ScienceStudy Material

आंख में पाए जाने वाले दो दृष्टि दोष


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

आंख में पाए जाने वाले दो दृष्टि दोष, दृष्टि दोष के प्रकार, जरा दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष लेंस, दूर दृष्टि दोष परिभाषा, दीर्घदृष्टि, आंख भागों और कार्यों, दूर दृष्टि दोष में कौन सा लेंस लगता है

आंख में पाए जाने वाले दो दृष्टि दोष

एक सामान्य स्वस्थ आंख अपनी फोकस दूरी को इस प्रकार संयोजित करती है कि पास तथा दूर की सभी वस्तुओं का प्रतिबिंब दृष्टि पटल (रेटिना) पर बन जाए, परंतु कभी-कभी आंख की इस संयोजन शक्ति में कमी आ जाती है। इससे दृष्टि पटल  रेटिना) पर ठीक से प्रतिबिंब नहीं बनता है, जिसे दीर्घ दृष्टि तथा निकट दृष्टि दोष हो जाता है।

निकट-दृष्टि दोष

इस दोष में व्यक्ति को निकट की वस्तु में तो स्पष्ट दिखाई देती है, परंतु दूर की वस्तु में स्पष्ट दिखाई नहीं देती। इसका कारण यह है कि दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटीना (दृष्टि पटल) के सामने बनता है।

निकट दृष्टि दोष  के कारण

इस दोष के उत्पन्न होने के कारण अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्याधिक होना अथवा नेत्र गोलक लंबा हो जाता है।

निकट-दृष्टि दोष को दूर करना

किसी उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस के उपयोग द्वारा इस दोष को दूर किया जा सकता है। उपयुक्त क्षमता का अवतल लेंस वस्तु के प्रतिबिंब को वापस दृष्टि पटल (रेटीना) पर ले आता है जिससे इसे दोष का संशोधन किया जा सकता है।

दूर-दृष्टि दोष

इस दोष के व्यक्ति को दूर की वस्तु में तो स्पष्ट दिखाई देती है परंतु निकट की वस्तु में साफ़ दिखाई नहीं देती है। इसका कारण यह है कि निकट की वस्तु का प्रतिबिंब रेटीना के पीछे बनता है।

दूर-दृष्टि दोष के कारण

  • नेत्र गोलक का छोटा हो जाना।
  • अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को कम हो जाना।

दूर-दृष्टि दोष को दूर करना

इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। इस लेंस का प्रयोग से निकट बिंदु से आने वाली प्रकाश किरणें किसी दूर के बिंदु से आती हुई प्रतीत होती है तथा निकट पड़ी वस्तुओं साफ़ दिखाई देने लगती है।  

दोनों रोग को दूर करने का तरीका

कभी कभी किसी व्यक्ति के नेत्र में दोनों निकट दृष्टि दोष तथा दीर्घ दृष्टि दोष हो सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को प्राय: द्विफोकसी लेंसों की आवश्यकता होती है। द्विफोकसी लेंसों के अधिकाश सामान्य प्रकारों में द्विफोकसी लेंसों का उपरी भाग अवतल लेंस होता है जो दूर की वस्तुओं को देखने के लिए होता है। द्विफोकसी लेंस का निचला भाग उत्तल लेंस होता है जो पढ़ने में उपयोग होता है।


More Important Article


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close