History

क्षेत्रीय राजवंश – बंगाल के वंश

पाल वंश

आठवीं शताब्दी के मध्य में बंगाल के पाल वंश की स्थापना हुई. धर्मपाल के सलेमपुर अभिलेख के अनुसार, बंगाल की जनता ने गोपाल नामक व्यक्ति को शासक बनाया, जिसने पाल वंश के शासन की नींव रखी. गोपाल ने ओदंतपुरी में  विहार बनाया. धर्मपाल के समय में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जो बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था.

देवपाल ने प्रतिहार शासक मिहिरभोज को पराजित किया, उस के शासनकाल में शैलेंद्र शासक ने नालंदा महाविहार को दान देने के लिए 5 गांव की मांग की थी. अरब यात्री सुलेमान ने पाल वंश को प्रतिहार तथा राष्ट्रकूटों से अधिक शक्तिशाली बताया तथा उसने पाल साम्राज्य को रुहमा कहा है.रामपाल के शासनकाल का कैवर्त जाति के लोगों ने विद्रोह किया था.

सेन वंश

पाल वंश की दुर्बलता का लाभ उठाकर सामंत सेन ने बंगाल में सेन वंश की स्थापना की. बल्लाल सेन, सेन वंश का प्रबुद शासक था.उसने दान सागर एवं अद्भुत सागर ( खगोल विज्ञान पर) ग्रंथ की रचना की.

लक्ष्मण सेन के दरबार में गीत गोविंद के लेखक जयदेव, पवनदूत का लेखक दोहे एवं ब्राह्मण सर्वस्व   के रचयिता ह्लालाय्द्ध. हलायुध लक्ष्मण सिंह का न्यायधीश एवं मुख्यमंत्री था. 1202 इसमें बख्तियार खिलजी ने लक्ष्मण सेन के शासनकाल में बंगाल पर आक्रमण किया.

कश्मीर के राजवंश

कल्हण की राजतरंगिणी ( 1150 ई.)  में कश्मीर के प्राचीन इतिहास का वर्णन  है. दूलेभवर्धन ने 627 ईसवी में काकार्कोट जब की स्थापना की थी. ललितादित्य मुक्तापिड ( लगभग है (724 – 760 ई.) कार्कोट बस का प्रसिद्ध शासक था. राजतरंगिणी में ललितादित्य मुक्ता पीर की विजयों का वर्णन है. उसने मार्तंड का सूर्य मंदिर निर्माण करवाया था.

उत्पल वंश का संस्थापक है अवनिवर्तमान था.   जबकि लाहौर वंश का संस्थापक संग्राम राज था. अवनीत वर्मन ने अवंती नगर बसाया तथा उसके अधिकारी सुय्य ने सिंचाई के लिए नहरें बनवाई. 980 ई.में उत्पल वंश की रानी दिद्दा ने राज्य में शांति स्थापित की, किंतु वह एक दुराचारिणी महिला थी. 1003 इसवी में उसकी मृत्यु के बाद संग्रामराज शासक हुआ, जिसने लाहौर वंश की नींव डाली.

इसी वश में हर्ष राजा हुआ, जिसका आश्रित कवि कल्हण था, जिसकी राजतरंगिणी  का विवरण इस वर्ष के अंतिम शासक जय सिंह के साथ समाप्त हो जाता है. तो . 133९ ईस्वी में शाहमीर ने कश्मीर में मुस्लिम शासन की स्थापना की.

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