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मारजेरिन की खोज कब और किसने की?

इस आर्टिकल में हम आपको मारजेरिन की खोज कब और किसने की? के बारे में बता रहे है.

मारजेरिन की खोज

करीब 1 शताब्दी पहले सैनिकों, नाविकों एव उन सभी को जो लंबी यात्राओं से संबंधित है, अक्सर मक्खन के बगैर गुजारा करना पड़ता था. ऐसा इसलिए होता था, क्योंकि मक्खन बड़ी आसानी से खराब हो जाया करता था.

मारजेरिन की खोज
मारजेरिन की खोज

यहां तक कि नमक, जिसे तब मांस को खराब होने से बचाने के लिए बहुयात में प्रयोग किया जाता था, भी इस संदर्भ में कुछ काम ना आया. नमक लगा मक्खन भी कुछ ही दिनों में बदबू छोड़ने लगता था.

हिप्पोलिट मेजे – मारिस नामक एक फ्रेंच रसायनशास्त्री ने सर्वप्रथम इस समस्या पर गौर किया और इसे सुलझाया भी. उसने इस समस्या को सुलझाने के लिए पशु चर्बी का सहारा लिया.

उसने दूध और पानी में घुलने लायक चर्बी को मिलाकर मक्खन की तरह एक पदार्थ बनाया, जो दिखने और खाने में उतना ही स्वादिष्ट था, जो कई दिनों एवं महीनों तक भी खराब नहीं होता था.

मेजे – मारिस ने अपने इस नए खाद्य पदार्थ को मारजेरीन नाम दिया. नेपोलियन तृतीय के सिपाहियों और अन्य लोगों ने इस उत्पाद को बहुत सराहा.

यह नया खाद्य पदार्थ इतना लोकप्रिय हो गया कि वे राष्ट्र जो मक्खन बेचकर एक बारी राशि बतौर कमाई कर पाते थे, ने एक विशेष कानून बनाकर इस मारजेरीन को बनाना बंद करवा दिया.

पर इतना सब होने पर आज भी मारजेरीन दुनिया भर में करोड़ों लोगों की पसंद है, यह सही मायने में मक्खन का एक बेहतरीन विकल्प है.

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