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मानव के स्वास्थ्य और रोगों से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको मानव के स्वास्थ्य और रोगों से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे है जिसको आप हमारे इस आर्टिकल से चेक कर सकते है.

मानव के स्वास्थ्य और रोगों से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी

मानव के स्वास्थ्य और रोगों से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी

स्वास्थ्य

शरीर की वह अवस्था है जिसमें शरीर शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक रुप से पूर्णतया सही होता है.

रोग

शरीर की वह अवस्था है जिसमें संक्रमण, दोस्पुरण,  आहार, अनुवांशिकता एवं पर्यावरणीय कारकों द्वारा शरीर के सामान्य कार्यों एवं कार्य की में अनियमितता उत्पन्न हो जाती है.रोगाणु का सुग्राही पोषी में भेदन स्थिरीकरण तथा रोगाणु की वृद्धि सक्रमण कहलाती है

रेबीज\जल से डरना

यह रेबीज विषाणु से उत्पन्न होता है जो पागल कुत्ते या बिल्ली के काटने  के मनुष्य में स्थांतरित होता है. रेबीज के आरंभिक लक्षण मुख से लार निकलना, घातक सिर दर्द, उदासी, बंद गले के द्रव्यों को निगलने में कठिनाई होना इत्यादि. सियार, भेड़िया, लोमड़ी, नेवले, चमगादड़ में भी रेबीज विषाणु पाया जाता है.

जल से डरना अर्थात: हाइड्रोफोबिया सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है. विषाणु मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु को नष्ट करता है. काटे हुए व्यक्ति को  शीघ्र ही टीकाकरण किया जाना चाहिए. कुत्ते के काटने के 10 दिन तक परिवर्तन दिखाया आना चाहिए. जैसे- आवाज में परिवर्तन तथा अत्यधिक लार का बनना इत्यादि.

भोजन से मिलने वाले मुख्य अवयव

हिपेटाइटिस

इसे समानतया पीलिया भी कहते हैं.  चक्रमण मुख या गुदा मार्ग के द्वारा फैलता है, आरंभ में यकृत बड़ा हो जाता है तथा भरा हुआ प्रतीत होता है. ज्वर, अरुचि, मितली, उल्टी, पेशियों तथा संधियों में दर्द इत्यादि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं. मूत्र गहरा तथा मल पीले रंग का होता है. हिपेटाइटिस विषाणु के 6 प्रकार HAV, HBV, HCV, HDV, HEV तथा हेपेटाइटिस विषाणु (HGV) है . व्यक्तिगत सफाई, उबले पानी का उपयोग, ठीक ढंग से पकाया हुआ भोजन, सफाई युक्त खाद्य पड़ता मक्खियों पर नियंत्रण इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक है.

न्यूमोनिया

यह रोग बैक्टीरिया या वायरस द्वारा और आम तौर पर फफूंद और परजीवियों द्वारा के द्वारा उत्पन्न होता है. यह छोटी बूंदों के द्वारा स्थानांतरित होता है. फेफड़ों में संक्रमण, फेफड़ों में जल भर जाना, अचानक ठंड लगना, छाती में दर्द, भूरे श्लेषम के थूक के साथ खांसी तथा शरीर तापमान में वृद्धि इसके लक्षण है.

सिफिलिस

सिफिलिस ट्रेपोनिमा पेलीडम नामक हैस्पैरोकिट के द्वारा उत्पन्न होता है. जंतुओं में छाले तथा स्थानीय लसिका ग्रंथियों पर सूजन, झुरियां,  बालों का झड़ना, संधियों में सुजन बीमारी इसके लक्षण है.

प्लेग काली मृत्यु

यह रोग पास्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु में उत्पन्न होता है. यह चूहे पर पाए जाने वाले पिशु या जोनोपिश्ला के द्वारा मनुष्य में फैलता है.

इस रोग में लसीका ग्रंथियाँ (गिल्टियाँ) उपस्थित दर्द युक्त बल्बों के रूप में सूज जाती हैं, जिसके साथ उंच ज्वर, ठंडापन, थकान तथा रक्त स्राव आदि अन्य लक्षण है.

प्लेग का उपचार प्रति व्यक्ति के घर में कीटनाशकों का छिड़काव और उचित दवाइयों के सेवन द्वारा किया जाता है.

टाइफाइड

यह साल्मोनेला टाइफी के द्वारा उत्पन्न होता है, यह खाद्य पदार्थ, दूध तथा आत के मुक्तक पदार्थों से युक्त जल है या सीधे संपर्क किया मक्खियों के द्वारा फैलता है. उच्च ज्वर, तथा आंतरिक दीवार में फोड़ो का होना टाइफाइड के लक्षण है.प्रतिजैविक को जैसे एम्पीसीलिंन आदि द्वारा उपचार किया जाता है.

चेचक

चेचक एक विषाणु जनित रोग है. इसे हम शीतला, बड़ी माता, स्मालपोक्स के नाम से भी जानते है.

यह व्हेरोला विषाणु से उत्पन्न होता है – यह 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सामान्य तथा वयस्कों में कम परंतु घातक होता है.

संक्रमण मुख्य अथवा नशा पदार्थ के मुक्त होने, फोड़ो तथा धब्बों से फेलता है.लाल रंग के धब्बे घावों में बदल जाते हैं.

निशान सर्वप्रथम चेहरे पर तथा बाद में संपूर्ण शरीर पर परंतु उदर पर कम होते हैं. इंसानों के समाप्त होने पर सथाई निशान रह जाते हैं.

इसके टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने सन 1796 में की.

चिकन पॉक्स

यह रोग वैरिसेल-ज़ोस्टर विषाणु के द्वारा 14-16 दिनों की सुप्तावस्था के बाद फैलता है. इसे आम भाषा में छोटी माता भी कहा जाता है.

यह संक्रामक रोग है तथा बसंत ऋतु में होता है,गुलाबी केंद्रीय धब्बों जो की ज्यादातर माथे तथा चेहरे पर फुंसी इसके लक्षण हैं.

प्रत्येक दाने पर असहजता दर्द तथा उच्च ज्वर होता है. निशान द्रव्य मुक्त पुटीकाओ में तथा फिर घाव में परिवर्तित हो जाते हैं.

चिकन पॉक्स से प्रतिरक्षण हेतु एडिटन्यूएडिट विषाणु प्रतिरक्षी उपलब्ध है.

कैंसर

कैंसर अनियंत्रित एवं अनियमित असामान्य उत्कीय वृद्धि है. यह किसी भी अंग में हो सकती है इसे मैलिग्नेंट ट्यूमर, विश्व में कुल मृत व्यक्तियों में से 9% कैंसर के कारण मरते हैं. भारत में लगभग 0.07% लोग कैंसर से मरते हैं.

एडस

यह एक रेट्रो विषाणु HIV से होने वाला रोग है जो रुधिर से रुधिर के संपर्क में  द्वारा रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैलता है. एड्स की खोज गेलो और मोंटेगेनियर में सर्वप्रथम 1981 में की थी. इसकी अवधि 6 से 20 वर्ष तक है. HIV विषाणु लिंफोसाइट कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है तथा शरीर अन्य रोगों जैसे बुखार, टीबी, निमोनिया आदि की चपेट में आ जाता है, जिससे रोगी की मृत्यु हो जाती है.

आज इस आर्टिकल में हमने आपको मानव के स्वास्थ्य और रोगों से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी, मानव में होने वाले विभिन्न रोग एवं लक्षण, मानव स्वास्थ्य और रोग, मानव शरीर से जुड़े 5 बड़े रहस्य, के बारे में बताया है, अगर आपको इससे जुडी कोई अन्य जानकारी चाहिए तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते है.

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