History

मौर्योत्तर काल के बारे में जानकारी

मौर्योत्तर काल में कई विशिष्ट संस्थाओं ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर शासन किया, जिसमें पुष्यमित्र शुंग, खारवेल, गौतमीपुत्र सातकर्णि तथा कनिष्क  प्रमुख थे,

शुंग वंश 

पुष्यमित्र शुंग एक मोर्य सेनापति था, जिसने अंतिम मौर्य शासक के वृहद्रथ की हत्या करें 185 ई. पु.  में शुंग वंश की स्थापना की. पुष्यमित्र शुंग ने पाटलिपुत्र के बदले उज्जयनी (विदिशा) को अपनी राजधानी बनाया.  पुष्यमित्र ब्राह्मण धर्म का समर्थक था, उसने अपने पुरोहित पंतजलि की सहायता से दो बार अश्वमेध यज्ञ किया.

कणव वंश

 75 ई, पु. मैं वसुदेव नव वर्ष के प्रथम शासक के रूप में प्रशासन प्रारंभ किया. इस  वंश के चार शासंक- वसुदेव, भूमिमित्र, नारायण तथा सुश्मर्ण हुए. कणव वंश के अंतिम शासक सुशर्मन को  सातवाहन शासक सिमुक ने पराजित किया.

शक\पहलव

तक्षशिला का पहला सिख शासक मेंउस था.  गांधार तथा पंजाब का पश्चिमी सा उसके अधिकार में था. मैं उसका उत्तराधिकारी एजेंज था, जिसने संपूर्ण पंजाब पर शासन किया. सत्संग क्षत्रपों में विभाजित था, इसका क्षत्रप गुजरात में स्थित था. शक मूलतः  शिरदरिया के उत्तर के निवासी थे. ये स्काइथिय्न एवं शक – पहलव नाम से भी जाने जाते हैं.

कुषाण वंश

कुजुल कडफिसेस ने  15 ई. में कुषाण वंश की स्थापना की, उसका उत्तराधिकारी विम कडफिसेस था. विम कडफिसेस उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्र को कुषाणों  के अंतर्गत लाया. वह सेव था. उसने महेश्वर उपाधि धारण की. भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के विम कडफिसेस ने चलाएं. कनिषक 786 में भारत का शांसक बना,उसने पुरुषपुर को अपनी राजधानी बनाया तथा राज्य रोहण के वर्ष से शक संवत का आरंभ किया.

मौर्यकालीन साहित्य

पुस्तक रचनाकार उत्तर रचनाकार
गाथा सप्तशती हाल नाट्यशास्त्र भरत
महाभाषय पंतजलि कामसूत्र वात्स्य्यान
चरक संहिता  चरक  बुद्धचरित् अशव  घोष

कलिंग (चेदि)

कलिंग का प्रसिद्ध शासक खारवेल चेदि वंश का शासक था. उसने पाटलिपुत्र पर आक्रमण किया तथा वहां से महानपदमनन्द द्वारा लूटी गई जैन मूर्ति को वापस लाने में सफलता प्राप्त की. खारवेल ने खंडगिरि पर्वत पर जैन संतों के निवास के लिए गुफाओं का निर्माण किया.

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