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पर्यावरण प्रश्नोत्तरी

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पर्यावरण संबंधी समस्याएं क्या है? चार नाम दे।

वे समस्या जो पर्यावरण में बाधा उत्पन्न करती है या पर्यावरण की गुणवत्ता को प्रभावित करती है उसमें अवांछित परिवर्तन लाती है, पर्यावरण संबंधी समस्या कहलाती है।

उदाहरण- विश्व उस्मन (हरित गृह प्रभाव), ओजोन क्षय, अम्लीय वर्षा, प्रदूषण, जैव विविधता की हानि, सुखा व बाढ़ जैसी समस्याएं।

पर्यावरण ह्रास  के मुख्य कारण कौन से हैं?

पर्यावरण ह्रास के मुख्य कारण-

  • औद्योगिकरण, जिसके कारण संसाधनों का ह्रास हो रहा है तथा अनेक प्रकार का प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है।
  • जीवाशम इधनों का अत्यधिक उपयोग,जिसके कारण विश्व ऊष्मन तथा अम्लीय वर्षा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही है।
  • बढ़ती हुई मानव जनसंख्या, जिसके कारण अधिक मात्रा में कचरा व व्यर्थ पदार्थ हो रहे हैं।
  • मनुष्य की स्थान, मकान व कृषि संबंधी बढ़ती हुई आवश्यकताओं के कारण वनों को काटा जा रहा है।

अपशिष्ट पदार्थ क्या होते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं?

अपशिष्ट पदार्थ- दैनिक जीवन में उपयोग के उपरांत ऐसे पदार्थ हैं जिन्हें फेंकना पड़ता है, अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं-

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ, अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ

जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के बीच निम्नलिखित अंतर है, संपष्ट करें।

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
वे पदार्थ जिन्हें जीवाणु तथा कवक जैसे सूक्ष्म जीव सरल पदार्थों में अब गठित कर देते हैं,जैव निम्नीकरणीय  पदार्थ कहलाते हैं, वे पदार्थ जिन्हें सूक्ष्म जीवों द्वारा गठित नहीं किया जा सकता अजैव निम्नीकरणीय  पदार्थ कहलाते हैं।
वे पदार्थ जिनके निम्नीकरण के लिए एंजाइम सूक्ष्म जीवों में उपलब्ध होते हैं, सूक्ष्म जीवों में उपयुक्त एंजाइमों की अनुपस्थिति के कारण उनका अपघटन नहीं होता है।
उदाहरण- कृषि/पादप अपशिष्ट, कागज, चमड़ा गोबर आदि। उदाहरण- संश्लिष्ट पदार्थ, जैसे पॉलिथीन प्लास्टिक, काँच, Pपीड़कनाशी जैसे DDT धातु के टुकड़े, कैन आदि।

अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ, पीड़कनाशी, कीटनाशी, शाकनाशी किस प्रकार पर्यावरण तथा पारितंत्र को प्रभावित करते हैं?

अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैसे पीड़कनाशी बिना निम्नीकरण के पर्यावरण में बहुत लंबे समय तक रहते हैं। वे रासायनिक पदार्थ खाद्य श्रृंखला में उत्पादकों (पौधों) के माध्यम से प्रवेश करते हैं तथा उच्च पोषी स्तरों तक पहुंच जाते हैं। इस प्रक्रिया में एक स्तर से दूसरे स्तर तक उनका सान्द्रण उच्चतम पोषी स्तर में अधिकतम होती है। इस प्रक्रिया को जैविक आवर्धन कहते हैं। यह रसायन जीवो के वृद्धि, विकास योजना आदि में बाधा उत्पन्न कर के अनेक समस्याओं को जन्म देते हैं।

प्लास्टिक जैसे पदार्थों का अपघटन जीवाणुओं द्वारा क्यों नहीं हो पाता है?

एंजाइम पदार्थ विशेष होते हैं जो जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल कार्बनिक  पदार्थों में अब गठित कर देते हैं। लेकिन जीवाणु तथा कुछ मृतजीवी कवक एंजाइमों का स्त्रावण नहीं करते जो प्लास्टिक जैसे पदार्थों को अपघटित कर सकें।

पारितंत्र किसे कहते हैं? 6 सामान्य प्रकार के पारितंत्र के नाम लिखो?

पारितंत्र- किसी क्षेत्र के सभी जीव तथा वातावरण के अजैव कारक संयुक्त रूप से पारितंत्र कहलाते हैं। अंत्य पारितंत्र जैव व अजैव घटकों से मिलकर बना होता है।

सामान्य पारितंत्र- वन, तालाब और झील, समुंद्र, खेत खलिहान, घास के मैदान, उद्यान, नदी।

प्राकृतिक तथा कृत्रिम पारितंत्र के बीच अंतर स्पष्ट करें?

प्राकृतिक पारितंत्र- प्राकृतिक पारितंत्र वे पारितंत्र होते हैं जो मानव क्रियाकलापों के प्रभाव से मुक्त होते हैं, अच्छी प्रकार फलते फूलते हैं। उदाहरण- वन, नदिया, झीले, समुंदर।

कृत्रिम पारितंत्र- मानव निर्मित पारितंत्र ओं को हम कृत्रिम पारितंत्र कहते हैं। उदाहरण- उधान, खेत, जीवशाला।

क्या होगा यदि अपघटक ना रहे?

अपघटक पारितंत्र के बहुत ही महत्वपूर्ण घटक होते हैं, जिनके बिना पारितंत्र निर्वाह नहीं कर सकता। वह पदार्थों का निम्नीकरण/अपघटन करते हैं। यदि वे विद्यमान न हो तो-

  • पोषक तत्वों पुन चक्रीकरण रुक जाएगा।
  • प्रत्येक स्थान पर हम कूड़े कचरे के ढेर पाएंगे, रहने के लिए स्थान नहीं बचेगा। इन कचरे के ढेरों में अनेक प्रकार के रोग वाहक है, रोगाणु पाएंगे, बनेंगे अनेक बीमारियां फेलेगी।
  • मानव क्रियाकलापों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

जीवो के शरीर का क्या होता है जब कोई जीव मरता है?

जीवो का शरीर कार्बनिक पदार्थ, पदार्थों जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा आदि से मिलकर बना होता है। जब जीव मरते हैं तो मृत्यु जीवी जीवाणु व कवक उनके शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सील पदार्थों में अपघटीत कर देते हैं। यह सरल पदार्थ पर्यावरण, ए पर्यावरण, मिट्टी, वायु आदि में मिल जाते हैं। पोषक तत्व जो शरीर में विद्यमान होते हैं, वह वापस मिट्टी में मिल जाते हैं। जहां से उन्हें पौधे द्वारा से प्राप्त कर लेते हैं। यह पदार्थों के पुनः चक्रीकरण में सहायक है।

उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक की परिभाषा लिखो।

  • उत्पादक- ऐसे हरित पादप जो कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थों से मंड का संश्लेषण करते हैं, उत्पादक कहलाते हैं। सभी हरे पौधे व नील हरित शैवाल उत्पादक कहलाते हैं।
  • उपभोक्ता- जो जो उत्पादक तथा उत्पादित भोजन पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से निर्भर करता है उपभोक्ता कहलाते हैं। सभी शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी व परजीवी इसी श्रेणी के जीव है।
  • अपघटक- ऐसे जीवाणु व कवक (सूक्ष्म जीव) मृत जीवों का अपघटन करें सरल अवयवों में बांट देते हैं, अपघटक कहलाते हैं।

स्वपोषी तथा विषमपोषी के बीच अंतर स्पष्ट करें?

स्वपोषी विषमपोषी
इन जीवो में हरे रंग का वर्णन क्लोरोफिल पाया जाता है। इन जीवो में क्लोरोफिल नहीं होता है।
यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया करते हैं। यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया नहीं करते हैं।
ये सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देते हैं। यह सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित नहीं करते हैं।
यह अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं।

उदाहरण- सेवाल, पौधे, कुछ प्रकाश संश्लेषण जीवाणु।

अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकते हैं।

उदाहरण- सभी जंतु, कवर कवक व अधिकतर जीवाणु।

प्रथम तथा द्वितीय उपभोक्ता के बीच अंतर स्पष्ट करें?

प्रथम उपभोक्ता द्वितीय उपभोक्ता
यह वे जीव है जो अपने पोषण के लिए सीधे ही पौधों तथा उनके उत्पादों पर निर्भर करते हैं। यह वे जीव है जो शाकाहारियों को खा कर अपना पोषण प्राप्त करते हैं।
यह शाकाहारी है।

उदाहरण- टिड्डा,  खरगोश, गाय, भैंस, बकरी आदि।  

यह मांसाहारी है।

उदाहरण-  मेंढक, मछली, नीलकंठ,  सांप आदि।

आहार श्रृंखला किसे कहते हैं? एक उदाहरण दें।

आहार श्रृंखला- किसी परिस्थिति के तंत्र में एक जीव द्वारा दूसरे जीव को खाने की क्रमबद्ध प्रक्रिया श्रृंखला कहलाती है, जैसे घास के मैदान की आहार श्रृंखला का उदाहरण है-

घास (उत्पादक) – हिरण (प्रथम उपभोक्ता) – शेर (द्वितीय उपभोक्ता)

तीन चरणों वाली इस आहार श्रृंखला में घास को हिरण हिरण को शेर खाता है। आहार श्रृंखला में उर्जा का क्रमबद्ध स्थानांतरण होता है।

खाद्य जाल किसे कहते हैं?

खाद्य जाल- किसी पारितंत्र में प्रतिपादित होने वाली विभिन्न भाषाओं की आपस में संबंध होने से बने जाल को खाद्य जाल कहते हैं। खाद्य जाल पौधों से आरंभ होता है और मांसाहारी पर समाप्त होता है। एक खाद्य जाल में अनेक आहार श्रृंखला हो सकती है।

आहार श्रृंखला व खाद्य जाल में अंतर लिखो।

  • आहार श्रृंखला में जीवो की एक सूची होती है जो बताती है कि कौन सा जीव किस जीव को खाता है। खाद्य जाल ऐसी अनेक आहार श्रृंखला परस्पर जुड़ी होती है।
  • आहार श्रृंखला में एक जीव एक जगह पर हो सकता है जबकि खाद्य जाल में एक जीव कई खाद्य जालो से जुड़ा हो सकता है।
  • आहार श्रृंखला में जीवो की संख्या कम व खाद्य जाल में इनकी संख्या अधिक होती है।

किसी खाद्य श्रृंखला/पारितंत्र में उर्जा प्रवाह किस प्रकार होता है?

  • पौधे सौर ऊर्जा को ग्रहण करते हैं तथा उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देते। पौधे उन तक आने वाली सौर ऊर्जा का केवल 1% भाग उपयोग में ला पाते हैं।
  • शाकाहारी जीव पौधे तथा उनके उत्पादों को खाते हैं तथा ऊर्जा प्रथम उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित हो जाती है।
  • शाकाहारीयों को द्वितीय स्तर के उत्पादों को खा लेते हैं, इस प्रकार उर्जा दूसरे उपभोक्ता स्तर  तक स्थानांतरित हो जाती है।
  • जब यह मांसाहारी द्वितीयक स्तर उपभोक्ताओं को खाते हैं तो ऊर्जा उच्चत्तम मांसाहारीयों तक पहुंच जाती है। लेकिन यह सारा ऊर्जा का स्थानांतरण 10% के नियम अनुसार होता है। इस नियम के अनुसार एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक केवल 10% ऊर्जा स्थानांतरित होती है।

खाद्य श्रृंखला में सामान्यतः 3-4 पोषी स्तर ही क्यों होते हैं?

  • खाद्य श्रृंखला में निचले पोषी स्तर से ऊर्जा उच्चतर पोषी स्तर तक जाती है। जब ऊर्जा एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर को स्थानांतरित होती है तो केवल 10% उर्जा ही स्थानांतरित होती है। तीसरे- चौथे पोषी स्तर तक उपयुक्त मात्रा में ऊर्जा उपलब्ध रहती है। इसलिए अधिकतर खाद्य संकलन 3-4 पोषी स्तर की होती है।
  • यदि खाद्य श्रृंखला अधिक लंबी हो, और छ: पोषी स्तर तक हो, तो उच्चत्तम पोषी स्तर तक पहुंचने वाली उर्जा बहुत ही कम होगी और जीवो का छठे स्तर पर निर्वाह करना तथा जीवित रहना कठिन होगा।

पारितंत्र के दो कार्य लिखिए।

  • पोषक पदार्थों का पुन र्चक्रण।
  • एक ही दिशा में उर्जा प्रवाह है।

हम ऐसा क्यों कहते हैं कि उर्जा प्रवाह केवल एक ही दिशा में होता है? पारितंत्र में उर्जा प्रवाह को आरेख की सहायता से दर्शाए।

किसी खाद्य श्रृंखला में उर्जा उत्पादकों से शाकाहारीयों में, शाकाहारीयों से मांसाहारियों में और मांसाहारी से उच्चत्तम मांसाहारियो में जाती है।

घास->हिरण->शेर

ऐसा कभी भी नहीं होता कि उर्जा शेरों से हिरण में वह हिरण से घास में स्थानांतरित हो। इसलिए हम कह सकते हैं कि ऊर्जा का प्रवाह केवल एक ही दिशा में होता है।

जैविक आवर्धन से आप क्या समझते हैं? वर्णन करें।

जब हम आने कारक रसायन पीड़कनाशक, कीटनाशक आदि पदार्थों का प्रयोग पीड़ितों को नष्ट करने के लिए करते हैं। तो रासायनिक उत्पादकों के माध्यम से जलप्लवकों, प्राणीप्लवकों के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं। छोटी मछलियां प्लवको को कीटों के लारवा खाते हैं या सूक्ष्म किट खाते हैं, तो यह हानिकारक पदार्थ उन तक पहुंच जाते हैं। यह हानिकारक अजैव निम्नीकरण पदार्थ है, जैसे DDT एक स्तर से दूसरे स्तर में सांद्रित होते चले जाते हैं। इन पदार्थों की सांदर्ता  उच्चत्तम पोषीस्तर में अधिकतम होती है।

सांदर्ता में यह बढ़ोतरी जैविक आवर्धन कहलाती है। यह जीवों के स्वास्थ्य, उनकी प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करती है।

खाद्य श्रृंखला का क्या महत्व है?

  • खाद्य श्रृंखला वे सभी कार्य करती है जो कोई पारितंत्र करता है-
  • ऊर्जा का स्थानांतरण।
  • पोषक तत्वों का चक्रीकरण।

सभी खाद्य श्रृंखला के अंत में हम अपघटकों को पाते हैं। जो मृत जीवों के शरीर में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ का अपघठन कर देते हैं तथा पदार्थों के चक्रिकरण में सहायता करते हैं। खाद्य श्रृंखला हानिकारक रसायनों के स्थानांतरण तथा उच्च स्तरों पर उनके सान्द्रण में भी योगदान देती है।

शाकाहारी आहार आदतें उर्जा के संदर्भ में अच्छी क्यों मानी जाती है?

वनस्पति/हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया करने में सक्षम है। वे सौर ऊर्जा का प्रयोग करके कार्बनिक पदार्थों का संश्लेषण करते हैं। वे प्राप्त 90% ऊर्जा को अपनी वृद्धि के विकास के लिए प्रयोग करते हैं और बाकी 10% ऊर्जा को अगले पोषी स्तर तक स्थानांतरित कर देते हैं। उत्तम पोषी स्तरों पर पहुंचने वाली ऊर्जा की मात्रा कम होती चली जाती है। उत्पादक स्तर की अधिकतम मात्रा उपलब्ध रहती है। इसलिए वे जीव जो सीधे ही उत्पादकों पर निर्भर करते हैं, अधिकतम ऊर्जा ग्रहण करते हैं।

इसलिए शाकाहारी आहार आदतें ऊर्जा के संदर्भ में अधिक अच्छी होती है।

खाद्य जाल क्या है? उदाहरण दें।

खाद्य श्रृंखलाओं की जुड़ी हुई व्यवस्था खाद्य जाल कहलाती है। इसमें किसी जीव का कार्य निश्चित नहीं होता है। एक खाद्य श्रृंखला में कोई जीव शिकार के रूप में हो सकता है तथा दूसरी खाद्य श्रृंखला में वही जीव शिकारी के रूप में हो सकता है। उदाहरण- मेंढक, सांप आदि।

कौन से रसायन ओजोन छिद्र के लिए उत्तरदाई है?

ओजोन का क्षय और उसकी परत छेद क्लोरो फ्लोरो कार्बन आदि के।

नाभिकीय विस्फोट, सल्फेट एयरोसोल, हेलोजन, एयरोसोल दहन/आग तथा आधुनिक अग्निविनाशक।

हम जो कूड़ा कचरा उत्पन्न करते हैं, उसका प्रबंधन किस प्रकार कर सकते हैं?

  • जैव निम्नीकरण व्यर्थ पदार्थों को सूक्ष्म जीव अपघटित कर सकते हैं। कुछ दिनों या महीनों के पश्चात यह मृदा का एक भाग बन जाता है। इस प्रकार के पदार्थों से खाद्य भी तैयार की जा सकती है।
  • अजैव निमनीकरणीय पदार्थों को अलग करके, उन्हें संशोधित करने के उपरांत पून चक्रीकरण करना चाहिए। व्यर्थ पदार्थ जैसे कांच, धातु की वस्तुएं, प्लास्टिक आदि को आसानी से पुनः चक्रीकरीत किया जा सकता है।
  • यह पदार्थ यदि दहनीय है तो इन्हें उच्च ताप पर लगा कर विद्युत के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है जैसे कि दिल्ली और चेन्नई में किया जाता है।
  • कचरे का प्रयोग नीचे स्थानों या गड्ढों को भरने के लिए किया जा सकता है।

ट्रेन में कुल्हाडो का उपयोग क्यों प्रतिबंधित किया गया है?

प्लास्टिक के कप का निपटान यदि ठीक प्रकार से नहीं किया जाता तो यह समस्या उत्पन्न करते हैं क्योंकि अजैव निम्नीकरण य पदार्थ से बनी होते हैं। इसलिए यदि हम बड़ी संख्या में कुल्हाडो का प्रयोग ट्रेन में चाय आदि के लिए करेंगे तो हम अपनी उपजाऊ मिट्टी को खो देंगे, जो हमें कृषि या पौधे उगाने के लिए चाहिए। इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से यह पर्यावरण को प्रभावित करेगा।

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