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कंप्यूटर का आविष्कार कब और किसने किया?

कंप्यूटर मानो इस सदी के लिए वरदान सा बन गया है. आज दुनिया में लगभग सभी ने कंप्यूटर देखा है और इसके बारे में सुना है. लेकिन क्या आपको पता है की कंप्यूटर का आविष्कार कब और किसने किया? Computer Invention in Hindi

कंप्यूटर का आविष्कार

समय जिस तेजी से बदल रहा है, उसमे कंप्यूटर आवश्यकता बनकर रह गया है. कंप्यूटर शब्द की उत्पति अंग्रेजी के शब्द ‘कम्प्युट’ शब्द से मानी गई है. जिसका मतलब है, गणना करना.

कंप्यूटर का आविष्कार
कंप्यूटर का आविष्कार

दूसरे शब्दों में हम कह सकते है की कंप्यूटर एक ऐसा उपकरण है जो गणना भी करता है और साथ ही साथ सूचनाओं का विश्लेषण भी करता है. यह सभी प्रकार की गणित या अगणित जानकारी बताता है.

कंप्यूटर की सहायता में हम ढेरों जानकारियाँ इकट्ठी करके उनका प्रयोग अनेक कार्यों में करते है. देखा जाए तो कंप्यूटर के क्षेत्र में बीसवीं सदी के उतराधर्द के विगत तीन दशकों में जितनी प्रगति हुई, उतनी शायद ही किसी क्षेत्र में हुई.

कंप्यूटर का श्रेय अंग्रेज गणितज्ञ चार्ल्स बावेज को जाता है उन्होंने 1890 में इसका सिद्धांत बनाया था, लेकिन 19 विन सदी के अन्त में हरमन होलेरिथ ने यंत्र व तकनीक का विकास किया जिससे कंप्यूटर डिजाइन में बहुत सहायता मिली.

अन्य अमेरिकी वैज्ञानिक डाॅ. हारवर्ड माइकल ने अंतर्राष्ट्रीय मशीन व्यापार कंपनी के सहयोग से 1944 में हारवर्ड विश्वविधालय में पहले मार्क-1 कंप्यूटर को स्थापित किया. इनकी कार्य प्रणाली चार्ल्स बावेज के सिद्धांत पर ही आधारित थी.

इसमें इनपुट देने अर्थात आंकड़े भरने के लिए छेद वाले टेप तथा कार्डों का इस्तेमाल किया गया.

धीरे-धीरे इसमें और फेरबदल की स्थितियां आई. डाॅ. जान मोच्ले तथा उनके सहयोगी ने सन् 1945 में अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविधालय में प्रथम ‘इलेक्ट्रानिक कैलकुलेटर’ की सथापना की.

1950 में वही की निजी कंपनियों ने तथा उघोगपतियों ने कंप्यूटर उत्पाद के क्षेत्र के कदम बढाएं. 1954 से 1958 के बीच तो भिन्न-भिन्न उत्पादों द्वारा अनेक तरह के कंप्यूटर बनाए जाने लगे.

हमारे आज के जीवन में तो यह मानो वरदान ही है. दूसरे शब्दों में अगर इसे ‘जादू का पिटारा’ भी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगीं.

विश्वविधालयों अस्पतालों, दफ्तरों, बैंकों, रेलवे बुकिंग, हवाई जहाज नियंत्रण कक्ष, समुंद्री यात्रा, उपग्रह, अन्तरिक्ष उड़ान, वाहन, वायुयान, टेलीफोन निर्देशक, पुस्तकालय सूचीकरण, जनगणना, ज्योतिष, भविष्यवाणी, पुरातात्विक कार्य, चुनावों का प्रचार-प्रसार, भाषा-विज्ञान, संगीत, कला. और तो और चोरों को पकड़ने के काम में भी कंप्यूटर मददगार है.

इसका कार्य क्षेत्र विस्तृत है, असीम है, विशाल है.

‘जुरासिक पार्क’ फिल्म के सजीव डायनासोर कंप्यूटर के ही देन थे.

उसके बाद ‘गौड़जिला’ ने भी साइन दुनिया में धमाल मचा दिया. जिसमे कंप्यूटर ग्राफिक्स का प्रयोग था.

कंप्यूटर में तीन प्रमुख इकाइयां है.

इसमे मुख्यत: सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट, इनपुट व आउटपुट यूनिट तथा मेमोरी यूनिट है.

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट या केन्द्रीय संसाधन इकाई को हम कंप्यूटर का मस्तिष्क कहते है.

जो की गणितीय तथा तर्क से संबंधित क्रियाओं, जोड़-बाकी, भाग, गुणा आदि कामों को करता है. और पता है, यह इन कामों को नकारने में समय अनुसार एक सेकण्ड का सौ करोडवां हिस्सा लेता है.

इसी के साथ-साथ यह अन्य दूसरी यूनिट को एक निशिचत और निर्धारित गति पर नियंत्रित भी करता है.

इसके बाद महत्वपूर्ण है इनपुट  व आउटपुट यानी निवेश तथा निर्गम इकाई. इसमे हम जानकारी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में भरते है यानी ‘फीड’ करते है, फिर उसके परिणाम प्राप्त करते है चुम्बकीय स्मृति में यानी मेमोरी यूनिट तीन प्रकार की होती है. मैग्नेटिक कोर, मैग्नेटिक ड्रम तथा मैग्नेटिक टेप.

चुम्बकीय फैराइट कोर में तो लाखों मूल अवयव होते है. यह मैग्नीशियम मैगनीज के बने होते है.

इन इकाइयां के बाद कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की बात करें. एक प्रोग्राम को कैसे लिखा जाए? वह कला प्रोग्रामिंग की भाषा कहलाती है. यह उच्च स्तरीय भाषा होती है. पर हर मशीन अपने आंतरिक हार्डवेयर पर निर्भर होती है.

जिसे मशीन की भाषा कहते है. प्रोग्राम बनाने वाले को प्रोग्राम लिखने के कार्य से आराम दिलाने के लिए कठिन निम्नस्तरीय यांत्रिक भाषा में सैकंडों उच्च स्तरीय प्रोग्राम की भाषाएं विकसित हो गई.

अधिकतर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाओँ को संकलित या व्याख्यायित भाषाओँ में बांटा जाता है. एक संकलित भाषा में प्रोग्राम के चालन के दो चरण होते है-संकलन चरण और क्रियान्वयन चरण. एक व्याख्यायित भाषा में इसके विपरीत केवल सोर्स प्रोग्राम होता है की की यांत्रिक भाषा के अनुदेशों के अनुसार पंक्ति दर पंक्ति अनुवादित होता है.

हर कार्यक्रम का क्रियान्वयन एक दिएगए आंकड़े के अंतर्गत ही होता है.

कंप्यूटर की मांग दिन- प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. माता-पिता बच्चों  से उम्मीद  रखते है की वह कंप्यूटर से नई-नई जानकारी हासिल करे.

कंप्यूटर का बाजार भरा पड़ा है, लेकिन इसे खरीदने में जल्दबाजी कभी भी नहीं करना चाहिए.

बाजार से देख-परखकर ही निर्णय लेना चाहिए क्योंकि  नकली माल के चक्कर में कभी-कभी लेने के देने भी पड सकते है.

कंप्यूटर में सबसे महत्व पूर्ण उसकी हार्ड डिस्क ही होती है.

इसी से  सारे सॉफ्टवेर व आंकड़े सुरक्षित रहते है. जरा सी भी गड़बड़ हुई नहीं की आपके सारे आंकड़े पलभर के खत्म हो सकते है. इसलिए  डिस्क की क्षमता के मामले में तो कभी भी समझौता नहीं कर्न्ना चाहिए.

कैरियर बनाने की दिशा में कंप्यूटर निश्चय ही सहायता करता है किन्तु कुछ बच्चों व  किशोरों के मन में हिन्-भावना भी देखी गई है.

वह कंप्यूटर को ऐसा हौवा समझते है, जिसके लिए बेहद बुद्धिमान व अंग्रेजी आना परम आवश्यक है. जबकि ऐसा कुछ नहीं है.

मन में लगन हो तो कंप्यूटर सहज रूप से सिखा जा सकता है.

कंप्यूटर के लिए कोई धरा प्रवाह अंग्रेजी की आवश्यकता नहीं होती. हां, आज का किशोर अथवा किशोरी इतना ज्ञान तो रखता ही है जितना कंप्यूटर चलाने या सिखाने के लिए जरुरी होती है.

आगे आपके मन में भी इच्छा है तो इस इच्छा को रोके नहीं बल्कि सीखें और कंप्यूटर के क्षेत्र के कदम बढ़ाए.

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