History

मगध साम्राज्य के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

महाजनपदों के काल में मगध ने अपनी शक्ति का विस्तार किया तथा धीरे-धीरे संपूर्ण उत्तर भारत को अपने आधिपत्य में ले लिया. मगध पर शासन करने वाला पहला था  शासकीय वंश हर्यंक वंश था, इसके बाद शिशु नाग तथा नंद वंश ने शासन किया,.नंदू को समाप्त कर मौर्य वंश ने शासन आरंभ किया.

हर्यंक वंश

बीबासर हर्यक वंश का पहला साम्राज्यवादी शासक था. बिंबसार श्रेणिक का शासनकाल 544-49 ई.पु  माना गया है.उसने 49 वर्षों तक शासन किया, बिंबिसार ने अपनी शक्ति तथा राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति को अपनाया, मदर कौशल विकसित तथा गांधार से उस में विवाह संबंध स्थापित किए, वह महात्मा बुद्ध का समकालीन था.

जीवक उसका राजवैद्य  था. 492 ई, पु में अजातशत्रु ने अपने पिता बिंबिसार की हत्या कर शासन प्राप्त किया, अजातशत्रु ने राज्य विस्तार के लिए युद्ध विजय को अपनाया. वज्जि संघ पर विजय के लिए अपने मंत्री वसकार की कूटनीति का प्रयोग किया.

अजातशत्रु के बाद उसका पुत्र उदयीन शासक बना. उदय जी जैन धर्मावलंबी था. उसने पाटलिपुत्र नगर ( कुसुमपूरा) की स्थापना की तथा उसे अपनी राजधानी बनाया.

 शिशुनाग वंश

हर्यक वंश के अंतिम शासक के नागदस्क  की हत्या कर 412 ई. पु. मैं शिशुनाग ने  इस वंश की स्थापना की . शिशुनाग ने पाटलिपुत्र के अतिरिक्त वैशाली को अपनी दूसरी राजधानी बनाया. शिशुनाग का उत्तराधिकारी कालाशोक  या काकवर्ण था. उसके समय द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ था.

नंद वंश है

शिशुनाग वंश के अंतिम शासक नंदिवर्धन की हत्या करें महापद्मनंद  नंद वंश की नींव रखी. बौद्ध ग्रंथ महाबोधि वंश में उसे उग्रसेन कहा गया. धनंन्द नंद वंश का अंतिम शासक था.

उस के शासनकाल में पश्चिमोत्तर भारत पर सिकंदर का आक्रमण हुआ था. महापद्मनंद  को स्र्वक्ष्त्रान्त्क एवं धननद को अग्र्मिज के नाम से भी जाना जाता है.

सिकंदर का आक्रमण

326 ई. पु. में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया. वह यूनान के मकदूनिया का शासक था. सिकंदरखैबर दरे  से भारत आया था.सिकंदर अरस्तु का शिष्य था. सिकंदर के आक्रमण के समय मगध पर है.

नंद वंश के शासक धनानंद का शासन था. पंजाब के शासक पुरुष के साथ सिकंदर ने हाईडेस्पीज का युद्ध लड़ा, जिसमें घायल होने के बाद पोरस  को बंदी बना लिया गया. व्यास नदी तक पहुंच कर सिकंदर के सैनिकों में आगे बढ़ने से मना कर दिया. 19 महीने भारत में रहने के पश्चात लौटते वक्त बेबीलोन में सिकंदर का निधन ( 323 ई. पु.) हो गया.

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