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दहन और ज्वाला से जुड़े Important Question

लकड़ी को ईंधन के रुप में जलाना उचित नहीं है, टिप्पणी करें?

हमारे देश में सदियों से लकड़ी का उपयोग घरेलू व औद्योगिक ईंधन के रूप में होता रहा है.  इसी उद्देश्य के लिए हर वर्ष वनों का एक बड़ा भाग नष्ट होता रहा है. घटते वनों का यह एक प्रमुख कारण है.  निसंदेह लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग शहरी क्षेत्रों में कम हुआ है क्योंकि यहां इसका स्थान कोयले और LPG ने ले लिया है.  परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी भारी मात्रा में लकड़ी को ईंधन के रूप में जलाकर नष्ट किया जा रहा है अतः हमारी वन संपदा तेजी से घट रही है.

लकड़ी का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करने से अनेक हानियां है जैसे-

  1. लकड़ी को जलाने से धुआं उत्पन्न होता है जिससे श्वास संबंधी रोग हो जाते हैं और वायु प्रदूषण होता है.
  2. लकड़ी प्राप्त करने के लिए वृक्ष काटने पड़ते हैं और जिससे इन वृक्षों से मिलने वाले लाभ हमें नहीं मिल पाते.
  3. उन्होंने वनोन्मुलन से वर्षा में कमी आती है.  
  4. वनोन्मूलन से मृदा -अपरदन पड़ता है।
  5. वनोन्मूलन से पर्यावरण की तापमान में वृद्धि होती है,
  6. वनों की कमी से पर्यावरण दूषित होता है।

अंता लकड़ी को प्राप्त करने के लिए वनो की कटाई हितकर नहीं है। वन प्राकृतिक संपदा है। पेड़ों को बड़ा होने व लकड़ी उपलब्ध कराने में वर्ष लग जाते हैं। इसलिए लकड़ी को ईंधन के रुप में दिलाना बिल्कुल उचित नहीं है।

ज्वाला के विभिन्न क्षेत्रों का वर्णन करो?

ज्वाला के तीन क्षेत्र होते हैं-

  • आतिक ज्वाला क्षेत्र
  • दीप्त क्षेत्र
  • ज्योतिहीन  क्षेत्र।

आंतरिक ज्वाला क्षेत्र- सबसे अंदर वाला क्षेत्र काला है और यह ज्वाला का सबसे ठंडा भाग होता है। इसमें ईंधन के गर्म वाष्प होते हैं। कार्बन के अनजले कण यही पाए जाते हैं। ।

दीप्त या मध्य क्षेत्र- मध्य वाला क्षेत्र चमकीला अर्थात दीप्त क्षेत्र होता है। इस क्षेत्र में ईंधन आशिंक रूप से जलकर कार्बन कर बनाते हैं। इन कणों की चमक के कारण यह क्षेत्र दीप्त बनता है। इस क्षेत्र का रंग पीला दिखाई देता है। कार्बन कण धुआँ तथा कज्ज्लल के रूप में ज्वाला को छोड़ देते हैं। इस क्षेत्र का ताप कम होता है।

बाह्रा अदीप्त क्षेत्र- यह सब से बाहर का क्षेत्र है जो हल्के नीले रंग का होता है। इस क्षेत्र में वायु ऑक्सीजन ईंधन से संयोग करके पूर्ण दहन करती है। इस क्षेत्र का तापमान उच्चतम होता है जो लगभग 1800 सेल्सियस डिग्री होता है।

ईंधन किसे कहते हैं? आदर्श ईंधन के गुण लिखे।

ईंधन – उष्मा के स्रोत (लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, केरोसिन, LPG, CNG, आदि।) ईंधन कहलाते हैं।

गुण- आदर्श यानी अच्छे इंसान के गुण निम्नलिखित हैं-

  1. इसका ज्वलन-ताप कम होता है।
  2. इसका भंडारण और परिवहन आसान होता है।
  3. इसके दहन के पश्चात कोई अवशेष नहीं बचते और ना ही कोई विषैला उत्पाद बनता है।
  4. इसका उष्मीय मान अधिक होता है।
  5. यह सरलता से उपलब्ध होता है तथा यह सस्ता होता है।
  6. इसकी प्रयोग विधि सरल व सुरक्षित होती है।

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