Invention In HindiStudy Material

टॉर्च का आविष्कार कब और किसने किया?

बिजली चली जाने के बाद में रात को सभी को टॉर्च याद आती है. अब मोबाइल कंपनी भी मोबाइल में टॉर्च देने लगी है. लेकिन क्या आपको पता है की टॉर्च का आविष्कार कब और किसने किया? अगर नही तो आपको इस आर्टिकल में हम बताएँगे की टॉर्च का आविष्कार कैसे हुआ.

टॉर्च का आविष्कार

कोनराड हुबर्ट नामक एक रुसी सन 1890 में अमरीका आया. उस वक्त कोनराड की आयु पैंतीस वर्ष थी और पास जीवनयापन का कोई ठोस आधार भी न था. वह पूरी तरह से टूटा हुआ एक इंसान था.

जीवन जीने के लिए जो भी किया जा सकता था, उसने किया. उसने एक सिगार स्टोर में काम किया, कुछ दिनों के लिए एक रेस्टोरेंट चलाया और बोड्रिंग हाउस भी चलाने की असफल कोशिश की. यहां तक की उसने घड़ीसाजी और खेती में भी अपना हाथ आजमाया.

टॉर्च का आविष्कार
टॉर्च का आविष्कार – Torch kaa Avishakar

परंतु यह उसका दुर्भाग्य ही था की इनमें से कोई भी कार्य उसके लिए फलदायक सिद्ध न हो सका. कमाई के नाम पर एक पैसे की भी बचत असंभव हो गई थी.

कोनराड चाहता था की उसका भी कोई स्थाई काम हो जिसकी कमाई से वह अपना भविष्य सुनिशिचत कर सके.

कोनराड का जोशुआ लिओनल कोएन नामक एक मित्र था. कोएन को बिजली अर्थात विधुत में अत्यधिक रूचि थी. अपने इसी शौक के चलते जोशुआ ने एक ऐसे फूलदान की रचना की थी जिसमें बैटरी लगी थी.

बटन दबाते ही उस फूलदान ही रचना की थी जिसमे बैटरी लगी थी. बटन दबाते ही उस फूलदान में मौजूद बैटरी से विधुत प्रवाह होने लगता जिससें उसमे लगे बल्ब रोशन हो उठता.

कोनराड ने अपने मित्र जोशुआ के इस आविष्कार को बेचने का निश्चय किया. उधर दूसरी तरफ जोशुआ कुछ और नया, बिजली से चलने वाली खिलौना रेल बनाने में लग गया.

उसने अपने द्वारा निर्मित रोशनी वाले फूलदान की निर्माण प्रिक्रिया एवं बेचने के समस्त अधिकार अपने मित्र कोनराड को न्यूनतम राशि में बेच दिए.

इसे किस्मत कहिये या कुछ और कोनराड ने रोशनी वाले उस फूलदान उसे बेचने के बजाये उसे मूल में कुछ परिवर्तित करने की सोची.उसने फूलदान में से बैटरी,बल्ब और कागज की ट्यूब को बाहर निकाल दिया.इस तीनों को मिलकर उसने एक नई चीज बना डाली.अपने द्वारा बनाये गये नये उतपाद को उसने इलेक्ट्रिक हैड टॉर्च अर्थात बिजली से चलने वाली मशाल का नाम दिया.

शुरू में कोनराड ने अपने इस आविष्कार को महज एक नावल्टी आइटम के रूप में ही भेचना शुरू किया था.परन्तु शीघ्र ही लोगो में टॉर्च की उपयोगित आवश्यकता हो गयी.यह एक ऐसी चीज थी हर कोई खरीदना चाहता था.

सन 1928 में कोनराड की मृत्यु हो गई.आश्चर्य जो व्यक्ति आपने  जीवन के प्रारभिक दिनों में पैसे-पैसे की लिए मोहताज था वो अपने पीछे अस्सी लाख डॉलर की संपति छोड़कर मारा था.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close