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दक्षिण भारतीय राजवंश के बारे में विस्तृत जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको दक्षिण भारतीय राजवंश के बारे में विस्तृत जानकारी देने जा रहे है-

दक्षिण भारतीय राजवंश के बारे में विस्तृत जानकारी

संगम काल

संगम  तमिल कवियों का संघ या मंडल था. इन संज्ञा परिषदों का आयोजन पांडे शासकों के संरक्षण में किया गया था. संगम काल में 473 कवियों द्वारा 2289 रचना की गई. संगम काल की प्रसिद्ध रचना तमिल व्याकरण तोलकाप्पियम है, जिसकी रचना तोलाकापीयर ने की. संगम साहित्य की रचना 300 ई.पु  के बीच की गई. इसमें तीन चरणों का वर्णन है, जिन्हें 197 पांडे शासकों ने शासन किया. तिरुकाम्पुलियर चेर , चोल, राज्य का संगम.

संगम युग

संगम युग के प्रमुख निम्नलिखित है –

चोल वंश

सोनू का प्राचीनतम उल्लेख कात्यायन ने किया है.  किसका प्रतीक बाघ था. संगम कालीन चोल वंस में सबसे प्रसिद्ध  संशक करिकाल था. वह 190 ईसवी के आस पास गद्दी पर बैठा, उसके पास शक्तिशाली नौसेना थी.

चोल  वंश की राजधानी कावेरीपट्टनम थी. पुतापुतु एक लंबी कविता है, जिसमें कावेरीपट्टनम की चर्चा है. करिकाल  सात स्वरों ( संगीत) का ज्ञाता तथा वैदिक धर्म का अनुयायी था.करिकाल ने वेणी का युद्ध जीता था. उसने उद्योग धंधों तथा कृषि का प्रोत्साहित किया.

शिल्पादीकारम  तथा पीटीटनपले ,मैं करिकाल की चर्चा मिलती है.करिकाल स्वरों का ज्ञाता तथा वैदिक धर्म का अनुयायी था. यूनानी तथा केवल व्यापारियों की बस्तियों का उल्लेख मिलता है. शिल्पादिकारम में कोवलन कंनगी  की कथा नुपुर के चारों ओर घूमती है. मणिमेखलै की रचना बोध कापारी सतनार ने की. जीवन चिंतामणि की रचना जैन मुनि तिरुतक्कदेवर ने की.

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पांडय वंश

मेगस्थनीज ने पांडे  वहां वंश के शासन की चर्चा की है. वह पांडेय सांसद को हेराक्लीज़ की पुत्री कहता है. पांडे स्वास्थ्य के मुद्दों को उर्दू में आने योग्य शालाओं का निर्माण करवाया तथा पलसाले ( अनेक यज्ञशाला बनाने वाला) की उपाधि ग्रहण की. पांडवों की राजधानी मदुरै थी तथा कोर्काई तटीय राजधानी थी नेदुजलियंन  प्रसिद्ध पांडे शासक था, त्लेयाल्न्गान्म का युद्ध जीता था. पतुपातु में नेडूजेलीयन ने पत्नी पूजा का आरंभ किया था उत्तर भारतीय सेना को पराजित किया था. पांडेसरा के नेडियोन ने समुंदर पूजा की प्रथा प्रारंभ की थी.

चेर वंश

चेर वंश का शासन केरल के क्षेत्र पर था. किस शासक का प्रतीक चिन्ह धनुष था. शेरों की राजधानी वजी वजी पुरम थी. जिसे एक करुर  के नाम से भी जाना जाता था. यह वर्ष का सबसे प्रसिद्ध शासन शेनगुटवन था. जिसे लाल चेयर भी कहा जाता था. आदिग ईमान नामक चेर शासक को दक्षिण में गन्ने की खेती प्रारंभ करने का श्रेय प्राप्त है.

शेरों की राजधानी करुर  से बड़ी संख्या में रोमन सिक्के एवं रोमन सुराहियां प्राप्त हुई है. नंदूजेराल अदन ने नौसैनिक शक्ति स्थापित की. तथा अधिराज की उपाधि ग्रहण की. 600 से 12 साल के बीच दक्षिण भारत में चोल चालुक्य तथा पल्लव शासकों ने राजनीतिक एकता तथा अखंडता बनाने का प्रयास किया. इस दौर में दक्षिण भारत की संस्कृति तथा साहित्य को अत्यधिक विकास का मौका मिला.

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चालुक्य वंश  (बादामी)

दक्षिण भारत में चालुक्य वंश की स्थापना पुलकेशिन  ने 535 ईस्वी में की. इस वर्ष की राजधानी वातापि या बादामी मे थी.  पुलकेशिन हर्षवर्धन का समकालीन था, उसने हर्ष को नर्मदा नदी के तट पर पराजित किया. इसके विषय में जानकारी दो विकृति लिखित एवं अभिलेख से मिलती है.

पल्लव वंश (कांची)

सी है विष्णु को पल्लव वंश का संस्थापक माना जाता है. राजधानी महाबलीपुरम थी. प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान भविष्य विष्णु के दरबार में रहता था, उन्होंने राधा किरातार्जुनीय  की रचना की थी. मतविलास प्रहसन में महेंद्र वर्मन प्रथम ने बोधकथा कपालीको कि हँसी उड़ाई है.

नरसिंह वर्मन प्रथम एक साम्राज्यवादी शासक था, उसने माँलमपुरम तथा कांची में मंदिरों का निर्माण करवाया. उस के शासनकाल में हैंड्स सॉन्ग कांची आया था. उसने वातापीकांड की उपाधि धारण की.

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