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जांजगीर-चाम्पा जिले से जुडी जानकारी

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जांजगीर- चाम्पा का संभाग कहां स्थित है?

बिलासपुर

जांजगीर-चाम्पा जिले का उपनाम क्या है?

जाजल नगरी

जांजगीर- चाम्पा का जिला मुख्यालय कहां स्थित है?

जांजगीर

जांजगीर- चाम्पा का क्षेत्रफल कितने वर्ग किलोमीटर में है?

4466.74  वर्ग किमी

जांजगीर- चाम्पा की तहसील कहां स्थित है और कितनी है?

10 (बामिनीदीही,  पामगढ़, नवागढ़, सक्ति, मालखरौदा, जेजेपुर, डभरा, बलौदा, अकलतरा, चांपा)

जांजगीर- चाम्पा  में कुल गांव की संख्या कितनी है?

915

जांजगीर- चाम्पा  में कुल जनपद पंचायत की संख्या कितनी है?

09

जांजगीर- चाम्पा में कुल ग्राम पंचायत की संख्या कितनी है?

631

जांजगीर- चाम्पा में कुल नगरपालिका की संख्या कितनी है?

04

जांजगीर- चाम्पा में कुल नगर निगम की संख्या कितनी है?

0

जांजगीर- चाम्पा में कुल नगर पंचायत की संख्या कितनी है?

11

जांजगीर- चाम्पा में कुल जनसंख्या में 2011 में रैंक कितना था?

5

जांजगीर- चाम्पा में कुल जनसंख्या 2011 में कितनी थी?

16,19,707

जांजगीर- चाम्पा में पुरुषों की संख्या 2011 में कितनी थी?

8,15,717

जांजगीर- चाम्पा में 2011 में महिला की संख्या कितनी थी?

8,03,990

जांजगीर- चाम्पा में 0-6 आयु वर्ग की कुल जनसंख्या 2011 में कितनी थी?

2,24,218

जांजगीर- चाम्पा में 0-6 पुरुष की जनसंख्या कितनी थी?

1,14,954

जांजगीर- चाम्पा में 0-6 महिला की जनसंख्या कितनी थी?

1,09,261

जांजगीर- चाम्पा में साक्षरता दर 2011 में कितना प्रतिशत था?

73.07  प्रतिशत

जांजगीर- चाम्पा में महिला साक्षरता दर 2011 में कितना था?

61.31 प्रतिशत

जांजगीर- चाम्पा में जनसंख्या घनत्व 2011 में कितना था?

363 प्रतिवर्ग किमी

जांजगीर- चाम्पा लिंगानुपात 2011 में कितना था?

1000 : 986

जांजगीर- चाम्पा लिंगानुपात में रैंक 2011 में कितना था?

15

जांजगीर- चाम्पा में जनसंख्या घनत्व में रेंक 2011 में कितना था?

1

जांजगीर- चाम्पा में साक्षरता 2011 में कितना था?

7

जांजगीर- चाम्पा कुल अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 2011 में कितनी थी?

1,87,196

जांजगीर- चाम्पा में कुल अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 2011 में पुरुष की जनसंख्या कितनी थी?

93,186

जांजगीर- चाम्पा में कुल अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 2011 में महिला की जनसंख्या कितनी थी?

94,110

जांजगीर- चाम्पा कुल अनुसूचित जाति की जनसंख्या 2011 में कितनी थी?

3,97,908

जांजगीर- चाम्पा कुल अनुसूचित जाति की जनसंख्या में पुरुष की जनसंख्या कितनी थी?

1,99,633

जांजगीर- चाम्पा में कुल अनुसूचित जाति की जनसंख्या में महिला की जनसंख्या कितनी थी?

1,98,275

जांजगीर- चाम्पा में ग्रामीण जनसंख्या 2011 में कितनी थी?

12,94,646

जांजगीर- चाम्पा में ग्रामीण जनसंख्या में पुरुष जनसंख्या कितनी थी?

7,01,401

जांजगीर- चाम्पा में ग्रामीण जनसंख्या में महिला की जनसंख्या कितनी थी?

6,93,245

जांजगीर- चाम्पा कुल शहरी जनसंख्या कितनी थी 2011 में

2,25,061

जांजगीर- चाम्पा कुल शहरी जनसंख्या में पुरुष की जनसंख्या कितनी थी?

1,14,316

जांजगीर- चाम्पा में कुल शहरी जनसंख्या में महिला की जनसंख्या कितनी थी?

110745

चाम्पा सामान्य ज्ञान

  • जांजगीर नगर बिलासपुर-चांपा रेलमार्ग पर 4\5 किलोमीटर दूर पर स्थित है। जाजल्लदेव द्वितीय के रतनपुर शिलालेख से पता चलता है कि उसने अपने नाम पर एक नगर बसाया था जहां मंदिर एवं तलाब भी बनवाए थे। उसका नाम था जाजल्लदेवपुर वर्तमान में जांजगीर को ही उस स्थान के नाम से जाना गया है।
  • यहाँ मंदिर एवं मूर्तियां क्लचुरीकालीन उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन करती है। यह पूर्वाभीमुख है तथा सप्तरथ योजना का है। मंदिर में वरहा, नृसिंह, वामन, बुद्ध और त्रिविक्रम विष्णु अवतारों तथा बायां हिस्सा शिव का एवं दाहिनी सा विष्णु का बताने वाली हरिहर प्रतिमा और अपने घोड़ों एवं रथ के साथ सूर्य प्रतिमा का अंकन है। राम एवं कृष्ण से संबंधित फलक भी इस विष्णु मंदिर में लगे हैं। कृष्णलीला से संबंधित अंकन भी है। इस तरह मंदिर एवं यहां की सभी प्रतिमाओं में कल्चुरी कला आपने उत्कर्ष में दिखाई देती है।
  • यह विष्णु मंदिर पूर्ण नहीं है अधूरा है अर्थात इसका शिखर पूरा नहीं बन सका है तथा गर्भगृह में मूर्ति का अभाव है फिर भी यह छत्तीसगढ़ के कल्चुरीकालीन शिल्प सौंदर्य का उत्कृष्ट उदाहरण है इसके अलावा यहां शिव मंदिर, बरमबाबा चौरा भी प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से है।
पर्यटन स्थल पर्यटन स्थल की श्रेणी मुख्य दर्शनीय स्थल
जांजगीर ऐतिहासिक ,पुरातात्विक विष्णु मंदिर, शिव मंदिर, बरमबाबा चौरा
खरौद ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक लक्ष्मणेश्वर मंदिर, शबरी मंदिर
शिवरीनारायण धार्मिक, सांस्कृतिक शिव नारायण मंदिर, दूधाधारी मठ
पिथमपुर ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक कमलेशवर महादेव मंदिर
चांपा ऐतिहासिक, धार्मिक समलेश्वरी देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, राजमहल
सक्ती ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक दमाउ दहरा,पंचवटी, रावनखोल
चंद्रपूर इतिहास धार्मिक, चंद्रहासिनी देवी मंदिर
  • जांजगीर-चांपा जिले का निर्माण 25 मई, 1998 को बिलासपुर जिले से पृथक कर किया गया।
  • रावण की गुफा स्थित है- रेनखोल में
  • मध्य भारत की पेपर मिल स्थित है- चांपा में
  • जांजगीर-चांपा के कोसा शहर को सिल्क सिटी कहा जाता है।
  • अंडभार (अष्टद्वार) शहर के 8 दरवाजे हैं। यहां पर अष्टभुजी माता का प्रसिद्ध मंदिर है।

मिट्टी

लाल एवं पीली मिट्टी

फसलें

गेहूं, चावल, तिलहन।

नदियाँ

हसदो, महानदी, शिवनाथ, मांड

खनिज

चूना पत्थर,  डोलोमाइट

मेला/महोत्सव

कबीरपंथीयों का मेला।

प्रमुख उद्योग

रेशम उद्योग (चाम्पा), सीमेंट कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड अकलतारा (जांजगीर)

जनजातियां

अगरिया, बैगा, भारिया, बिनज्वार, धनवार, कावर, खैरवार, कोरवा, माझवार पारधी, बहेलिया

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या

200

परियोजनाएं

हसदेव बांगो परियोजना

वन (2015)

778 वर्ग किमी

सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला

जांजगीर चांपा (420 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)

छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया?

चाम्पा

  • चाम्पा जंक्शन से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर औद्योगिक नगरी कोरबा स्थित है। बिलासपुर से इसकी दूरी 112 किलोमीटर है।  जयनगर कोयला क्षेत्र में स्थित है एवं देश-विदेश में विद्युत उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है। यह छत्तीसगढ़ की उर्जा नगरी है।
  • मिट्टी –  लेटराइट मिट्टी
  • फसलें –  गेहूं चावल मक्का तिलहन
  • नदिया –  हंसदो, दिलागर, बोराई।
  • खनिज –  बॉक्साइट, कोयला।
  • प्रमुख उद्योग –  कोरबा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (1978), भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड कोरबा (1965)।

पर्यटन स्थल

पर्यटन स्थल पर्यटन स्थल की श्रेणी मुख्य दर्शनीय स्थल
कोरबा उद्योगी सुपर थर्मल पावर, बालको
पाली ऐतिहासिक,  धार्मिक प्राचीन शिव मंदिर
लाफ़ागढ़ ऐतिहासिक, धार्मिक प्राचीन किला, गुफा महामाया मंदिर
केंदई जलप्रपात प्राकृतिक जलप्रपात
तुम्हान पुरातात्विक प्राचीन शिव मंदिर
बांगो जलाशय, प्रकृतिक बांध  दृश्य
  • जनजातियां –  अगरिया, बैगा, भैना, भूमिया, भारिया,धनवार, कावर, खेरवार, कोरबा, माझवर, पारधि, बहेलियां।
  • तापीय बिजलीघर –  कोरबा ताप विद्युत गृह, बाल्कों  ताप विद्युत केंद्र।
  • जलप्रपात –  केंदई जलप्रपात
  • अभयारण्य –  लेहरु आती अभयारण्य
  • वन – ( 2015) –  3344 वर्ग किलोमीटर
  • परियोजना –  बांगो परियोजना ( हसदेव नदी पर)
  • सर्वजनिक क्षेत्र का देश में प्रथम एल्यूमीनियम संयंत्र 27 नवंबर, 1965 को कोरबा जिले में  स्थापित किया गया।

तापीय पावर स्टेशन

नाम स्थान मेगा वाट
सुपर थर्मल पावर स्टेशन एनटीपीसी लिमिटेड जमनीपाली, कोरबा 2100  मेगावाट
बाल्को कैपटिव पावर प्लांट प्रगति नगर कोरबा 270 मेगा वाट
कोरबा थर्मल पावर स्टेशन कोरबा 440 मेगा वाट
हसदेव थर्मल पावर स्टेशन कोरबा 840 मेगा वाट
  • देश की सबसे बड़ी यंत्री कृत भूमिगत कोयला खान  मुक्ट घाट ( कोरबा) में है।
  • छत्तीसगढ़ में विस्फोटक पदार्थों का कारखाना कोरबा में स्थित है।
  • छत्तीसगढ़ के लाफ़ागढ़ को छत्तीसगढ़ का चित्तौड़गढ़ कहते हैं।
  • छत्तीसगढ़ में कोरबा का ऊर्जा राजधानी कहा जाता है।
  • गेवरा माइन्स कोरबा में स्थित है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और बाल्कों  लाइट के सहयोग कोरबा में एलुमिनियम पार्क स्थापित किया गया।

प्रसिद्ध स्थल


चंपा (ऐतिहासिक-धार्मिक गढ मदनपुर)

चाम्पा हावड़ा, मुंबई रेल मार्ग पर बिलासपुर से रेलमार्ग द्वारा 53 किलोमीटर सड़क मार्ग द्वारा 78 किलोमीटर दूरी पर समुद्र तल से 500 मीटर की ऊंचाई पर हसदो नदी के तट पर बसा यह नगर अपने कास, ( टशर)  तथा कंचर ( सोना) से निर्मित वस्तुओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ में रतनपुर के अंतर्गत आने वाले 18 गढ़ो में मदनपुर (चाम्पा) भी एक महत्वपूर्ण गढ था। यहां समलेश्वरी देवी का मंदिर श्री जगन्नाथ मंदिर, श्री मुरली मनोहर का शिव मंदिर, श्री कृष्ण गौशाला मंदिर, राजमहल एवं रामबांध तालाब, मदनपुर गढ़, मड़वा रानी मंदिर आदि प्रमुख है।

अंडभार (अष्टद्वार पुरातात्विक, धार्मिक :  कलचुरी शिल्प का श्रेष्ठतम उदाहरण)

मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर सक्ति स्टेशन से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अड़भार का प्राचीन इतिहास में उल्लेख अष्टद्वार के नाम से मिलता है। अंडमान में स्थित अष्टभुजी माता का प्राचीन मंदिर दर्शनीय है। कल्चुरीकालीन यह मंदिर छत्तीसगढ़ की तत्कालीन शिल्पकला का श्रेष्ठ नमूना है।

ऋषभ तीर्थ (दमउदहरा-ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक)

बिलासपुर से लगभग 113 किलोमीटर मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर सक्ति से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर दमाऊदहरा स्थित है। जोकि ऋषभ तीर्थ या गूंजी नाम से भी जाना जाता है। दमाऊदहरा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ों के बीच स्थित जल का एक गहरा कुंड है। इसके पास पहाड़ से लगातार पानी गिरता रहता है। इसमें पहाड़ में एक प्राचीन प्रस्तर शिलालेख प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर यही प्राचीन ऋषभ तीर्थ है। ऋषभ तीर्थ का वर्णन महाभारत में वन पूर्व के अवसर पर तथा श्री भागवत के पांचवें स्कंध के तीसरे अध्याय में तीसरे अध्याय में मिलता है। इन उल्लेखों से ऋषभ तीर्थ की प्रमाणिकता सिद्ध होती है।  यहां भगवान श्री ऋषभदेव की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। किवदंती है कि प्राचीनकाल में यहां भगवान ऋषभदेव निवास करते थे। इसके समेत तीन किमी पर पंचवटी (काल वराहकल्प राम आश्रम), 8 किलोमीटर पर गीद्ध पर्वत ( जटायु आश्रम) तथा रेनखोल (रावण खोल अर्थात रावण की गुफा) है।  जनश्रुतिओं के अनुसार, रेनखोल भगवान श्री रामचंद्र के वनवासकाल की स्मृतियों के लिए अपने आप में एक महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसी मान्यता है कि रावण ने सीता का अपहरण इसी स्थान से किया था।

खरौद (प्राचीन इंद्रपुर)

खरौद चित्रोत्पाला गंगा (महानदी) के किनारे बिलासपुर से 63 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पूर्व में प्रसिद्ध तीर्थ शिवरीनारायण से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक नगर है। शैव परंपरा यहां स्थित लक्ष्मेश्वर (लखेश्वर) शिवलिंग से स्पष्ट परिलक्षित होती है। शिव मठ भी इसका घोतक है, शायद यही कारण है कि शिवरीनारायण और खरौद को क्रमश विष्णुकांक्षी और शिवाकाक्षी कहा जाता है। और इनकी तुलना उड़ीसा के जगन्नाथ के भगवान जगन्नाथ और भुवनेश्वर के लिंगराज से की जाती है। प्राचीनकाल से जगन्नाथपुरी जाने का रास्ता खरौद और शिवनारायण से होकर जाता था।  यहां लक्ष्मेश्वर, शबरी मंदिर, इंदल देव मंदिर आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल है। इसे छत्तीसगढ़ का काशी भी कहा जाता है।

शिवरीनारायण (जहां नारायण आज भी आते हैं-  ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक)

बिलासपुर से दक्षिण-पूर्व दिशा में लगभग 64 किलोमीटर दूर प्राचीन धार्मिक स्थल शिवरीनारायण स्थित है। यहां छत्तीसगढ़ की 3 प्रसिद्ध नदियां –  महानदी (चित्रोत्पला गंगा), शिवनाथ नदी एवं जोंक का संगम प्रयाग के त्रिवेणी संगम के सदृश्य है। इस स्थल का नाम शिवरीनारायण क्यों पड़ा? इस पर कुछ की कीवदंतीयां हैं जिनके अनुसार यह स्थान रामायणकालीन रामभक्त शबरी की तपोभूमि था यहाँ शबरी ने राम को जुठे बेर खिलाए थे। अंतर शबरी के नाम पर यह शिवरीनारायण हो गया। यहां एक सबरी ईंटों का प्राचीन मंदिर भी है, जो तर्क के पक्ष में आता है। 9वीं शताब्दी की मूर्तियों को समेटे हुए 12वीं शताब्दी मे निर्मित शिवरीनारायण का मंदिर अंचल का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहां बड़ा मंदिर एवं नर नारायण मंदिर के नाम जाना जाता है। इसके अलावा केशवनारायण मंदिर चंद्रचूड़ महादेव का मंदिर ( निर्माणकर्ता कुमारपाल नामक एक कवि), राम-लक्ष्मण जानकी मंदिर, दूधाधारी मठ, केवट मंदिर, सिंदूरगिरी, संगम घाट आदि प्रमुख दर्शनीय स्थलों में है। प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा के पावन पर्व के अवसर पर शिवरीनारायण में विशाल मेला लगता है।

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