकानेक प्रोत्साहन दिए गए हैं, जिससे इन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
  • राज्य में उद्योग को आधारभूत सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से 29 औद्योगिक बस्तियों की स्थापना की गई है। इनमें सड़क, पानी, बिजली की सुविधाएँ मुहैया कराई गई है।
  • नालागढ़ में निजी क्षेत्र में एक वनस्पति घी का संयंत्र स्थापित हुआ है। जिसकी दैनिक क्षमता 50 टन है।
  • मंडी में सहकारी क्षेत्र में वनस्पति घी का 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाला एक और संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
  • हिमाचल फर्टिलाइजर्स, हिमाचल बर्सटेड मिल्स और नाहन फाउंड्री जैसी कुछ इकाइयां घाटे में जा रही है।
  • इन इकाइयों के भविष्य पर पुनः चिंतन चल रहा है, लेकिन देसी शराब की बोतल बंदी का संयंत्र तथा गंधराल और तारपीन के कारखाना मुनाफा कमा रहे हैं।
  • राज्य की बड़ी मझोली इकाइयां लगभग 12,000 मजदूरों को रोजगार देती है। लघु क्षेत्र में 213 करोड रुपए पूंजी निवेश वाली लगभग, 16,700 इकाइयां कार्यरत है यह कोई 66,000 लोगों को रोजगार दे रही है।
  • प्रदेश में रेशम उद्योग में लगभग 92000 ग्रामीण किसानों को रोजगार प्राप्त होता है।
  • प्रदेश में चाय का उत्पादन कांगड़ा और मंडी जिलों में 1,000 से 1,500 मीटर तक की ऊंचाई किया जाता है। राज्य में चाय के अंतर्गत 2,300 हेक्टेयर क्षेत्र है जिसमें 15 किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।
  • प्रदेश में 2009-10 के दौरान दिसंबर 2009 तक 5,919 लघु उद्योगों की स्थायी पंजीकरण किया गया है।
  • प्रदेश में दिसंबर 2012 तक 8,375 लघु उद्योग, 298 मध्यम एवं भारी उद्योग इकाइयों का स्थायी पंजीकरण किया गया जिनमें 13,923.22 ₹2 का पूंजी निवेश है एवं 1,15,013 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
  • राज्य में दिसंबर 2012 तक 494 मध्यम हुआ बड़े एवं लगभग 38,592 लघु पैमाने के उद्योग कार्यरत है जिनमें लगभग 16,588.56 करोड रुपए का पूंजी निवेश है। ये उद्योग लगभग 2,11,163  लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
  • नए एवं पहले से स्थापित उद्योगों को समस्त सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय एकल खिड़की औद्योगिक परियोजना स्वीकृत एवं अनुश्रवण प्राधिकरण का गठन किया गया है। यह प्राधिकरण प्रदेश में स्थापित होने वाले सभी मध्यम एवं बड़े क्षेत्र की परियोजनाओं को समस्त सहायता प्रदान करता है।
  • प्रदेश में नई औद्योगिक नीति तथा प्रोत्साहन नियम दिसंबर 2007 में अधिसूचित किए गए हैं- नई औद्योगिक नीति दिसंबर 2007 से लागू है।
  • हिमाचल प्रदेश के 80% परिवार कुटीर उद्योग में लगे हुए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण उद्योग ऊन की कताई और बुनाई है।
  • प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश में केवल उन्हीं उद्योग इकाइयों को लगाने की स्वीकृति देने की नीति अपनायी है जो हवा एवं पानी को प्रदूषित नहीं करती है।

हिमाचल प्रदेश में प्रमुख औद्योगिक केंद्र (जिलावार)

जिला औद्योगिक केंद्र प्रस्तावित केंद्र
हमीरपुर 1. हमीरपुर 1. नादौन
चंबा 1. सुल्तानपुर 2. परेल 1. हतली 2. होली
कांगड़ा 1. नगरकोट बांगवां 2. कांगड़ा 3. संसारपुर, टैरेस, 4. जवाली 5. देहरागोपीपुर 1. नागरी 2. विकास केंद्र 3. ढल्लीयारा 4. वैन अंतरिया 5. संसारपुर टेरेस
बिलासपुर 1. बिलासपुर 1. गोलेथे
लाहौल स्पीति 1. केलोग 2. क्राजा 3. E.P.I.P.बद्दी
सोलन 1. चंबाघाट 2. बद्दी 3. परवानु 4. बरोटीवालन 5. धर्मपुर 1. रछायाणा 2. मामलेग 3. EPIP बद्दी
ऊना 1. महतपूर 2. तहलीवाल 3. अंब 1. गगरेट
किन्नौर 1. रिकांग पियों
कुल्लू 1. शामशी
सिरमौर 1. पोंटा साहिब 1. काला अंब, 2. धौला कुआं
शिमला 1. शौधी 1. चिड़गांव, 2. मेहडली 3. पाडरानु 4. रायघाट
मंडी 1. मंडी 2. नेरचौक 3. मैंगल 4. सैग्लू 5. भाम्बाला
  • प्रदेश की अधिकांश उद्योग प्राय: वनों की लकड़ी पशुओं से प्राप्त  चमड़े, ऊन एवं फल आदि पर आधारित है,
  • प्रदेश में शाल, कबल, चमड़े की वस्तुएँ शराब, बियर, हथकरघों का कपड़ा, तारपीन का तेल, बंदूक आदि बनाने के उद्योग प्रचलित है।
  • अप्रैल 2014 से 31 दिसंबर 2014 के दौरान कुल 1,32,672 प्राथियों का पंजीकरण किया गया एवं 3,160 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
  • राज्य में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए है सारे राज्य में प्रधानमंत्री रोजागर योजना प्रारम्भ की गई है। जिसके अर्तगत शिक्षित बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार सहायता प्रारम्भ की गई है।

सामाचार-पत्र उद्योग मुख्य तथ्य

  • हिमाचल प्रदेश में समाचार-पत्रों की संख्या 110 है.
  • जिनमें पांच दैनिक, 37 सप्ताहिक, 16 पाक्षिक, 33 मासिक, 13 त्रैमासिक एवं 6 अन्य आवधिक है।
  • राज्य में भाषा वार समाचार पत्रों में हिंदी के 71, अंग्रेजी के 11, उर्दू के 6, पंजाबी के दो एवं द्विभाषी तथा अन्य भाषा के समाचार पत्रों की संख्या 19 है।
  • हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित 110 सामाचार पत्रों मे से 68 समाचार पत्र प्रदेश की राजधानी शिमला से प्रकाशित होते हैं।
  • शेष 38 समाचार-पत्र राज्य के छोटे नगरों से प्रकाशित होते हैं।
  • शिमला से प्रकाशित सप्ताहिक पत्रिका गिरिराज सर्वाधिक प्रसार वाली पत्रिका है। जिसकी प्रसार संख्या 18,645 है।
  • राज्य में सबसे पुराना समाचार-पत्र द्विभाषिक पाक्षिक तेज (1934) है।

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