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कार्बन एवं उसके यौगिक से जुड़े सवाल और उनके जवाब


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कार्बन प्रकृति में कितनी मात्रा में पाई जाती है?

सभी सजीव कार्बन पर आधारित होने के बावजूद प्रकृति में कार्बन अल्प मात्रा में पाई जाती है। भूपर्पटी में कार्बन यौगिकों के रूप में केवल 0.02% कार्बन पाई जाती है। वायुमंडल में इसकी मात्रा 0.03% (कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में) पाई जाती है।

सह संयोजी यौगिक का गलनांक व क्वथनांक प्राय निम्न क्यों होता है?

सहसंयोजी यौगिक इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी के कारण बनते हैं। अनु के विभिन्न परमाणु के बीच सहसंयोजी बंध होते हैं। यह परमाणु प्रबल सह संयोजी बंध द्वारा एक दूसरे से जुड़े होते हैं। लेकिन लोगों के बीच लगने वाला आणविक बल बहुत कमजोर होता है, जिन्हें तोड़ने के लिए कोई विशेष बल की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसलिए अधिकतर कार्बनिक (जैविक) यौगिकों के गलनांक व क्वथनांक निम्न होते हैं और यह पदार्थ है जैसी है तथा द्रव्य अवस्था में पाए जाते हैं।

सहसंयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक क्यों होते हैं?

सह संयोजी यौगिक, सहसंयोजी आबंधो के कारण बनते हैं। इसमें से अधिकतर यौगिक जल में घुलनशील होते हैं और आयनों के रूप में अपगठित नहीं होते हैं। आयनों (अवशोषित कणों) की उपलब्ध न होने के कारण यह विद्युत का चालन नहीं कर सकते।

जब ये कार्बनिक विलायकों में घूलते हैं, तो भी यह आवेशित कण उत्पन्न नहीं करते। इस कारण से विद्युत के चालन में असफल रहते हैं।

कार्बन के परमाणु को उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए क्या करना होता है?

कार्बन के बाह्यत्तम कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं अत: कार्बन परमाणु को उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या खोने की आवश्यकता होती है। अंतः कार्बन परमाणु-

  • चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर C4- ऋण आयन बना सकता है.
  • चार इलेक्ट्रॉन को करें C4+ धनायन बना सकता है।

इस प्रकार कार्बन परमाणु अन्य तत्वों के परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी कर दोनों परमाणु उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर यौगिक का निर्माण करते हैं।

सह संयोजी यौगिक उनके गुणों को सूचीबद्ध करें ?

  • भौतिक अवस्था- यह सामान्यत: गैस या द्रव्य होते हैं। उच्च आणविक द्रव्यमान वाले यौगिक ठोस होते हैं।
  • गलनांक तथा क्वथनांक- सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक व  प्राय निम्न होते हैं।
  • घुलनशीलता- यह कार्बनिक विलायक को में सरलता से घुल जाते हैं तथा जल में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
  • विद्युत के कुचालक- यह विद्युत के कुचालक होते हैं।

आयनिक तथा सहसंयोजी यौगिक के बीच अंतर करें।

आयनिक यौगिक सहसंयोजी यौगिक
यह प्राय: क्रिस्टलीय ठोस होते हैं ये प्राय: गैसीय या द्रव होते हैं।
इनके गलनांक व क्वथनांक प्राय उच्च होते हैं। इनके गलनांक व क्वथनांक निम्न होते हैं।
यह शीघ्रता से पानी में घुल जाते हैं। यह शीघ्रता से कार्बनिक विलायक को में घुल जाते हैं।
यह विद्युत के अच्छे चालक होते हैं यह विद्युत के कुचालक होते हैं।
इनकी अभिक्रियाएं सामान्यतः तीव्र होती है। इनकी अभिक्रियाएं धीमी होती है।

हीरा व ग्रेफाइट के बीच अंतर करें।

हीरा ग्रेफाइट
यह एक पारदर्शक ठोस है। यह एक स्लेटी रंग का ठोस अपारदर्शक पदार्थ है।
यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक है। यह ऊष्मा और विद्युत का सुचालक है।
यह अत्यधिक कठोर होता है। यह अपेक्षाकृत नर्म होता है।
इसका गलनांक बहुत उच्च होता है। इसका भी गलनांक उच्च होता है लेकिन अपेक्षाकृत कम होता है।

संश्लेषित हीरा किस प्रकार तैयार किया जाता है?

संश्लेषित हीरा तैयार करने के लिए शुद्ध कार्बन को उच्च ताप व उच्च दाब पर उपचारित किया जाता है। यह संश्लेषित हीरे आकार में छोटे होते हैं लेकिन प्राकृतिक हीरो से किसी भी प्रकार भिन्न नहीं है।

संतृप्त व असंतृप्त कार्बन यौगिक किसे कहते हैं? इन के उदाहरण भी दो।

संतृप्त कार्बन यौगिक

जिसे यौगिक सारे कार्बन परमाणु केवल एकल आबध से जुड़े हो, संतृप्त कार्बन योग्य कहलाता है, जैसे मेथेन, एथेन, प्रोपेन ब्यूटेन आदि।

असंतृप्त कार्बन यौगिक

जिस योगी के दो कार्बन परमाणु एक द्वि-आबंध या त्री-आबंध से जुड़े हो, उन्हें असंतृप्त कार्बनिक यौगिक कहते हैं, जैसे एथीन, एथाईन आदि।

संतृप्त तथा असंतृप्त कार्बनिक यौगिक के बीच अंतर करें?

संतृप्त कार्बनिक यौगिक असंतृप्त कार्बनिक यौगिक
कार्बनिक यौगिक जिसमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एक कल आबंध होते हैं,संतृप्त यौगिक कहलाते हैं। कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-या त्री-आबंध होते हैं, असंतृप्त कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं।
यह प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं। यह योगात्मक अभिक्रिया करते हैं।
यह ब्रोमीन जल को रंगहीन नहीं करते है।  उदाहरण- एल्केन यह प्रॉमिस जल को रंगहीन कर देते हैं।  उदाहरण- एल्कीन, एलकाइन।

हाइड्रोजन कार्बन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं।

हाइड्रोकार्बन

कार्बन और हाइड्रोजन परमाणु वाले यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।  ये प्रमुख तीन प्रकार के होते हैं-

एल्केन

संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एकल आबंध वाले)

एल्कीन

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एक या अधिक दोहरे आबंध वाले)

एल्काइन

असंतृप्त (एक या अधिक त्री-आबंध वाले)

समजातीय श्रेणी में आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गुण धर्मों में किस प्रकार की क्रमब्द्धता दिखाई देती है?

समजातीय श्रेणी में आणविक द्रव्यमान पड़ने पर भौतिक गुण धर्मों में करता दिखाई देती है क्योंकि आणविक द्रव्यमान के बढ़ने से गलनांक  एवं क्वथनांक में वृद्धि होती है। किसी विशेष विलायक में विजेता जैसे भौतिक गुणधर्म में भी इसी प्रकार क्रम बद्ध दिखाई देती है। परंतु कार्यात्मक समूह के द्वारा सुनिश्चित किए जाने वाले रासायनिक गुण समजातीय श्रेणी में एक समान बने रहते हैं।

पृथ्वी के अंदर कोयले की उत्पत्ति किस प्रकार हुई?

25 करोड़ वर्ष पूर्व महाद्वीपों के अधिकांश भाग दलदल से ढके हुए थे। इस दलदल में विशालकाय फर्न के सघन वन पाए जाते थे। इन वनों द्वारा विशाल मात्रा में सौर ऊर्जा का अवशोषण किया जाता था। इस प्रक्रम में वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड गैस में से कार्बन, का कार्बोहाइड्रेट के रूप में जैव द्रव्यमान में परिवर्तित हो गया तथा ऑक्सीजन वायुमंडल में मुक्त हो गया।

पृथ्वी पर होने वाली भूकंप जैसी प्रक्रियाओं के कारण 1 पृथ्वी की गर्त में समा गए तथा ऑक्सीजन की पहुंच से दूर हो गए। ऐसे दबे हुए जंगल ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अधिक दाब तथा उच्च ताप के कारण कोयले में परिवर्तित हो गए।

पेट्रोलियम किस प्रकार बना था?

ऐसा विश्वास किया जाता है कि पेट्रोलियम समुन्द्र में रहने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं के अवशेषों से बनता है। मृत्यु के पश्चात यह जीव धंसकर तल पर पहुंच जाते हैं और धीरे-धीरे रेत तथा मृदा द्वारा ढक जाते हैं। करोड़ों वर्षों की अवधि में यह अवशेष ऊष्मा, दाब तथा उत्प्रेरक की क्रियाओं के फलस्वरूप पेट्रोलियम में परिवर्तित हो जाते हैं। यह हल्के होने के कारण छिद्रयुक्त स्थानों रिसकर पृथ्वी की सतह की और तब तक आते रहते हैं, जब तक अपारगम्य में चट्टानों द्वारा उन्हें रोक नहीं लिया जाता। इस प्रकार अपारगम्य में चट्टानों के बीच तेल कूप बन जाते हैं।

कोयला तथा पेट्रोलियम के दहन से प्रदूषण क्यों होता है?

कोयला तथा पेट्रोलियम जीवाश्म इंधन है। इनमें सल्फर तथा नाइट्रोजन के यौगिक होते हैं। इन यौगिकों के जलने पर सल्फर के ऑक्साइड, जैसे SO2, SO3  तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे – N2O, NO2 आदि उत्पन्न होते हैं.  यह ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं तथा जल में घुलनशील होते हैं. यह वर्षा के जल में भी घुल जाते हैं तथा अम्लीय वर्षा का कारण बनते हैं. इसलिए कोयला और पेट्रोलियम के दहन के कारण प्रदूषण होता है.

योगात्मक तथा प्रतिस्थापन क्रियाओं में अंतर कीजिए?

योगात्मक अभिक्रिया
प्रतिस्थापन अभिक्रिया
कार्बनिक यौगिक जिसमें कार्बन-कार्बन द्वि-या त्रिआबध होते हैं हाइड्रोजन के साथ योगात्मक अभिक्रिया करके एकल उत्पाद बनाते हैं, ऐसी अभी क्रियाओं को योगात्मक अभिक्रिया ही कहते हैं। कार्बनिक यौगिक जिनमें कारबन- कार्बन ए कल आबंध  होते हैं क्लोरिन जैसे अनुभव के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन परमाणु  को प्रतिस्थापित कर देते हैं। ऐसी अभिक्रियाएं प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन इस प्रकार की अभिक्रिया करते हैं,। असंतृप्त हाइड्रोकार्बन इस प्रकार की अभिक्रिया करते हैं।

एथेनॉल के भौतिक गुण लिखो?

  • एथनाल या एथिल अल्कोहल गंध वाला रंगहिन द्रव होता है.
  • इसका स्वाद तीक्ष्ण होता है।
  • इसका क्वथनाक 78० सेल्सियस होता है।
  • यह जल से हल्का तथा इसमें पूर्णतया मिश्रणय पदार्थ होता है।

एथेनॉल के चार उपयोगो की सूची बनाएं।

  • पेट्रोल के साथ मिश्रित करके इसे वाहनों में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • इसे रबड़, पेंट, रंग-रोगन आदि उद्योगों में विलायक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • इसे कार्बनिक पदार्थ है, जैसे क्लोरोफॉर्म, ईथर, तथा एसिटिक अम्ल, आदि के निर्माण में प्रयोग किया जाता।
  • इसका उपयोग पेय पदार्थ के रूप में किया जाता है। यह सरकार राजस्व आय का प्रमुख स्रोत है।

शराब (एल्कोहल) पीने के कोई चार हानिकारक प्रभाव बताएं?

  • शराब पीने से मस्तिष्क के क्रियाकलापों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को धीमा कर देती है।
  • इससे निर्णय लेने की क्षमता, ध्यान, स्वय पर नियंत्रण तथा मांसपेशियों के समन्वय में रुकावट/बाधा उत्पन्न होती है।
  • यकृत के अंदर इसका ऑक्सीकरण एथेनॉल में हो जाता है। जो बहुत ही हानिकारक है और यकृत को हानि पहुंचाता है।
  • इस में मिलावट के कारण यह अंधापन या मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

एल्कोहल का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

  • यह उपापचयी क्रियाओं को धीमा कर देती है तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सूचित कर देती है।
  • इससे समन्वय बिगड़ जाता है, मानसिक उलझन बढ़ती है तथा नींद जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • समझ-बुझ और प्रतिक्रिया का समय बढ़ जाता है।
  • यदि यह मेथेनॉल के साथ विकृत हो तो यह प्रोटेप्लाजम को जमा देती है तथा मृत्यु का कारण बन जाती है। थोड़ी सी भी मात्रा में यह अधेपन का कारण भी बन सकती है।

एस्टर के दो उपयोग बताइए।

  • एस्टर है किसी अम्ल या क्षार की स्थिति में वापस एल्कोहल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल देते हैं। इस अभिक्रिया को साबुन निर्माण में प्रयोग किया जाता है।
  • एस्टर की गंद मीठी होती है। इनका उपयोग खुशबूदार इत्र तथा अन्य सुगंधित पदार्थ बनाने में होता है।

एथनोइक अम्ल के भौतिक गुण लिखो।

  • यह रंग हीन एवं तीखी गंध वाला द्रव है।
  • इसका क्वथनाक 391K है।
  • यह सभी अनुपात में समांगी मिश्रण बनाता है।
  • इसका गलनांक 290K होता है।
  • ठंडी जलवायु में शीत के दिनों में जमने के गुण  के कारण इसे ग्लैशल एसिटिक अम्ल कहते हैं।

एथनोइक अम्ल के चार उपयोगों की सूची बनाएं।

  • इसका उपयोग बड़े पैमाने पर रंजक, रेयान आदि बनाने में किया जाता है।
  • सिरके के रूप में इसका उपयोग खाद्य परिरक्षक के रूप में किया जाता है।
  • इसका उपयोग एसीटोन तथा एथिल एसीटेट के निर्माण में किया जाता है।
  • इसका उपयोग सैलूलोज एसिटेट के निर्माण में किया जाता है जो एक महत्वपूर्ण कृत्रिम रेशा है।

अपमार्जकों साबुन का स्थान क्यों ले लिया है?

  • अपमार्जकों कठोर जल में भी क्रिया कर सकते हैं, जबकि साबुन कठोर जल में क्रिया नहीं कर पाते।
  • अपमार्जकों से अम्लीय जल में भी कपड़े धोए जा सकते हैं।  
  • साबुन की अपेक्षा अपमार्जकों में कपड़ों को गीला करने की क्षमता अधिक होती है।
  • अपमार्जकों से ऊनी कपड़े भी धोए जा सकते।
  • अपमार्जकों में जल का पृष्ठ तनाव कम करने की काफी क्षमता होती है, इसलिए साबुन की अपेक्षा कपड़ों को अधिक साफ करते हैं।
  • साबुन को बनाने में वनस्पति तेलों की आवश्यकता होती है, जो खाद्य पदार्थ में प्रयुक्त होते हैं, जबकि अपमार्जकों  कोयले तथा पेट्रोलियम के उत्पादों से बनाए जाते हैं। इनसे वनस्पति तेलों की बचत होती है।
  • अपमार्जकों चिकनाई आदि की आवश्यकता में बदलकर सरलता से दूर कर सकते हैं।

पानी की कठोरता से क्या अभिप्राय है? इस कठोरता का क्या कारण है?

पानी जो साबुन के साथ कठिनता से झाग देता है, उसे कठोर पानी कहते हैं। इस प्रकार का पानी साबुन के साथ तलछट बनाता है, जो जल में घुलनशील होता है तथा नीचे बैठ जाती है।

कारण- पानी की कठोरता उसमें उपस्थित कैल्शियम तथा मैग्नीशियम क्लोराइड तथा सल्फेट लवणों के कारण से होती है।


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