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जिग सौ पजल का आविष्कार कब और किसने किया?

आज इस आर्टिकल में हम आपको जिग सौ पजल का आविष्कार कब और किसने किया? के बारे में बता रहे है. जिग सौ पजल- एक ऐसा चित्र जो कई खंडो में कटा हुआ हो एवं जिसे एक निश्चित आकार में जोड़कर पुन: मूल चित्र प्राप्त कर लिया जाता हो.

जिग सौ पजल का आविष्कार

अमरीकी क्रांति के समय लंदन, इंग्लैंड में जॉन सिंपलसबरी ने ऐसे माहौल में कुछ नया करने की सोची. उन्होंने इंग्लैड एवं वेल्स के एक साधारण नक़्शे क गोद की सहायता से लकड़ी के एक फट्टे पर चिपका दिया.

जिग सौ पजल का आविष्कार
जिग सौ पजल का आविष्कार

फिर एक महीन आरी की मदद से नक़्शे में प्रदर्शित स्थानों को उनके आकारानुसार काट दिया.

इस तरह से यह एक पहेली बन गई. उन्होंने इसे अपने विधार्थियों के समक्ष रखा. बच्चों को नक़्शे के टुकड़ों को आपस में जोड़ना बहुत भाया. इस तरह से मनोरंजन के रास्ते वे अपना भूगोल सीखने लगे थे.

इस कार्य के दोहरे लाभ (सीखना एवं आनंद प्राप्त करना) को देखते हुए शीघ्र ही अन्य अन्य नक्शों एवं चित्रों कोब ही इसी तरह से काटकर तैयार किया गे. इस तरह से तैयार ये पहेलियों जहाँ ज्ञानार्जन में सहयोगी होती थी वही वे इनसे जूझने वाले का आनंद भी प्रदान करती थी.

इन पहेलियों को बनाने अर्थात् लकड़ी पर चिपके गए चित्रादी को काटने के लिए ‘जिग सौ’ नामक एक विशेष महीन आरी का प्रयोग किया जाता था.

लिहाजा इन पहेलियों को ‘जिग सौ पजल’ कहा जाने लगा था. आज भी इन रोचक पहेलियों को बानाने के लिए इसी जिग सौ आरी का प्रयोग किया जाता है.

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