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विद्युत से जुड़े सवाल और उनके जवाब


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किसी तार में से आवेश का प्रवाह किस ओर होता है?

धातुएँ विद्युत की अच्छी चालक होती है। जब चालक में से लगातार धारा बहती रहती है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन निश्चित औसत चाल के साथ गमन करते हैं। यह चाल 1 mms-1 होती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक विचलन/गमन विद्युत चालकों में एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया है। किसी तार चालक में आवेश का प्रवाह अर्थात इलेक्ट्रॉन का प्रवाह  निश्चित दिशा में नहीं होता बल्कि आवेश का प्रवाह किसी भी दिशा में तब तक नहीं होता जब तक चालक को बैटरी से न जोड़ा जाए। बैटरी से जोड़ने पर आवेश धन क्षेत्र की ओर आकृष्ट होते हैं जिसमे प्रवाह ऋण क्षेत्र धन क्षेत्र की ओर होने लगता है।

विद्युत के तीन महत्वपूर्ण उपयोग लिखें?

  1. इस घर पर विद्युत उपकरणों/यंत्रों को चलाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  2. इसे विद्यूत ट्रेनो, बसों, स्कूटर आदि को चलाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  3. इसे उद्योगों में भारी मशीनें चलाने के लिए उपयोग किया जाता है।

विधुत धारा किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखें।

विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। विद्युत धारा का मात्रक ऐपियर (A) है (मात्रक का नाम इस के अविष्कारक आंद्रे- मेरी ऐपियर (1775-  1836) के नाम पर रखा गया)

ऊर्जा के रूप में विद्युत के क्या प्रायोगिक लाभ है?

  1. इसे सरलता से प्रयोग किया जा सकता है।
  2. इसके बिना ऊर्जा हानि के दूर तक स्थानांतरित किया जा सकता है।
  3. इसे लगभग प्रकाश की गति से सप्लाई किया जा सकता है।

तार के भीतर आवेशों का प्रवाह कैसे होता है?

ठोस तार के कारण एक दूसरे के साथ संकुचित होते हैं और इनके बीच बहुत कम स्थान होता है। इलेक्ट्रॉनिक इस ठोस में से बिना किसी रूकावट के ठीक वैसे ही आसानी से यात्रा करते हैं जैसे कि निर्वात में। चालक में से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह निश्चित औसत अपवाह चाल से करते हैं। इसे अपवाह चाल का परिकलन किया जा सकता है।

विद्युत विभव से आप क्या समझते हैं? इसका SI मात्रक क्या है?

विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर विद्युत विभव को उस कार्य है के रूप में परिभाषित किया जाता है जो इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया जाता है। अर्थात किसी बिंदु पर आवेश की मात्रा को विद्युत विभव कहते हैं। विभव का SI मात्रक वॉल्ट (V) है।

विद्युत विभवांतर से आप क्या समझते हैं? इसका SI  मात्रक क्या है? 1 वोल्ट का मान किसके बराबर होता है?

किसी धारावाही चालक तार के दोनों सिरों के बीच विभवांतर को उस कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है जो चालक में इकाई आवेश का एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया जाता है।  इसका SI मात्रक वॉल्ट (V) है।

किया गया कार्य (W)/आवेश(Q) = (V = W/Q)

1 वोल्ट-किसी विद्युत धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच एक कूलाम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जुल कार्य किया जाता है।  इन दोनों के दोनों के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है (एक वोल्ट = 1 जूल/ 1 कुलॉम) विभवांतर को वोल्टमीटर द्वारा मापा जाता है। वोल्टमीटर परिपथ में हमेशा पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।

विद्युत अवयवों को प्रतीकों के रूप में क्यों व्यक्त किया जाता है?

विद्युत परिपथ विभिन्न विद्युत अवयवों को व्यवस्था अनुरूप जोड़कर बनाया जाता है। इस परिपथ का आरेख है सुविधाजनक ढंग से खींचने (बनाने) के लिए ही विद्युत अवयवों को परिपथ में प्रतीकों द्वारा निरूपित किया जाता है।

सुचालक तथा कुचालक पदार्थों के बीच अंतर करें?

सुचालक- वे पदार्थ हैं जिनमें से विद्युत धारा बिना किसी विशेष प्रतिरोध के प्रवाहित हो सकती है, उन्हे सुचालक पदार्थ कहते हैं। उदाहरण- चांदी, कॉपर (तांबा), एलुमिनियम, ग्रेफाइट आदि।

कुचालक- वे पदार्थ जिनमें से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती है, कुचालक पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण- सूखी लकड़ी, प्लास्टिक, कांच, कागज आदि।

ओम के नियम को परिभाषित करें।

किसी चालक में बह रही विद्युत धारा, इसके सिरों के बीच विभवांतर (V) के अनुक्रमानुपाती होती है यदि तापमान में कोई परिवर्तन में हो तथा दूसरी भौतिक अवस्था में कोई परिवर्तन न हो।

प्रतिवर्ती प्रतिरोध किसे कहते हैं? धारा नियंत्रक का क्या कार्य है? प्रतिरोध के गुण की विशेषता भी लिखें।

  • प्रतिवर्ती प्रतिरोध- स्रोत की वोल्टता में बिना कोई परिवर्तन किए परिपथ की विद्युत धारा को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अव्यय को प्रतिवर्ती प्रतिरोध कहते हैं।
  • धारा नियंत्रक का कार्य- किसी विद्युत परिपथ में परिपथ के प्रतिरोध के परिवर्तित करने के लिए धारा नियंत्रक नामक युक्ति का उपयोग किया जाता है।
  • प्रतिरोध के गुण की विशेषता- अच्छा चालक का प्रतिरोध उत्पन्न करता है। पर्याप्त प्रतिरोधी लगाने वाला चालक प्रतिरोधक कहलाता है। उच्च प्रतिरोध वाला चालक हीन चालक का होता है।

ओम के नियम की दो सीमितताएँ लिखें।

  1. सभी चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते हैं।
  2. यदि भौतिक प्रतियां बदलती है, तो ओम का नियम लागू नहीं होता है।

किसी चालक का प्रतिरोध किन- किन कारकों पर निर्भर करता है?

चालक की लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, प्रतिरोधक के पदार्थ की प्रकृति, अर्धचालक में उपस्थित अशुद्धियाँ।

प्रतिरोधकता से क्या अभिप्राय है? इसका क्या महत्व है? इसका SI  मात्रक क्या है?

प्रतिरोधकता- इकाई लंबाई व इकाई अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल की चालक तार का प्रतिरोध, प्रतिरोधकता कहलाता है।

प्रतिरोधकता का महत्व

  • पदार्थ जिनकी प्रतिरोधकता कम होती है, वह विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। उदाहरण के लिए, धातुएँ तथा मिश्र धातुएं।
  • पदार्थ दिन की प्रतिरोधकता उच्च होती है, वे विद्युत के न्यून/कम चालक होते हैं या कुचालक होते हैं। उदाहरण के लिए रबड़ एवं प्लास्टिक।
  • यह तापमान के साथ बदलती है.
  • मिश्रातु की प्रतिरोधकता, इसकी घटक धातुओं से अधिक होती है।

SI मात्रक- प्रतिरोधकता का SI  मात्रक Ωm है।

अर्धचालक क्या होते हैं? दो उदाहरण दें।

अर्धचालक- अर्धचालक में पदार्थ हैं जिनकी चालकता को चालक तथा सुचालक पदार्थों के मध्य होती है। यह पदार्थ विद्युत उत्पादित करते हैं जब उन पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है। उदाहरण- सिलिकॉन, जर्मनियम, सैलीनियम, गैलियम आदि।

सुचालक, प्रतिरोधक तथा कुचालक पदार्थों के बीच क्या अंतर है?

  • सुचालक – वे पदार्थ जिन का विद्युत प्रतिरोध न्यून होता है सुचालक कहलाते हैं। चांदी,  तांबा, तथा एलुमिनियम विद्युत के सुचालक होते हैं।
  • प्रतिरोधक- वह पदार्थ जो विद्युत का चालन तो कर सकते हैं लेकिन जिनका विद्युत प्रतिरोध बहुत ही उच्च है जैसे नाइक्रोम।
  • कुचालक- वे पदार्थ जिनमें से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती और जिन का प्रतिरोध अत्यंत अधिक होता है। उदाहरण के लिए- रबड़, प्लास्टिक, सूखी लकड़ी, अच्छे कुचालक है।

धातु तथा उनकी मिश्रातुओ का उपयोगिता  तापन युक्तियों में क्यों किया जाता है?

  धातुएँ जिनकी प्रतिरोधकता उच्च होती है तथा मिश्रातूओं को विद्युत तापन यूक्तियां  में प्रयोग किया जाता है, क्योंकि-

  1. उनका प्रतिरोध अति उच्च होता है।
  2. यह उच्च ताप पर भी आसानी से नहीं जलते।
  3. यह उच्च ताप पर भी ऑक्सीकृत्त नहीं होते हैं।

किसी चालक में प्रवाहित धारा किन कारकों पर निर्भर होती है?

चालक का प्रतिरोध, इसके सिरों के बीच विभवांतर।

प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम की अपेक्षा पार्श्वक्रम में व्यवस्थित करने के क्या लाभ है?

जब प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम  में व्यवस्थित किया जाता है, तब-परिपथ का कुल प्रतिरोध कम हो जाता है।

  1. धारा का मान बढ़ जाता है।
  2. विद्युत धारा की व्यर्थता कम हो जाती है।
  3. विद्युत उपकरणों को स्वतंत्रता पूर्वक प्रयोग किया जा सकता है। अंत: विद्युत उपकरणों को पार्श्वक्रम में जोड़ना अधिक लाभदायक है।

जब भी प्रतिरोधकों श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है, तो क्या अवलोकन किया जाता है?

जब प्रतिरोधकों कों उनको श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है, तब –  

  1. परिपथ के सभी भागों में धारा का मान सम्मान रहता है।
  2. संयोजन में कुल विभव (वोल्टेज) एकल विभवों के योग के समान होता है।
  3. कुल प्रतिरोध एकल  प्रतिरोधको के प्रतिरोध का योग होता है।

क्या अवलोकन किया जाता है जब प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है?

  1. विभिन्न प्रतिरोध को में धारा प्रतिरोध की व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  2. प्रत्येक प्रतिरोध की वोल्टेज तथा पूरे परिपथ की वोल्टेज समान रहती है।
  3. एकल प्रतिरोधको के व्युत्क्रम का योग कुल प्रतिरोध के  व्युत्क्रम के समान होता है।

हमें विद्युत आवेश तथा एक बलम को श्रेणी क्रम में नहीं जोड़ना चाहिए,  क्यों?

ऐसा इसलिए है, क्योंकि- उन्हें धारा के भिन्न-भिन्न मान की आवश्यकता है।

उन्हें स्वतंत्रता पूर्वक उपयोग में नहीं किया जा सकेगा।

जूल के तापन प्रभाव की क्या अनुक्रीयाएँ हैं?

  1. विद्युत बल्ब से प्रकाश उत्पन्न करने के लिए।
  2. विद्युत परिपथ को हानि से बचाने के लिए फ्यूज का प्रयोग।
  3.  विद्युत हिटर, विद्युत इस्त्री आदि भी उसी प्रभाव पर आधारित है।

फ्यूज परिपथ की किस प्रकार सुरक्षा करता है?

विद्युत फ्यूज एक कम गलनांक वाली मिश्रातु का तार होता है। जब चालक का प्रतिरोध बढ़ता है अथवा अचानक वोल्टेज बढ़ जाती है या जब उच्च धारा प्रवाहित होती है तब परिपथ का तापमान बढ़ जाता है। तापमान में यदि बढ़ोतरी फ्यूज के तापमान को बढ़ा देती है। अधिक ऊष्मा के कारण फ्यूज पिघल जाता है। इसमें परिपथ टूट जाता है तथा उसमें धारा बहनी बंद हो जाती है। इसमें परिपथ को हानि होने से बचाया जा सकता है।

दो प्रमुख कारक बताएं जो उत्पादित ऊष्मा की मात्रा को निर्धारित करते हैं?

  • धारा- जब चालक तार में से ऊंचे धारा प्रवाहित होती है तो उत्पादित ऊर्जा भी अधिक होती है।
  • प्रतिरोध- जब चालक का प्रतिरोध अधिक होता है तो उत्पादित ऊष्मा की मात्रा भी अधिक होती है।

वाट, वाट घंटा, किलोवाट घंटा को परिभाषित करें।

  • वाट- यह किसी विद्युत यंत्र कि वह शक्ति होती है, जो 1 सेकंड में एक जूल ऊर्जा खर्च करती है।
  • वाट घंटा- यह 1 वाट घंटा ऊर्जा कि वह मात्रा होती है जो एक वाट शक्ति वाला विद्युत यंत्र 1 घंटे में खर्च करता है।
  • किलो वाट घंटा- यह ऊर्जा की वाणिज्यक इकाई है और इसे एक ‘यूनिट’ के रूप में जाना जाता है। यह ऊर्जा कि वह मात्रा होती है जो 1 किलो वाट शक्ति का विद्युत यंत्र 1 घंटे में खर्च करता है।

1 किलो वाट घंटा =  1000 वाट x 3600 सेकंड = 3.6 x 106 वाट सेकंड =  3.6 x 106 जूल


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