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मानव नेत्र एवं रंग बिरंगा संसार Class 10th के सवाल और जवाब

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प्रकृति में घटने वाली 4 प्राकृतिक प्रकाशीय परिघटनाओं की सूची बनाएं?

इंद्रधनुष का निर्माण, आकाश का नीला रंग, सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना, तारों का टिमटिमाना।

शरीर के विभिन्न संवेदी अंग कौन से है?

शरीर के अंग जो संवेदना/ उद्दीपन को ग्रहण करते हैं, संवेदी अंग कहलाते हैं।

संवेदी अंगों के उदाहरण- नेत्र/आंखें, कान, जिह्रा,त्वचा, नासिका एपिथीलियम ।

मानव नेत्र में कैमरे की समानताएं और अंतर लिखें?

समानताएं

  • दोनों प्रकाशिक यंत्र हैं।
  • दोनों में उभयोत्तल लेंस  होता है जो प्रतिबिंब बनाता है।
  • दोनों में बने प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टे होते हैं।
  • दोनों की आंतरिक परते/ सतह  काली होती है।

अंतर

मानव नेत्र कैमरा
यह सजीव है।  यह निर्जीव है।
नेत्र में उभय उत्तल लेंस जेली की तरह के पदार्थ से मिलकर बना होता है। उत्तल लेंस कांच का बना होता है।
लेंस के अतिरिक्त इसमें कार्निया नेत्रोद, कचाभ द्रव्य अपवर्तक  दल के रूप में कार्य करता है। , लेंस का संयोजन और तक कल के रूप में कार्य करता है।
प्रतिबिंब प्रकाश समिति प्रत्यय रेटिना पर बनता है। लेंस का संयोजन अपवर्तक तल के रूप में कार्य करता है।
प्रतिबिंब प्रकाश संवेदी प्रति रेटीना पर बनता है। प्रतिबिंब फोटोग्राफिक फिल्म पर बनता है।
प्रतिबिंब अस्थाई होता है तथा 1/16 s  तक ही रहता है। इसमें बना प्रतिबिंब स्थाई होता है।

जब हम बाहर तेज रोशनी में से अंधेरे कमरे में प्रवेश करते हैं तो हमें कुछ समय  वस्तुएं नहीं दिखाई देती क्यों?

जब हम एक प्रकाशमान स्थान पर होते हैं, तो  परितारिका के फैलने के कारण हमारी आंख की पुतली छोटी होती है. यह कम प्रकाश को आंख के अंदर प्रवेश करने देती है. जब हम अंधेरे कमरे में जाते हैं तो वस्तुओं को देखने के लिए प्रकाश आंख में प्रवेश करता है, जो वस्तुओं को देखने के लिए अपर्याप्त है.  जब परितारिका सिकुड़ती है, तो पुतली का आकार बढ़ जाता है तथा अधिक प्रकाश आँख के अंदर प्रवेश कर सकता है। केवल तभी हम कुछ समय पश्चात अंधेरे कमरे में वस्तुओं को देख पाने में सफल हो पाते हैं।

मानव नेत्र में फोकस दूरी का संमजन किस प्रकार हो पाता है?,

मानव नेत्र में नेत्र लेंस में समंजन की क्षमता होती है। मानव नेत्र की पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की मोटाई को परिवर्तित कर देती है, जिससे लेंस की फोकस दूरी परिवर्तित हो जाती है।  जब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती है तो नेत्र लेंस पतला हो जाता है और इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। जब पक्ष्माभी पेशियाँ  फैलती है, तो लेंस की मोटाई बढ़ जाती है तथा उसकी फोकस दूरी कम हो जाती है। इसलिए हमारी आंखों में समजन की क्षमता होती है और नेत्र लेंस की फोकस दूरी को परिवर्तित किया जा सकता है।

द्विनेत्र दृष्टि के चार लाभ बताइए?

  1. इससे दृश्य क्षेत्र बढ़ जाता है।
  2. इससे धुंधली वस्तुओं के संवेदन की क्षमता बढ़ती है।
  3. इससे हमें अतिरिक्त सूचना प्राप्त होती है और हमें 2-D प्रतिबिंब के स्थान पर 3-D प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
  4. इससे हमें यह जानने में भी सहायता मिलती है कि उसमें कितने पास है या कितनी दूर।

मोतियाबिंद का क्या अर्थ है? इसे कैसे दूर किया जा सकता है?

मोतियाबिंद- कभी कभी उम्र बढ़ने के साथ-साथ नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस धुंधला तथा दूधिया हो जाता है।  इस अवस्था को मोतियाबिंद कहते हैं। मोतियाबिंद के कारण दृष्टि की आशिकी अपूर्ण हानि हो सकती है।

चिकित्सा- मोतियाबिंद को मोतियाबिंद में शल्य चिकित्सा के द्वारा दूर किया जा सकता है।

  • लेंस को बदल कर।
  • संपर्क लेंसों का प्रयोग करके।

परितारिका तथा पुतली का क्या कार्य है?

प्रीतिका नेत्र में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।  यह पुतली के आकार को भी नियंत्रित करती है। जब प्रकाश की तीव्रता कम होती है तो पुतली फैल जाती है और तब सिकुड़ जाती है।  जब प्रकाश की तीव्रता अधिक होती है ताकि नेत्र में कम प्रकाश प्रवेश पास के।

नेत्र में पक्ष्माभी  पेशियों का क्या कार्य है?

पक्ष्माभी पेशियाँ नेत्र लेंस की फोकस दूरी को नियंत्रित करती है। जब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकूडती तो नेत्र लेंस पतला हो जाता है। जब पक्ष्माभी पेशियाँ फैलती है, तो लेंस मोटा हो जाता है इसकी फोकस दूरी कम हो जाती है।  अंत पक्ष्माभी बेश्या नेत्र की समंजन क्षमता के साथ संबंधित है।

देखने की क्षमता को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

  • यदि नेत्र का कोई भी भव्य दोष युक्त हो, तो इससे दृष्टि प्रभावित होती है।
  • कॉनिया तथा लेंस का दोष युक्त होना।
  • दोषयुक्त रेटिना।
  • क्षति ग्रस्त या दोषयुक्त दृक तंत्रिका।
  • नेत्रोंद तथा काचाभ के दाब का कम होना।

मानव नेत्र के दूर बिंदु तथा निकट बिंदु से आप क्या समझते हैं?

  • मानव नेत्र का निकट बिंदु- वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी किसी वस्तु को बिना किसी तनाव के स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।  मानव नेत्र का निकट बिंदु या स्पष्टतम दृश्यता की न्यूनतम दूरी कहलाता है। इस D के रूप में लिखते हैं तथा यह सामान्य नेत्र के लिए 25 सेंटीमीटर है।
  • मानव नेत्र का दूर बिंदु- अधिकतम दूरी पर रखी किसी वस्तु को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.मानव नेत्र का दूर बिंदु कहलाता है।  सामान्य नेत्र के लिए यह दूरी अनंत है।

नेत्र  समंजन की परिभाषा लिखें। सुस्पष्ट  दर्शन की अल्पतंम दूरी किसे कहते हैं? दूर बिंदु को भी परिभाषित करें।

  • नेत्र समंजन- मानव नेत्र के अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता  जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, नेत्र समंजन कहलाता है।
  • सुस्पष्ट दर्शन की  अलप्तम दूरी- वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी कोई वस्तु बिना किसी तनाव के अत्यधिक सफर तय देखी जा सके, सुस्पष्ट  दर्शन की अल्पतम दूरी कहलाती है। इसी नेत्र का निकट बिंदु भी कहते हैं। एक व्यस्क के लिए यह दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर होती है।
  • दूर बिंदु- वह दूर तम बिंदु जिस तक कोई नेता वस्तुओं को स्पष्ट है देख सकता है,  नेत्र का दूर बिंदु कहलाता है। सामान्य नेत्र के लिए अनंत दूरी पर होता है।

दृष्टि के लिए हमारे दो नेत्र क्यों होते हैं?

  • दो नेत्रों का दृष्टि क्षेत्र विस्तृत हो जाता है। एक नेत्र का दृष्टि क्षेत्र लगभग 150० होता है जबकि दो नेत्रों का यह क्षेत्र 180 तक हो जाता है।
  • किसी मंद प्रकाशित  वस्तु की सामर्थ्य भी एक नेत्र की अपेक्षा दो नेत्रों की अधिक होती है।
  • एक नेत्र से वस्तुओं में केवल द्विविम  दिखाई देती है जबकि दो नेताओं से त्रिविम चाक्षुकी का लाभ मिलता है।

हमारी आंखें दो होती है, जबकि वस्तु का प्रतिबिंब एक ही क्यों दिखाई देता है?

एक नेत्र वस्तु का थोड़ा भिन्न प्रतिबिंब देखता है। इस प्रकार दोनों नेत्रों द्वारा दो अलग-अलग प्रतिबिंब दिखाई देते हैं, परंतु हमारा मस्तिष्क का दोनों प्रतिबिंब  का संयोजन कर एक प्रतिबिंब बना देता है। इसलिए दोनों नेत्रों से वस्तु का एक ही प्रतिबिंब मस्तिष्क के द्वारा दिखाया जाता है।

मानव दृष्टि दोषो की सूची बनाएं।

निकट दृष्टि दोष, दीर्घ की दृष्टि दोष, मोतियाबिंद, जरा दूरदृष्टता ।

जरा-दूरदृष्टिता क्या है?

निकट बिंदु के बढ़ने को जरा- दूरदृष्टिता कहते हैं।

जरा- दूर दृष्टिता के कारण

  • यह पक्ष्माभी पेशियों के कमजोर हो जाने से होता है।
  • यह नेत्र लेंस का लचीलापन समाप्त होने से भी होता है।
  • मानव नेत्र के समजन  की क्षमता समानता है आयु बढ़ने के साथ कम हो जाती है। निकट बिंदु धीरे-धीरे दूर खिसक जाता है। व निकट की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाने में कठिनाई का अनुभव करते।

द्विफोकसीय लेंस क्या होते हैं? उनका प्रयोग क्यों किया जाता है?

  • द्विफोकसीय लेंस वाले होते हैं जो अवतल तथा उत्तल दोनों लेंसों से मिलकर बने होते।
  • ऊपर वाला भाग अवतल लेंस बनाता है। यह दूर की वस्तुओं को देखने में सहायता करता है।
  • नीच का भाग उत्तल लेंस से बना होता है। यह निकट की वस्तुओं को देखने में सहायता करता।

उपयोगिता- कभी कभी कोई व्यक्ति दोनों दोषों निकट- दृष्टि दोष तथा दूर दृष्टि दोष से पीड़ित होता है। ऐसे व्यक्तियों को द्विफोक्सीय लेंसों की आवश्यकता पड़ती।

निकट- दृष्टि दोष (मायोपिया) क्या है, इसका कारण क्या है? इसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है?

यह नेत्र दोष है जिसमें व्यक्ति निकट की वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से देख सकता है लेकिन दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता।

निकट- दृष्टि दोष के कारण-

  • नेत्र गोलक का बड़ा हो जाना।
  • कार्निया का अत्यधिक विक्रता होना,

निकट- दृष्टि दोष को दूर करना- निकट दृष्टि दोष को उपयुक्त अक्षमता के अवतल लेंस द्वारा दूर किया जा सकता है।

दूर -दृष्टि दोष क्या है? इसका क्या कारण है?  उसे किस प्रकार ठीक किया जा सकता है?

दूर- दृष्टि दोष- वह नेत्र दोष जिससे पीड़ित व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता है, ले निक सपोर्ट नहीं देख सकता, दूर दृष्टि दोष कहलाता है।

दूर -दृष्टि दोष के कारण-

  • नेत्र गोलक का छोटा होना।
  • नेत्र लेंस का पतला होना।

दूर- दृष्टि दोष को दूर करना-

उपयुक्त क्षमता का उत्तल लेंस प्रयोग करके।

क्या हमें नेत्र दान करना चाहिए? क्यों? (अथवा) नेत्रदान की क्या आवश्यकता है? लाभ बताएं?

हां हमें अपनी मृत्यु के पश्चात अपनी आंखें दान कर देनी चाहिए, क्योंकि

  1. विकासशील देशों में 35 मिलियन लोग अंधेपन का शिकार हैं तथा उनमें से अधिकतर का इलाज संभव है।
  2. दान की गई आंखों से कॉर्निया प्रत्यारोपण द्वारा लगभग 4.5  मिलियन लोगों की आंखों को ठीक किया जा सकता है।
  3. इन 4.5 मिलियन लोगों में से 60%  12 वर्ष से कम आयु के बच्चे हैं।

अंतः यदि हमें दृष्टि का उपहार मिला हुआ है तो हमें इसी उन लोगों को भी देना चाहिए जिनके पास यह दृष्टि नहीं है।

हमें नेत्र दान करते समय किन- किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  1. नेत्र दाता किसी भी आयु वर्ग या लिंग से संबंधित हो सकते हैं।
  2. व्यक्ति जिन्हें चश्मा लगा हुआ हो या जिनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है, वह भी नेत्रदान कर सकते हैं।
  3. आँखें मृत्यु के 4- 6 घंटे तक निकाल ली जानी चाहिए।
  4. मृत्यु के ठीक बाद मे नेत्र बैंक को सूचित कर दिया जाना चाहिए।
  5. आंखें निकालने में केवल 10-15 मिनट का समय लगता है।
  6. व्यक्ति जो AIDS, हेपेटाइटिस-B तथा C, रेबीज, ल्यूकीमिया, टिटनेस, में निन, हाथीपांव आदि से पीड़ित होते हैं, नेत्रदान नहीं कर सकते।

प्रिज्म कोण, विचलन कोण तथा निर्गत कोण को परिभाषित करें।

  • प्रिज्म कोण- प्रिज्म की दो परसों भुजाओं के बीच का कोण, प्रिज्म कोण कहलाता है।
  • विचलन कोण- आपतित किरण तथा निर्गत किरण की दिशाओं के बीच का कोण, विचलन कोण कहलाता है।
  • निर्गत कोण- निर्गत किरण तथा अभिलंब के बीच का कोण निर्गत कौन कहलाता है।

किसी कांच के प्रिज्म तथा कांच की स्लैब में हुए अपवर्तन में क्या अंतर है?

  1. कांच की स्लैब में हुए अपवर्तन में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर होते हैं। इसलिए प्रकाश किरण का केवल पार्श्व विस्थापन ही होता है।
  2. प्रिज्म में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर नहीं होती, क्योंकि प्रिज्म के दो पृष्ठ ( जिनमें से अपवर्तन होता है) एक दूसरे के समानांतर नहीं होते।

इंद्रधनुष किस प्रकार बनता है?

यह प्रकृति के स्पेक्ट्रम होता है जो वर्षा के बाद आकाश में निकलता है।

यह वायुमंडल में उपस्थित है छोटी पानी की बूंदों के द्वारा सूर्य प्रकाश के विक्षेपण के कारण से बनता है। पानी की बूंदे छोटे प्रिज्म के रूप में कार्य करती है। वे सूर्य की स्थिति किरणों को प्रवर्तित तथा विक्षेपीत कर देती है तथा इसके पश्चात उनका आंतरिक परिवर्तन होता है। अंत में जब यह वर्षा की बूंद से बाहर आती है तो वे इसे दोबारा अप्रवृत्ति कर देती है। प्रकाश विक्षेपण के कारण तथा आंतरिक परावर्तन के कारण, प्रकाश के विभिन्न रंग हम तक पहुंचते हैं।

जब गर्म वायु में से देखा जाता है, तो किसी वस्तु की आभासी स्थिति बदलती/ परिवर्तित होती रहती है,  क्यों?

अग्नि के ठीक ऊपर की वायु ऊपरी परत की अपेक्षा अधिक गर्म हो जाती है। गरम वायु ठंडी वायु की अपेक्षा हल्की (कम संघन) होती है। इसका अपवर्तनांक ठंडी वायु की अपेक्षा कुछ नहीं न्यून होता है। जैसा कि माध्यम की भौतिक अवस्थाएं स्थिर नहीं है, इसलिए वस्तु की आभासी स्थिति गर्म वायू में से देखने पर बदलती रहती है।

अग्नि सूर्योदय तथा विलंबित प्रयास का क्या कारण है? अथवा सूर्योदय के समय सूर्य की चकरीका पट्टी क्यों प्रतीत होती है?

  1. सूर्य अपने वास्तविक उदय के समय से लगभग 2 मिनट पहले हमें दिखाई देने लगता है।  यह वास्तविक सूर्यास्त के पश्चात भी हमें 2 मिनट तक दिखाई देता रहता है। ऐसा वायुमंडलीय अपवर्तन  के कारण होता है। वास्तविक सूर्योदय का अर्थ है सूर्य का वास्तव में क्षेतिज रेखा से ऊपर आना। लगभग 2 मिनट तक हम सूर्य का केवल प्रतिबिंब ही देखते हैं, न कि वास्तव में सूर्य।
  2. सूर्य की डिस्क  का समतल दिखाई पड़ना भी वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण से होता है। सूर्य  की डिस्क जो हम सूर्योदय या सूर्यास्त के समय देखते हैं, वह वास्तव में सूर्य का प्रतिबिंब होता है न की वास्तव में  सूर्य।

प्रकाश प्रकीर्णन से संबंधित चार प्रकाश प्रघटनाओं के उदाहरण दें।

  1. आकाश का नीला रंग।
  2. गहरे समुद्र का नीला/ हरा रंग।
  3. सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई पड़ना।
  4. टिंडल प्रभाव।

कौन- सी परघटना आकाश के नीले रंग का वर्णन करती है।

  • प्रकाश प्रकीर्णन की प्रघटना आकाश के नीले रंग का वर्णन करती है।
  • पृथ्वी का वायुमंडल सूक्ष्म कणों का विषमांगी मिश्रण है। यह कण धूल मिट्टी, धुआ, जल की सूक्ष्म बूंदे,वायु में विद्यमान है गैसों के अणु आदि होते हैं।
  • वायु में उपस्थित गैसों के अणु तथा दूसरे सूक्ष्म कणों का आकार दृश्य प्रकाश के तरंगदैर्ध्य से भी कम होता है।  यह प्रकाश के प्रकीर्णन, विशेष कर न्यून तरंगदैर्ध्य नीले प्रकाश के प्रकीर्णन में अति सहायक ( अधिक तरंगदैर्ध्य जैसे लाल रंग की अपेक्षा)।
  • जब प्रकाश की किरणें इन सूक्ष्म कणों से टकराती है, तो प्रकाश पुंज का पथ प्रकाशमान हो जाता है। इन कणों से प्रकाश परावर्तित होकर हम तक पहुंचता है।
  • ऊपरी वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्म कण मुख्यतः नीले प्रकाश का प्रकीर्णन करता है। इसलिए आकाश हमें नीला दिखाई देता है।

अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाले यात्रियों को आकाश काला या गहरे रंग का दिखाई पड़ता है,  क्यों?

अधिक ऊंचाई पर वायु बहुत विरल है। इसमें इतनी ऊंचाई पर यहां तक की धुल व जल के कण भी नहीं होते हैं, इसमें केवल कुछ गैसे ही होती है। इसलिए जब ऊपरी वायुमंडल से प्रकाश गुजरता है ( अधिक ऊंचाई पर) तब प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता है। इसके कारण आकाश नीले की अपेक्षा गहरे रंग का दिखाई देता है। उन यात्रियों को जो बहुत ऊंचाई पर उड़ते हैं।

सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देने की प्रघटना का कारण दे, ।

  1. प्रकाश अपवर्तन के कारण से।
  2. प्रकाश प्रकीर्णन/टिंडल प्रभाव के कारण से।

क्षितिज पर वायुमंडल में कणों का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है जो लंबी  तरंगदैर्ध्य युक्त (लाल) प्रकाश के प्रकरण के लिए पर्याप्त है तथा इसलिए प्रिय हमें लाल दिखाई देता है।  लाल रंग की सूर्य की डिसक जो हमें दिखाई पड़ती है, वह वास्तव में सूर्य नहीं, सूर्य का प्रतिबिंब होता है। जो पर्यावरणीय अपवर्तन के कारण से बनता है। इसी कारण से हम सूर्य को सूर्योदय से 2 मिनट पहले देख पाते हैं।

सूर्य दोपहर के समय हमें श्वेत क्यों दिखाई देता है?

पृथ्वी की सतह धरातल के पास वायु में विद्यमान कणों का आकार बहुत बड़ा होता है। कणों का आकार बड़ा होने के कारण, प्रकाश का प्रकरण होता है,प्र्कीर्णित प्रकाश हमे श्वेत दिखाई देता है।

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