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दक्षिण के राज्य – विजयनगर, बहमनी राज्य, मुगल और मराठा साम्राज्य

आज इस आर्टिकल में हम आपको दक्षिण के राज्य – विजयनगर, बहमनी राज्य, मुगल और मराठा साम्राज्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहें है जो निम्नलिखित है.

 दक्षिण के राज्य – विजयनगर, बहमनी राज्य, मुगल और मराठा साम्राज्य

दक्षिण के राज्य – विजयनगर, बहमनी राज्य, मुगल और मराठा साम्राज्य

दक्षिण के राज्य – विजयनगर, बहमनी राज्य, मुगल और मराठा साम्राज्य

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना संगम के पुत्रों हरिहर तथा बुक्का ने 13 36 ईस्वी में की. उस समय दिल्ली का सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक था.

विजयनगर साम्राज्य

विजयनगर का महानतम शासक कृष्णदेव राय ( 1509- 29 ई)  तुलुव वंश का था. कृष्णदेव राय के दरबार में 8 महान कवि रहते थे, जिन्हें अष्टदिग्गज कहा जाता था. कृष्णदेव राय ने तेलुगु भाषा में अमुक्तमाल्यद ग्रंथ की रचना की. उसने हजारा तथा विट्ठल स्वामी मंदिर का निर्माण करवाया.

सदाशिव राय के शासनकाल में 15 से 65 ईसवी में तालीकोटा या बनीहटी की लड़ाई हुई, जिसमें विजयनगर की हार हुई तथा विजयनगर साम्राज्य का पतन हो गया.

बहमनी राज्य

मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में 1327 ईस्वी में हसन गंगू ने बहमनी राज्य की स्थापना की. अलाउद्दीन बहमन शाह के नाम से सत्तासीन हुआ. मोहम्मद तृतीय के शासनकाल में ख्वाजा जहां की उपाधि में मोहम्मद गवा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया.

मोहम्मद गवा ने विद्रोह में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की. अलाउद्दीन फिरोज के शासनकाल में रूसी यात्री निकितन बहमनी राज्य की यात्रा पर आया था. कलीमुल्लाह बहमनी वंश का अंतिम शासक था. इसकी मृत्यु के समय बहमनी राज्य 5 स्वतंत्र राज्यों में बंट गया. इन स्वतंत्र राज्यों से संबंधित विवरण इस प्रकार है –

मुगल साम्राज्य

मुगल वंश का संस्थापक बाबर था. उसने पानीपत के प्रथम ( 1526 ईस्वी) मैं इब्राहिम लोदी को पराजित कर भारत में मुगल वंश की स्थापना की.

बाबर

बाबर गान के सांसद उमर शेख मिर्जा का बेटा था. पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली बार तुलगमा पद्धति तथा तोपखाने का प्रयोग किया था. बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा की रचना तुर्की भाषा में की, इसका अनुवाद बाद में फारसी भाषा में अब्दुल रहीम खान ने किया. प्रारंभ में बाबर के शव को आगरा में दफनाया गया, बाद में काबुल में दफनाया गया.

हुमायूं (1530-1526 ई.)

दिल्ली की गद्दी पर बैठने से हुमायूं बदख्शां का सूबेदार था. 1523 में दीनपनाह नामक नगर की स्थापना की. जून 1540 ईस्वी में हुमायूं तथा शेर खान के बीच के बीच चोसा का युद्ध हुआ, जिसमें हुमायूं पराजित हुआ. 1540 ईस्वी में हुमायूं तथा शेर खा, के बीच कनौजिया बिलग्राम का युद्ध हुआ, जिसमें हुमायूं पुन: पराजित हुआ तथा उसे भारत छोड़कर भागना पड़ा.

हुमायु के निर्वाचन काल में ही 1542 ई. में अमरकोट में अकबर का जन्म हुआ. 1555 ई. में मच्छी वाडा एवं सरहिंद के युद्ध में हुमायूं ने अपना खोया साम्राज्य वापस प्राप्त कर लिया. 1556 में दीनपनाह भवन में स्थित पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई.

शेरशाह सूरी (1540-45 ई.)

शेरशाह का असली नाम फरीद खां था. उसके पिता हसन खा सासाराम के जमींदार थे. 1540 ईस्वी में कन्नौज के युद्ध में विजय होने के बाद उसने शेर शाह की उपाधि धारण की. उसने पुराने सिक्कों की जगह शुद्ध चांदी के सिक्के जारी किए. उसने जब्ती प्रणाली लागू की, जिसके अंतर्गत लगान का निर्धारण भूमि की माप के आधार पर किया जाता था.

शेरशाह ने रुपया का प्रचलन शुरू किया, जो 178 ग्राम चांदी का होता था. उसने दिल्ली में पुराने किले का निर्माण करवाया. उसके अंदर किला-ए-कुहना मस्जिद का निर्माण करवाया.

उस के शासनकाल में मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत की रचना की. शेरशाह का मकबरा सासाराम में स्थित है. कालिंजर अभियान के दौरान शेरशाह की गोला फटने से मृत्यु हो गई. शेरशाह ने सड़क-ए-आजम ( ग्रांड-ट्रक रोड ) का निर्माण करवाया, जो सुनार गांव से पेशावर तक जाती थी.

अकबर (1556-1605 ई.)

अकबर का राज्यभिषेक 14 वर्ष की आयु में पंजाब के कलानौर नामक स्थान पर हुआ था. बैरम खान अकबर का संरक्षक था. पा

नीपत का द्वितीय युद्ध नवंबर 1556 ई. में हुआ, जिसमें बैरम खान के नेतृत्व वाली मुगल सेना ने हेमू के नेतृत्व वाली अफगान सेना को पराजित किया. अकबर के शासनकाल के दौरान 1576 ई. में मेवाड़ के शासक राणा प्रताप सा मुगल सेना के बीच हल्दी-घाटी का युद्ध हुआ, जिसमें मान सिंह के नेतृत्व में मुगल सेना विजयी रही.

अकबर के दीवान राजा टोडरमल ने 1580 ई. में दहशाला बंदोबस्त लागू किया. दीन-ए-इलाही स्वीकार करने वाला प्रथम एवं अंतिम हिंदू राजा बीरबल था. बीरबल के बचपन का नाम महेश दास था.

अबुल फजल ने आईने-ए-अकबरी पता अकबरनामा नामक ग्रंथ की रचना की. अकबर के दरबार में नवरत्न थे जिनमें तानसेन, बीरबल, टोडरमल आदि प्रमुख थे.

मंसबदारी प्रथा एक विशेष श्रेणी एवं प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसे भारत में अकबर ने प्रारंभ किया था. अकबर के दरबार में अब्दुसमद, जसवंत एवं बसावन प्रमुख चित्रकार थे. अकबर का मकबरा सिकंदरा में है.

जहांगीर (1605-27 ई.)

जहांगीर के बचपन का नाम सलीम था. यह नाम अकबर ने सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा था. जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है जो उसने आगरा के किले में लगवाई थी. अपने विद्रोही पुत्र खुसरो का साथ देने के आरोप में उसने सिक्खों के पांचवे गुरु अर्जुन देव को फांसी दे दी थी.

जहांगीर ने मेहरूनिशा को शादी के बाद नूरमहल एवं नूरजहां की उपाधि दी. नूरजहां ईरान निवासी ग्योस्बेग की पुत्री एवं अली कुली बेग ( शेर अफगन)  की विधवा थी.

जहांगीर के शासनकाल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री सूरत में स्थापित की. जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुजुके – जहांगीर की रचना फारसी भाषा में की.

जहांगीर के समय मुगल चित्रकला का चरमोत्कर्ष पर थी. बालवीर के दरबार में आगा रजा, अबुल हसन, उस्ताद मशहूर, बिशन दास, मनोहर आदि प्रमुख चित्रकार. जहांगीर की मृत्यु बेनीवाल नामक स्थान पर हुई. उसे सच ( लाहौर) में रवि नदी के किनारे दफनाया गया.

शाहजहां (1627-1657 ई.)

शाहजहां के शासन काल की स्थापत्यकला का स्वर्ण युग कहा जाता है. उसने पुर्तगालियों के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से 16 से 32 ई. में पुर्तगालियों से युद्ध किया एवं हुगली पर अधिकार कर लिया. उस ने दिल्ली में एक महाविद्यालय का निर्माण एवं दारुल वर्क का नामक महाविद्यालय की मरम्मत करवाई.

इन्होने दिल्ली में शाहजहानाबाद नामक नया नगर बसाया तथा यहां नई राजधानी स्थापित की. मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां ने ही करवाया था. अपनी बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहां ने आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया.

शाहजहां द्वारा बनाई गई प्रमुख इमारतें हैं – दिल्ली का लाल किला, दिल्ली की जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद आदि.

उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बनाकर आगरा के किले में डाल दिया जहां, 1666 ई. है उसकी मृत्यु हो गई.

औरंगजेब (1658-1707 ई.)

औरंगजेब को शासक बनने के लिए अपने भाइयों से युद्ध करना पड़ा था. धारा एवं औरंगजेब के बीच उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध देवराय की घाटी में 1659 ई. में हुआ. युद्ध में औरंगजेब विजयी.रहा. उसके बाद उसने इस्लाम धर्म अवहेलना के आरोप में धारा की हत्या करवा दी. वोडाफोन की सिम में दिल्ली में शाहदरा के महल में दूसरी बार औरंगजेब का राज्याभिषेक हुआ.

औरंगजेब के समय मुगल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ था. उस के शासनकाल में हिंदू मनसबदारों की संख्या भी सबसे अधिक थी.

इस्लाम धर्म नहीं स्वीकार करने के कारण सिक्खों के नौवे गुरु तेग बहादुर की हत्या औरंगजेब ने करवा दी उन्हें जिंदा पीर भी कहा जाता है. उसने थोड़ा सन्यासी इसी में हिंदुओं पर जजिया कर लगाया. उसने जोर का दर्शन तथा तुलादान प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया.

औरंगजेब ने अपना अधिकतर समय दक्षिण भारत को जीतने में लगा दिया, जो उसके लिए नासूर साबित हुआ. औरंगजेब की मृत्यु के बाद दौलताबाद के निकट दफना दिया गया. उस का मकबरा औरंगाबाद में स्थित है. दिल्ली के लाल किला में मोती मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था.

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगमन तथा अंग्रेजी आधिपत्य

उत्तर मुगल शासक

औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात जो मुगल शासक आए, वे सभी सामान्यतः अयोग्य थे.

बहादुर शाह को शाहे बेखबर कहा जाता था.

मोहम्मद शाह ( 1719-  1748 ई.) के शासनकाल में रानी आक्रमणकारी नादिरशाह ने 1739 ई. दिल्ली पर आक्रमण किया. मयूर सिंहासन और कोहिनूर हीरा भारत से ले गया था. मोहम्मद शाह रंगीला नाम से विख्यात था. मोहम्मद शाह द्वितीय उर्दू भाषा एवं संगीत को प्रोत्साहित किया.

शाह आलम द्वितीय ( 1759 – 1806 ई.) अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के साथ मिलकर 1764 ई. अंग्रेजों के विरुद्ध बक्सर का युद्ध लड़ा था, परंतु पराजित हुआ. शाह आलम द्वितीय के समय अहमद शाह अब्दाली एवं मराठों के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध ( 1761 ई.) हुआ. इस युद्ध में मराठों की हार हुई.

अकबर द्वितीय ने 1833 ई. मे राजा राममोहन राय को अपनी पेंशन बढ्वाने इंग्लैंड भेजा.

अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय (जफर) 1857 ई. के विद्रोह का केंद्रीय नेतृत्व किया. विद्रोह के दमन के बाद बहादुर शाह द्वितीय ( जफर) को उसके पत्नी जीनत महल के साथ ब्रह्मा की रंगून स्थित मांडले जेल में रखा गया. उसकी मृत्यु वहीँ हुई एवं उस का मकबरा रंगून में ही स्थित है.

मराठा उत्कर्ष

मराठा शक्ति का उत्कर्ष शिवा जी के नेतृत्व में हुआ. उनका जन्म 1627 ई. में पुणे के निकट स्थित शिवनेरी किले में हुआ था.

शिवाजी ( 1627 -1680 ई.) के पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजाबाई था.

शिवाजी के गुरु एवं संरक्षक दादाजी कोंडदेव थे. उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी समर्थ रामदास थे. अपने सैन्य अभियान के अंतर्गत शिवाजी ने सर्वप्रथम तोरण के जिले को जीता. शिवाजी की राजधानी रायगढ़ थी. उन्होंने बीजापुर के सेनापति अफजल खान को पराजित कर, उसकी हत्या कर दी.

शिवाजी ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति को अपनाया था. शिवाजी और राजा जयसिंह के बीच 1665  ई. में पुरंदर की संधि हुई.

1674 ईस्वी में शिवाजी ने रायगढ़ में अपना राज्यभिषेक करवाया. उन का राज्यभिषेक काशी के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगा भट्ट ने करवाया था. उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की.

शिवाजी का अंतिम महत्वपूर्ण अभियान 1676 ई. में कर्नाटक का अभियान था. उनकी मृत्यु 1680 ई. में हो गई.

शिवाजी ने शासन कार्यों में सहयोग के लिए 8 मंत्रियों की परिषद गठित की, जिसे अष्टप्रधान कहा जाता था. शिवाजी की कर व्यवस्था मलिक अंबर की व्यवस्था पर आधारित थी.

बालाजी विश्वनाथ भट के प्रथम पेशवा थे, उन्होंने मराठा साम्राज्य का संस्थापक भी कहा जाता है. बालाजी विश्वनाथ ने 17 से 19 ई. में मुगलों से संधि की, जिसे मराठा साम्राज्य का मैग्ना कार्टा कहा जाता है.

बाजीराव प्रथम के समय मराठों की शक्ति चरमोत्कर्ष पर थी. उसे हिंदू पद पादशाही का सिद्धांत प्रतिपादित करने का श्रेय दिया जाता है. बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता है. इसने पेशवा के पद को प्रतीक बनाया. बालाजी बाजीराव के समय ही पानीपत का तृतीय युद्ध (14 जनवरी 1716 ई.) हुआ. इसमें अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व में अफगान सेना विजय रही.

बाजीराव द्वितीय मराठा का अंतिम पेशवा था. 1818 ईस्वी में अंग्रेजों ने पेशवा पद को समाप्त करके बाजीराव द्वितीय को कानपुर के निकट बिठूर निर्वासित कर दिया, जहां 1853 ई. में उसकी मृत्यु हो गई.

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