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कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन से जुडी जानकारी

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7 कम्प्युटर सॉफ्टवेयर से जुड़े सवाल

सॉफ्टवेयर

उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं.

सॉफ्टवेयर के प्रकार

सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर.

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर- इनका काम सिस्टम अर्थात कंप्यूटर को चलाना तथा उसे काम करने लायक बनाए रखना है. सिस्टम सॉफ्टवेयर का हार्डवेयर में जान डालता है ऑपरेटिंग सिस्टम, कंपाइलर आदि सिस्टम सॉफ्टवेयर के मुख्य भाग हैं.
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर- ऐसे प्रोग्रामों जो हमारी असली कामों को करने के लिए लिखे जाते हैं. आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न सॉफ्टवेयर होते हैं.
  • कंपाइलर- यह एक ऐसा प्रोग्राम है, जो किसी उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद किसी कंप्यूटर की मशीनी भाषा में कर देता है.
  • इंटरप्रेटर- इंटरप्रेटर भी कंपाइलर की भांति कार्य करता है अंतर यह है कि कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को एक साथ है मशीनी भाषा में बदल देता है और इंटरप्रेटर प्रोग्राम की एक-एक लाइन को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है.
  • सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम- इसमें कंप्यूटर पर एक समय में एक आदमी काम कर सकता है. इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः पर्सनल कंप्यूटरों में प्रयोग किए जाते हैं.
  • मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम- इस प्रकार के सिस्टमों में एक समय में बहुत सारे व्यक्ति काम कर सकते हैं और एक ही समय में अलग-अलग विभिन्न कामों को किया जा सकता है.
  • मल्टी प्रोसेसिंग- एक समय में एक से अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी. पी. यू. रहते हैं. इस तकनीक को मल्टी प्रोसेसिंग कहते हैं.
  • मल्टी टास्किंग- मेमोरी में रखे एक से अधिक प्रक्रियाओं में परस्पर नियंत्रण मल्टी टास्किंग कहलाता है किसी प्रोग्राम से नियंत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था में रहता है.
  • कंप्यूटर वायरस- वायरस प्रोग्राम किसी भी सामान्य कंप्यूटर प्रोग्राम के साथ जुड़ जाते हैं और उनके माध्यम से कंप्यूटरों में प्रवेश पाकर अपने उद्देश्य अर्थात डाटा और प्रोग्राम को नष्ट करने के उद्देश्य को पूरा करते हैं अपने संक्रमणकारी प्रभाव से ये यह संपर्क में आने वाले सभी प्रोग्रामों को प्रभावित कर नष्ट अथवा क्षत-विक्षत कर देते हैं.
  • वायरस के प्रकार- बूट सेक्टर वायरस, फाइल वायरस.
  • मल्टी प्रोग्रामिंग- एक ही समय पर दो से अधिक प्रक्रियाओं का एक-दूसरे पर प्रचालन होना मल्टी प्रोग्रामिंग कहलाता है. विशेष तकनीक के आधार पर सी. पी. यू. के द्वारा निर्णय लिया जाता है कि इन प्रोग्राम में से किस प्रोग्राम को चलाना है एक ही समय में सी. पी. यू. किसी प्रोग्राम को चलाता है.
  • मल्टी प्रोसेसिंग- एक समय में एक अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी. पी. यू. रहते हैं इस तकनीक को मल्टी प्रोसेसिंग कहते हैं। एक से अधिक प्रोसेसर उपलब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसिंग तीनों कार्यों के मध्य समन्वय रहता है।
  • मल्टी टास्किंग- मेमोरी में रखे एक से अधिक प्रक्रियाओं में परस्पर नियंत्रण मल्टी टास्किंग कहलाता है। किसी प्रोग्राम से नियत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है। जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है। प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था में रहता है। मल्टी टास्किंग में यूजर को ऐसा प्रतीत होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे हैं।
  • मल्टी थ्रेडिंग- यह मल्टी टास्किंग का विस्तारित रूप है एक प्रोग्राम एक से अधिक थ्रेड एक ही समय में चलता है। उदाहरण के लिए एक स्प्रेडशीट लंबी गणना उस समय कर लेता है जिस समय यूज़र आंकड़े डालता है।
  • रियल टाइम- रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रक्रिया बहुत ही तीव्र गति से होती है रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग तब किया जाता है जब कंप्यूटर के द्वारा किसी कार्य विशेष का नियंत्रण किया जा रहा होता है।
  • कैरेक्टर यूजर इंटरफेस- जब उपयोगकर्ता सिस्टम के साथ कैरेक्टर के द्वारा सूचना देता है। तो इस ऑपरेटिंग सिस्टम को कैरेक्टर यूजर इंटरफेस कहते हैं। उदाहरण- डास, यूनिक्स।
  • ग्राफिकल यूजर इंटरफेस- जब उपयोग कर्ता कंप्यूटर से चित्रों के द्वारा सूचना का आदान-प्रदान करता है तो इसे ग्राफिकल यूजर इंटरफेस कहा जाता है उदाहरण- विंडो

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के प्रकार

  • ई. आर. पी. SAP, औरक्ल एप्स, फिनैक्ल।
  • डेटाबेस – औरक्ल डेटाबेस, माइक्रोसॉफ्ट एसक्यूएल, माई एसक्यूएल।
  • डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर- माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस।

ऑपरेटिंग सिस्टम- प्रचालन तंत्र या ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर का समूह है जोकि आंकड़ों एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है। यह हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है। इसकी सहायता से कंप्यूटर काम करता है। डास (DOS), विंडोस 98, विंडोस एक्स पी, लिनक्स आदि कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम है।

ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं

  • मेमोरी प्रबंधन
  • मल्टी प्रोग्रामिंग
  • मल्टी प्रोसेसिंग
  • मल्टी टास्किंग
  • मल्टी थ्रेडिंग
  • रियल टाइम

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

उपयोगकर्ता के आधार पर प्रकार-

  • एकल उपयोगकर्ता- इसमें एक समय में केवल एक उपयोगकर्ता काम कर सकता है।
  • बहूल  उपयोगकर्ता- इसमें एक से अधिक उपयोग कर्ता एक ही समय में काम कर सकते हैं।

काम करने के आधार पर प्रकार

  • कैरेक्टर यूजर इंटरफेस- इसमें उपयोगकर्ता सिस्टम के साथ कैरेक्टर के द्वारा सूचना देता है। उदाहरण- डास, यूनिक्स।
  • ग्राफिकल यूजर इंटरफेस- इसमें उपयोगकर्ता कंप्यूटर से चित्रों के द्वारा सूचना का आदान प्रदान करता है। उदाहरण- विंडोज।

अनुवाद- कंप्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0  और 1 को ही समझता है। मशीनी भाषा के अतिरिक्त अन्य सभी प्रोग्रामिंग भाषाओं में 0   और 1 के अतिरिक्त अन्य अक्षरों का प्रयोग होता है । अनुवादक इन अंकों व अक्षरों को बाइनरी संकेतों में अनुवादित कर देता है ताकि कंप्यूटर में दिए गए निर्देशों को समझकर उनके अनुसार विश्लेषण कर सही परिणाम प्रस्तुत कर सके। प्राप्त परिणाम भी चूँकि बाइनरी संकेतों में ही होते हैं। अंत: अनुवादक इन्हें मशीनी भाषा में अनुवादित कर देता है।

अनुवादक के प्रकार

  • असेंबलर- असेंबली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदलने में कंप्यूटर जिस सॉफ्टवेयर का अनुवादक के रूप में प्रयोग करता है असेंबलर कहलाते हैं। इसका मुख्य कार्य असेंबली भाषा में परिवर्तित करके प्रोसेसर को भेजना एवं प्राप्त विशेषलीत परिणाम को पुनः मशीनी भाषा से असेंबली भाषा में परिवर्तित करना है।
  • कंपाइलर- उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में अनुवाद करने के लिए कंप्यूटर जिस सॉफ्टवेयर का प्रयोग करता है कंपाइलर कहलाता है।
  • इंटरप्रेटर- यह एक प्रोग्राम होता है जोकि कंपाइलर के भांति कार्य करता है।

कंपाइलर और इंटरप्रेटर में अंतर- कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को प्रविष्ट होने के पश्चात उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है। जबकि इंटरप्रेटर उच्च स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम की प्रत्येक लाइन के कंप्यूटर में प्रविष्ट होते ही उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित कर देता है। अंत: ऐसी उच्च और स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा जिसमें कि कंपाइलर का प्रयोग होता है प्रोग्राम को लिखने के बाद प्रोग्राम को कंपाइलर में लोड किया जाता है जबकि ऐसी भाषा में प्रोग्राम लिखने पर है जिसमें कि इंटरप्रेटर का प्रयोग होना है प्रोग्राम लिखने से पूर्व ही इंटरप्रेटर को लोड किया जाता है।

कम्प्युटर सॉफ्टवेयर से जुड़े सवाल

ऐसे प्रोग्रामों, जिनका काम सिस्टम अर्थात कंप्यूटर को चलाना तथा उसे काम करने लायक बनाए रखना है-

सिस्टम सॉफ्टवेयर

ऑपरेटिंग सिस्टम है-

सिस्टम सॉफ्टवेयर

कंपाइलर है-

सिस्टम सॉफ्टवेयर

वेतन की गणना, लेन-देन का हिसाब, वस्तुओं का स्टाक रखना, बिक्री का हिसाब लगाना आदि कामों के लिए लिखे गए प्रोग्राम ही कहलाते हैं-

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

कंपाइलर है-

एक ऐसा प्रोग्राम है, जो किसी उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद किसी कंप्यूटर की मशीनी भाषा में कर देता है।

कंपाइलर किसी कंप्यूटर के ……………….का भाग होता है-

सिस्टम सॉफ्टवेयर

किसके लिए यह कथन सही है हर प्रोग्रामिंग भाषा के लिए अलग-अलग होता है। पहले वह प्रोग्राम के हर कथन या आदेश को की जांच करता है कि वह उस प्रोग्रामिंग भाषा के व्याकरण के अनुसार सही है या नहीं। यदि प्रोग्राम में व्याकरण की कोई गलती नहीं होती, तो इसके काम का दूसरा भाग शुरू होता है। यदि कोई गलती पाई जाती है तो वह बता देता है कि इस कथन में क्या गलती है। यदि प्रोग्राम में कोई बड़ी गलती पाई जाती है, तो यह वही रुक जाता है?

कंपाइलर

……… उच्च स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम की प्रत्येक लाइन के कंप्यूटर में प्रविष्ट होते ही उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित कर लेता है, जबकि……पूरे प्रोग्राम में प्रविष्ट होने के पश्चात उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है।

इंटरप्रेटर,  कंपाइलर

………..  ऑपरेटिंग सिस्टम में कंप्यूटर पर एक समय में एक आदमी काम कर सकता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः पर्सनल कंप्यूटरों का प्रयोग किए जाते हैं, जिनको घरों व छोटे कार्यालयों में उपयोग होता है।

सिंगल यूजर

……… ऑपरेटिंग सिस्टमों में एक समय में बहुत सारे व्यक्ति काम कर सकते हैं और एक ही समय पर अलग-अलग विभिन्न कामों को किया जा सकता है-

मल्टीयूजर

डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम है-

सिंगल यूजर

विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम है-

मल्टीयूजर

यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है-

मल्टीयूजर

एक समय में एक से अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी. पी. यू. रहते हैं इस तकनीक को कहते हैं-

मल्टी प्रोसेसिंग

एक से अधिक प्रोसेसर उपलब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसिंग तीनों कार्यों के मध्य समनव्य रहता है यह विशेषता है-

मल्टी प्रोसेसिंग की

एक ही तरह के एक से अधिक सी. पी. यू. का उपयोग करने वाले सिस्टम को मल्टी प्रोसेसर सिस्टम कहा जाता है-

सम

मेमोरी में रखे एक से अधिक प्रक्रियाओं में परस्पर नियंत्रण कहलाता है-

मल्टी टास्किंग

किसी प्रोग्राम से नियंत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है। जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था में रहता है। ……..में यूजर को ऐसा प्रतीत होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे हैं –

मल्टी टास्किंग

कंप्यूटर वायरस के लिए सही है?

  • वायरस प्रोग्रामों का प्रमुख उद्देश्य केवल कंप्यूटर मेमोरी में एकत्रित आंकड़ों व संपर्क में आने वाले सभी प्रोग्रामों को अपने संक्रमण से प्रभावित करना है।
  • वास्तव में यह कुछ निर्देशों का एक कंप्यूटर प्रोग्राम मात्र होता है जो अत्यंत सुक्ष्म, किन्तु शक्तिशाली होता है।

कंप्यूटर वायरस के लिए सही है-

  • अपने संक्रमणकारी प्रभाव से ये संपर्क में आने वाले सभी प्रोग्रामों को प्रभावित कर नष्ट अथवा क्षत-विक्षत नहीं करते हैं।
  • वायरस से प्रभावित कोई भी कंप्यूटर प्रोग्राम अपनी सामान्य कार्य शैली में अनचाही रुकावटें, गलतियां तथा कई अन्य समस्याएं पैदा नहीं करता है।

कंप्यूटर वायरस के लिए सही है?

  • प्रत्येक वायरस प्रोग्राम कुछ कंप्यूटर निर्देशों का एक समूह होता है जिसमें उसके अस्तित्व को बनाए रखने का तरीका, संक्रमण फैलाने का तरीका तथा हानि का प्रकार नहीं निर्दिष्ट होता है।
  • सभी कंप्यूटर वायरस प्रोग्राम मुख्यत: असेंबली भाषा या किसी उच्च स्तरीय भाषा जैसे पास्कल या सी में लिखे होते हैं।

वायरस के प्रकार हैं-

बूट सेक्टर, फाइल वायरस।

एक ही समय पर दो से अधिक प्रक्रियाओं का एक दूसरे पर प्रचालन होता है। विशेष तकनीक के आधार पर सी. पी. यू. के द्वारा निर्णय लिया जाता है कि इन प्रोग्राम में से किस प्रोग्राम को चलाना है। एक ही समय में सी. पी. यू. किस प्रोग्राम को चलाता है?

मल्टी प्रोग्रामिंग

एक समय मे एक से अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी. पी. यू. रहते है। एक से अधिक प्रोसेसर उपलब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसिंग तीनों कार्यों के मध्य समन्वय रहता है-

मल्टी प्रोसेसिंग

यह मेमोरी में रखी एक से अधिक प्रक्रियाओं में परस्पर नियंत्रण है। किसी प्रोग्राम से नियंत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है जब नियत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था में रहता है। इसमें यूजर को ऐसा प्रतीत होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे हैं-

मल्टी टास्किंग

यह मल्टी टास्किंग का विस्तारित रूप है एक प्रोग्राम एक से अधिक थ्रेड एक ही समय में चलाता है-

मल्टी थ्रेडिंग

……….  ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रक्रिय बहुत ही तीव्रगति से होती है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब कंप्यूटर के द्वारा किसी कार्य विशेष का नियंत्रण किया जा रहा होता है। इस प्रकार के प्रयोग का परिणाम तुरंत प्राप्त होता है। और इस परिणाम को अपनी गणना में तुरंत प्रयोग में लाया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर नियंत्रित की जाने वाली प्रक्रिया को बदला जा सकता है। इस तकनीक के द्वारा कंप्यूटर का कार्य लगातार आंकड़े ग्रहण करना, उनकी गणना करना, मेमोरी में उन्हें व्यवस्थित करना तथा गणना के परिणाम के आधार पर निर्देश देना है?

रियल टाइम

जब उपयोगकर्ता सिस्टम के साथ कैरेक्टर के द्वारा सूचना देता है, तो इस ऑपरेटिंग सिस्टम को कहते हैं-

कैरेक्टर यूजर इंटरफेस

डांस ऑपरेटिंग सिस्टम है-

कैरेक्टर यूजर इंटरफेस

यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है-

कैरेक्टर यूजर इंटरफेस

विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम है-

ग्राफिकल यूजर इंटरफेस

जब उपयोगकर्ता कंप्यूटर से माउस के द्वारा भी सूचना का आदान प्रदान करता है, तो इसे कहते हैं-

ग्राफिकल यूजर इंटरफेस

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