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किशोरावस्था से जुड़े प्रश्न उत्तर

मानव शरीर में मिलने वाले अंत स्रावी ग्रंथियों में से निकलने वाले हार्मोन व उनके कार्य लिखे?

अत: स्रावी ग्रंथियां हार्मोन कार्य
थायराइड (अवटु ग्रंथि) थायरोक्सिन उपापचय तथा वृद्धि की दर नियमित करता है।  किस हार्मोन की कमी होने से वजन बढ़ता है और सुस्ती आती है।  यदि इस हार्मोन की मात्रा अधिक हो जाए तो जीव का वजन घटता है। शर्करा ,वसा तथा प्रोटीन के उपापचय का नियंत्रण करता है।
अग्नाशय इंसुलिन, ग्लूकागान शक्कर उपापचय को नियमित करता है। इसकी कमी से रुधिर में शक्कर का सत्र बढ़ जाता है।  और कमजोरी आती है ऐसी स्थिति को मधुमेह है कहते हैं। (रुधीर में ग्लुकोज़ का नियंत्रण करता है)
अधिवृकक कार्टिसोन (एड्रीनलीन, कारटिक्वाइड) इस ग्रंथि का बाहरी भाग कारटैक्स रस उत्पन्न करता है।  यह प्रोटीन को शक्कर में बदलने में सहायता करता है। पीयूष ग्रंथि कार्टेक्सको उत्तेजित करती है।
पीयूष  ग्रंथिया मास्टर ग्रंथि
  • वृद्धि हार्मोन
  • पोषी हार्मोन
  • प्रोलेक्टिन
  • वेसोप्रेसिन
  • ऑक्सीटॉसिन
  • हड्डी तथा ऊतकों की वृद्धि को नियमित करता है। एंटीडाइयूरेटिक वृक्क द्वारा पुन: अवशोषित पानी की मात्रा को नियमित करता है।
  • स्तन ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रण करता है।
  • जल तथा विद्युत अपघटन का संतुलन करता है।
  • दुग्ध काल के दौरान दुग्ध का नियंत्रण करता है।
अंडाशय एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन स्त्रियों में लैंगिक अंगों, जैसे स्तन ग्रंथियों, केश विन्यास तथा आवाज का नियंत्रण करता है।
वृषण टेस्टोस्टेरोन पुरुष के बहुत से गुण; जैसे मूंछ दाढ़ी तथा आवाज का नियंत्रण करता है।
परावटु कैल्सीटोनिन कैल्शियम और फास्फोरस का संतुलन करता है।
हाइपोथैलेमस मोचक हार्मोन अंग पीयूष ग्रंथि से स्रावित हार्मोन का नियंत्रण करता है।

किशोर के यौवनारंभ होने वाले परिवर्तनों का संक्षिप्त ब्यौरा दें?

  • लंबाई में वृद्धि- यौवनारंभ  के दौरान सबसे अधिक दिखाई देने वाला परिवर्तन किशोर की लंबाई का एकाएक बढ़ना है। ‘ प्रारंभ में लड़कियों की लंबाई लड़कों की अपेक्षा अधिक तीव्रता से बढ़ती है।  18 वर्ष की आयु तक दोनों अपनी अधिकतम लंबाई प्राप्त कर लेते हैं।
  • स्वर में परिवर्तन- यौवनारंभ मैं लड़कों का स्वर यंत्र विकसित होकर बड़ा हो जाता है और एडम्स एप्पल स्पष्ट दिखाई देने लगता है।  लड़कों की आवाज भारी व भ्राराने वाली लगती है जबकि लड़कियों का स्वर यंत्र पतला गया छोटा होने से आवाज पतली व सुरीली होती है।
  • स्वेद व तैलग्रंथियों की क्रियाशीलता में वृद्धि- इस दौरान पसीने वह तेल ग्रंथियों का खतरा बढ़ जाने से चेहरे पर फुंसियां वह मुहांसों के रूप में प्रभाव  दिखाई देने लगता है। कोमल त्वचा पर संक्रमण के कारण भी फुंसियों के मुहांसों की संख्या बढ़ जाती है।
  • जनन अंगों का विकास-यौवनारंभ में नर जनन अंग वृषण में सूजन और मादा में अंडा से परिपक्व अवस्था में आ जाते हैं।  शुक्राणु में अंडा से अंडाणु का निर्मोचन करने लगता है। वृषण में अंडाशय जनन प्रक्रिया के लिए बिल्कुल तैयार अवस्था में होते हैं।
  • किशोरों द्वारा परिपक्व अवस्था को प्राप्त करना-यौवनारंभ  मैं किशोर बौद्धिक मानसिक व संवेदनात्मक परिपक्वता को प्राप्त कर लेते हैं।  इस दौरान मस्तिष्क की सीखने की क्षमता सर्वाधिक होती है। कई बार जबकि सौरभ ने आपको परिवर्तनों के अनुसार ढालने में असमर्थ हो जाता है तो तनावग्रस्त भी हो जाता है। उस में असुरक्षा की भावना बलवती होने लगती है। जबकि असुरक्षा का कोई कारण नहीं होता है।
  • अतः यौवनारंभ अनेक परिवर्तनों का परिणाम होता है।

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