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कंप्यूटर का परिचय और इसका इतिहास


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कंप्यूटर का परिचय

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक सामग्री (आंकड़ा) संसाधन युक्ति है, जो उनके, उच गति, सटीकता एवं यथार्थता के साथ आंकड़ों को पढ़ना तथा लिखना गणना तथा तुलना, सती प्रथा संस्थान कर सकता है.

कंप्यूटर के प्रमुख तकनीकी कार्य चार प्रकार के होते हैं-

  1. आंकड़ों का संकलन या निवेशन
  2. आंकड़ों का संचयन
  3. आंकड़ों का संसाधन
  4. आंकड़ों या प्राप्त जानकारी का निगमन या पुननिर्गमन

कंप्यूटर का इतिहास

  • 18 से 22 ईसवी में चार्ल्स बैवेज ने डिफरेंस इंजन का आविष्कार किया, तभी से आधुनिक कंप्यूटर युग की शुरुआत हुई.
  • डॉक्टर वोन न्यूमेंन ने कंप्यूटर के कार्य हेतु द्विआधारी पद्धति का प्रयोग किया.
  • विश्व में सर्वाधिक कंप्यूटरों वाला देश संयुक्त राज्य अमेरिका है. इस सूची में भारत का स्थान 19वां है.
  • भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर सिद्धार्थ है, जिसका निर्माण वर्ष 1956 में इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने किया था.
  • भारत में प्रथम कंप्यूटर आरक्षण पद्धति नई दिल्ली में लागू की गई थी.
  • 2 दिसंबर को कंप्यूटर दिवस के रुप में मनाया जाता है.
  • भारत में प्रथम कंप्यूटर 16 अगस्त, 1996 के बेंगलुरु के प्रधान डाकघर में लगाया गया था.
  • किसी कंप्यूटर या उसके हार्ड डिस्क किया किसी चलते हुए कार्यक्रम का अचानक खराब हो जाना क्रेश कहलाता है.

कंप्यूटर के प्रकार

ट्यूबों का प्रयोग पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों में (1940-54), आइसी चिपो का प्रयोग तृतीय पीढ़ी ( 1965-71) माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों (1971-वर्तमान) में किया गया. इंटेल कंप्यूटर प्रोसेसर का निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी है.

समांतर संसाधन एवं सुपर कंडक्टर का प्रयोग, रोली के पहचान, कृत्रिम बौद्धिकता आदि पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में उपलब्ध है. पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में ऑप्टिकल डिस्क का उपयोग होता है. आइबीएम नोटबुक, पेंटियम PC तथा सुपर कंप्यूटर के अंतर्गत आते हैं.

माइक्रो कंप्यूटर

एक ही computer के अंदर केथोड़े-रे ट्यूब, पिक्चर ट्यूब और माइक्रो प्रोसेसर के साथ कीबोर्ड लगाकर निर्मित किए गए, टेलीविजन के आकार के बराबर कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर कहते हैं. इन्हें माइक्रो कंप्यूटर कहने के निबंध दो कारण है-  प्रथम, यह एक तो माइक्रो प्रोसेसर का प्रयोग करते हैं. द्वितीय, इनका अपना आकार मेनफ्रेम कंप्यूटर की तुलना में कम है. माइक्रो कंप्यूटर की क्षमता एक लाख अनुदेश प्रति सेकंड के बराबर होती है.

मिनी कंप्यूटर

वर्ष 1959 में प्रोग्राममेंबल डाटा प्रोसेसर-1 (पीडीपी) ने मिनी कंप्यूटर का उत्पादन किया था. इसके संशोधित मॉडल पीडीपी-8 में एकीकृत परिपथ का उपयोग कर इस कंप्यूटर का आकार एवं कीमत दोनों ही विशाल से लघुकाय हो गए. मिनी कंप्यूटर का आकार एक छोटी अलमारी के बराबर होता है, इसी मिनी कंप्यूटर कहा जाने लगा. यह माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक शीघ्रता से कार्य कर सकता है. इसकी डेटा स्थानांतरण 40,00,000 BPS होता है

सुपर कंप्यूटर

सुपर कंप्यूटर, कंप्यूटर की सभी श्रेणियों में सबसे बड़े, सबसे अधिक संग्रह क्षमता वाले तथा सबसे अधिक गति वाले हैं. इनमें कई CPU साथ समांतर क्रम में कार्य करते हैं. एक सुपर कंप्यूटर की गति से 10,000 MBPS तक होती है.

सुपर कंप्यूटर का उपयोग में होता है

  • वैज्ञानिक प्रयोगशाला में शोध एवं खोज करना.
  • मौसम संबंधी सूचनाओं की भविष्यवाणी करना.
  • उच्च गुणवत्ता वाले एनिमेशन चलचित्रों का निर्माण करना.

विश्व का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर थ्येनहे-1

चीन के रक्षा विज्ञानिकों ने विश्व का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर बनाया. यह कंप्यूटर 33.6 क्वैडट्ट्रिलियन (33.86 हजार  करोड़ अरब) गणनायक प्रति सेकंड करने में सक्षम है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने 17 जून, 2013 को जारी रिपोर्ट में बताया कि चीन में बनाया गया नवीनतम सुपर कंप्यूटर थ्येनहे- 2 अमेरिका के सुपर कंप्यूटर टाइटन से गणना के मुकाबले में कहीं आगे है.

इस सुपर कंप्यूटर को चीन के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी ने विकसित किया.

विश्व के शीर्ष 10 सुपर कंप्यूटर

रैंक नाम ऑपरेटिंग सिस्टम देश
1 तिअन्हे -2 लाइनक्स   चीन
2 टाइटन लाइनक्स   अमेरिका
3 सिकोया लाइनेक्स     अमेरिका
4 के. क्म्म्युर लाइनेक्स      जापान
5 मीरा लाइनेक्स    अमेरिका
6 स्तेम्पिडी   लाइनेक्स     अमेरिका
7 जैकविन लाइनेक्स    जर्मनी
8 वालकन लाइनेक्स    अमेरिका
9 सुपर\ एमयुसी लाइनेक्स    जर्मनी

वाणिज्यक कंप्यूटर

वर्ष 1946 में निर्मित सामान्य उद्देश्य के लिए बनाया गया प्रथम इलेक्ट्रॉनिक अंकीय कंप्यूटर था. इसमें  निर्वात का प्रयोग किया गया था. इसके आकार में बढ़े और अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने वाले थे. इनमें सारे निर्देश तथा सूचनाएं 0 तथा 1 के रूप में कंप्यूटर में संगठित होते थे तथा इनमें मशीनी भाषा का प्रयोग किया गया था.

यूनिवेक-1  

विश्व का पहला व्यवसायिक के कंप्यूटर था. इस मशीन का विकास खोज और वैज्ञानिक उपयोग के लिए किया गया था, लेकिन अमेरिका में वाणिज्य प्रयोग के लिए यूनिबैक का इस्तेमाल किया गया था. प्रथम यूनिवर्स 1951 में अमेरिका के जनगणना ब्यूरो को प्रदत किया गया था. यूनिबैंक का पूरा नाम यूनिवर्सल ऑटोमेटिक कंप्यूटर है. यह प्रमुख रूप से प्रेस पर एककर्ट जोन मकाली ने विकसित किया था.

कंप्यूटर का उपयोग

व्यवसाय

ऑनलाइन मार्केटिंग, बैंकिंग क्षेत्र आदि.

चिकित्सा

टेलीमेडिसिन, लेजर ऑपरेशन आदि.

शिक्षा

ऑनलाइन पुस्तकें एवं प्रयोग आदि.

उद्योग

क्रय-विक्रय, मूल्य निर्धारण, रसायन उद्योग एवं ऑटोमोबाइल उद्योगों में 90% कार्य कंप्यूटर से किया जाता है.

घरेलू क्षेत्र

अनेक घरेलू उपकरणों, जैसे- माइक्रोवेव , ओवेन, वॉशिंग मशीन एवं डिशवासर्श  आदि में एंबेडेड कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है. अमेंबेडेड सिस्टम एक कंप्यूटर सिस्टम है, जिसे अक्सर रियल टाइम कंप्यूटर की भाषाओं के साथ कुछ विशेष कार्य को करने के लिए बनाया जाता है. एंबेडेड सिस्टम वर्तमान में प्रयोग किए जाने वाले अनेक उपकरणों को नियंत्रित करते हैं.

इस प्रकार कंप्यूटर का प्रयोग प्रबंधन, अंतरिक्ष क्षेत्र, दूरसंचार क्षेत्र इत्यादि क्षेत्रों में किया जाता है.

कंप्यूटर का दुरुपयोग – हैकिंग

क्लिकजैकिंग

एक ऐसी दुर्भावनापूर्ण तकनीक है, जिसमें वक्ताओं से किसी सामान्य से दिखने वाले वेब पेज पर क्लिक करवाकर छल से उनकी गोपनीय जानकारी प्राप्त कर ली जाती है. इसके द्वारा नेट बैंकिंग से दूसरे के खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं, किसी व्यक्ति की बैंक की जानकारी में सेंध लगाई जा सकती है.

कंप्यूटर की सीमाएं

कंप्यूटर में विद्यमान विभिन्न विशेषताओं  के बावजूद उस में कुछ कमियां होती है, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित है-

विवेकहीनता

कंप्यूटर में स्वयं का विवेक अनुपस्थित होता है एवं वह मनुष्य द्वारा संग्रहीत निर्देशक और सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों के अनुसार निर्णय लेकर प्रक्रिया करता है

आवेदनशीलता

कंप्यूटर एक निर्जीव यंत्र है, जो मनुष्य के समान मानवीय गतिविधियों के परिणाम स्वरुप भावनाएं प्रकट नहीं कर सकता है.

ज्ञान में उत्तरोत्तर विकास कि अक्षमता

कंप्यूटर में सजीव दाग नहीं होता है, जिसकी वजह से उसके ज्ञान में उत्तरोत्तर विकास संभव नहीं हो पाता है.

विकल्प प्राप्त करने की सीमित क्षमता

कंप्यूटर में मनुष्य के समान अनंत विकल्पों को प्राप्त करने की क्षमता नहीं होती है, वह प्रोग्रामर द्वारा निर्धारित है निश्चित विकल्पों का ही चयन कर सकता है.

कंप्यूटर की भाषाएं

कंप्यूटर की भाषा को निम्न तीन वर्गों में बांटा जा सकता है-

मशीनी भाषा

इस भाषा में प्रत्येक आदेश के दो भाग होते हैं- आदेश कोर्ट तथाकथित कोड. इन दोनों को 0  और 1 के रूप में व्यक्त किया जाता है.

असेंबली भाषा

इस भाषा में याद  रखे जाने योग्य कोर्ट का प्रयोग किया गया, जिसे निमोनिक कोड कहा गया है.

उच्च स्तरीय भाषा

यह बातें मनुष्य की बोलचाल और लिखने में प्रयुक्त होने वाली भाषाओं के काफी करीब है, जैसे- कोबोल,  बेसिक आदि.

कोबोल

कोबोल  वास्तव में कॉमन बिजनेस आरिएटेनड लैंग्वेज का  संक्षिप्त रूप है. इस भाषा का विकास व्यवसायिक कार्यों के लिए किया गया है.

बेसीक

यह अंग्रेजी के शब्दों  बिगनर्स ऑल पर्पज सिंबालीक इंस्ट्रक्शनकोर्ट का सक्षिप्त  रूपांतर है. इस भाषा में प्रोग्राम में नहीं था देश के किसी निश्चित भाग को निष्पादित किया जा सकता है.

पास्कल

यह एक विधि अभिमुख प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसमें डाटा स्ट्रक्चर एवं  स्ट्रक्चरड प्रोग्रामिंग का प्रयोग किया जाता है.

असेंबली भाषा के प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम कहा जाता है, इसका मशीनी भाषा में अनुवाद करने के बाद प्राप्त प्रोग्राम को ऑब्जेक्ट प्रोग्राम कहा जाता है.


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