G.K

धातु और अधातु से जुड़े Important Question


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114
Contents show

उपधातुएँ में क्या होती है? उदाहरण दें।

  वे तत्व जिनमें धातु तथा अधातु दोनों के कुछ गुण पाए जाते हैं, उन्हें उपधातुए कहते हैं। उदाहरण- बरौनी, सिलिकॉन, जर्मेनियम, पोलो नियम आदि।

धातुओं के भौतिक गुणों की सूची बनाएं?

  • भौतिक अवस्था- पारे को छोड़कर सभी धातुएं कक्ष ताप पर ठोस है।
  • धात्विक चमक- सभी धातुओं में एक विशेष प्रकार की धात्विक चमक होती है।
  • सरंचना- तत्वों के परमाणुओं के बाह्रातम कोश में परमाणुओं की संख्या 1, 2,  या 3 होती है।
  • चालकता- धातुएँ  सामान्यतः विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती है।
  • आघातवधर्यता तथा तन्यता- धातुएँ सामान्यत तन्य तथा आघातवर्धय होती है।
  • कठोरता- धातुएँ समानता कठोर होती है। सोडियम तथा पोटेशियम नरम धातु होती है जिन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
  • घनत्व- सोडियम और पोटेशियम को छोड़ कर, धातुओं का घनत्व अधिक होता है।
  • गलनांक तथा क्वथनांक- धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक प्राय: उच्च होते हैं।

धातुओं के भौतिक गुणों में पाए जाने वाले अपराधों को सूचीबद्ध करें।

धातुओं के भौतिक गुणों में अपवाद-

अधिकतर धातु कठोर है। सोडियम, लिथियम, पोटैशियम को छोड़कर जिनको चाकू की सहायता से काटा जा सकता है।

अधिकतर धातुएं ऊष्मा की अच्छी चालक है।  पारा तथा सीसा को छोड़कर।

अधिकतर धातु ठोस है। पारा को छोड़कर जो एक द्रव है।

अधिकतर धातुओं के गलनांक प्राय: उच्च होते हैं। पारा गैलियम, सिजियम को छोड़ कर।

शुद्ध धातुओं के उपयोग लिखिए?

  • तांबा, एलुमिनियम जैसी धातुओं को विद्युत संचारण के लिए उपयोग किया जाता है।
  • सोने व चांदी के आभूषण बनाने तथा मिठाइयों के वर्क बनाने में उपयोग किया जाता है।
  • एलुमिनियम की पन्नी का उपयोग खाद्य पदार्थों की पैकिंग में किया जाता है।
  • तरल धातु, पारा का उपयोग थर्मामीटर में किया जाता है।
  • टाइटेनियम जैसी धातुओं का उपयोग नाभिकीय रिएक्टर तथा अंतरिक्ष यान के निर्माण में किया जाता है।

अधातुओं के भौतिक गुणों की सूची बनाइए?

  • भौतिक अवस्था- अधातुएँ तीनों भौतिक अवस्थाओ पाई जाती है।
  • धात्विक चमक- आयोडीन को छोड़कर इन में धात्विक चमक नहीं होती है।
  • चालकता- यह ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती है, ग्रेफाइट को छोड़ कर।
  • आघातवर्ध्यता तथा तानयता- इनमें ये दोनों गुण नहीं होते।
  • कठोरता- अपेक्षाकृत यह नरम तथा भंगुर होती है, हीरे को छोड़कर, जो कठोरतम पदार्थ है।
  • गलनांक तथा क्वथनांक- इनके गलनांक तथा क्वथनांक प्राय निम्न होते हैं, ग्रेफाइट को छोड़ कर।

अधातुओं के भौतिक गुणों में पाए जाने वाले अपवाधों की सूची बनाएं।

  • अधिकतर अधातुएँ नर्म तथा भंगुर होती है। हीरा कठोरतम वस्तु है जो कार्बन का अपरूप है।
  • अधिकतर अधातुएँ उष्मा वे विद्युत की कुचालक होती है। ग्रेफाइट (कार्बन) ऊष्मा और विद्युत का सुचालक है।
  • अधिकतर अधातुऑ में धात्विक चमक नहीं होती है। आयोडीन में धात्विक चमक होती है।
  • अधिकतर अधातु ठोस या गैसीय अवस्था में पाई जाती है।
  • ब्रोमीन एक तरल अधातु है।

अधातुओं का हमारे दैनिक जीवन में क्या योगदान है? वर्णन करें।

  • हाइड्रोजन गैस का प्रयोग वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में किया जाता है।
  • अमोनिया का उपयोग उर्वरक बनाने में किया जाता है।
  • कार्बन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन वसा तथा एंजाइमों के घटक के रूप में उपयोग में लाया जाता है।
  • कार्बन के अपरूप ग्रेफाइट का उपयोग इलेक्ट्रोड के रूप में किया जाता है।
  • नाइट्रोजन का उपयोग नाइट्रिक अम्ल, TNT तथा नाइट्रोग्लिसरीन आदि के निर्माण में किया जाता है।
  • ऑक्सीजन का उपयोग में था इधनों के दहन के लिए किया जाता है।
  • सल्फर, प्रोटीन के घटक के रूप में विद्यमान है। इसे कवकनाशी तथा विस्फोटकों के घटक के रूप में प्रयोग करते।

आघातवर्ध्यता और तन्यता किसे कहते हैं? इन गुणों की उपयोगिता भी लिखें।

आघातवर्ध्यता

धातुओं की पीटकर चौधरी बनाने के गुण को आघातवर्ध्यता कहते हैं। सोने व चांदी के वर्क से गुण पर आधारित होने के कारण बनाए जा सकते हैं।

तन्यता

धातु के पतले तार खींचने की क्षमता तन्यता कहलाती है। सोना सबसे अधिक तन्य है। 1 ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है।

धातुओं का उपयोग खाना पकाने के बर्तन बनाने में किया जाता है, क्यों

धातुएँ ऊष्मा की सुचालक है और इन का गलनांक अधिक होता है, इसलिए इनसे (कॉपर व  सिल्वर) खाना पकाने के बर्तन बनाए जाते हैं।

बिजली की तारों पर है PVC अथवा रबड़ की परत चढ़ाई जाती है, क्यों?

बिजली की तारें तांबे और एल्युमीनियम जैसी विद्युत सुचालकों से बनाई जाती है, परंतु इन पर PVC या रबड़ जैसी सामग्री की परत इसलिए चढ़ाई जाती है, ताकि विद्युत शॉक न लगे, क्योंकि PVC या रबड़ विद्युत की कुचालक होती है।

धातुओं का ध्वनिक गुण क्या है?

जब धातुओं को कठोर सतह से टकराया जाता है तो ध्वनि उत्पन्न होती है, इस धातुओं को ध्वानिक या सोनोरस कहा जाता है। स्कूल की घंटी इसी गुण के कारण धातु की बनाई गई है।

एनोडीकरण किसे कहते हैं? इसका लाभ भी लिखें।

वायु के संपर्क में आने पर एल्युमीनियम पर ऑक्साइड की मोटी परत का निर्माण होता है जिसे एनोडीकरण कहते है। एनोडीकरण के लिए एलुमिनियम का गंधकाम्ल के साथ विद्युत अपघटन किया जाता है। एनोड पर उत्सर्जित ऑक्सीजन एलुमिनियम का एनोडीकरण करती है।

लाभ

एनोडीकरण से धातु संक्षारित होने से बच जाती है।

नाइट्रिक अम्ल (HNO3) धातुओं के साथ क्रिया क्यों करता है?

जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ क्रिया करती है तो हाइड्रोजन गैस का उत्सर्जन नहीं होता है।  इसका कारण यह है कि HNO3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह उत्पन्न हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण जल में कर देता है और स्वयं नाइट्रोजन के ऑक्साइडॉ (NO N2O, NO2) में  उपचयित होता है।

पोटैशियम सोडियम को केरोसिन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

पोटैशियम और सोडियम ऑक्सीजन के साथ तेजी से अभिक्रिया करने के कारण खुले में रखने पर आग पकड़ लेती है। इसलिए इन्हें सुरक्षित रखने तथा आस्मिक आग को रोकने के लिए केरोसिन में डुबोकर रखते हैं ताकि इनका वायु में संपर्क ना हो सके।

धातुएँ अन्य धातु लवणों के साथ किस प्रकार की क्रिया करती है?

जब धातुएँ अन्य धातु लवणों के साथ क्रिया करती है तो अभिक्रिया होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि धातु अथवा धातु लवण में विधमान धातु में से कौन सी अधिक क्रियाशील है। अधिक क्रियाशील धातुएँ कम क्रियाशील धातु को उनके लवणों के विलियन से विस्थापित कर देती है, जबकि कम क्रियाशील धातु में ऐसा नहीं कर सकती है।

धातुएँ तथा आधातुएँ परस्पर किस प्रकार क्रिया करती है?

धातुएँ विद्युत धनात्मक तत्व है। वे इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बनाती है। दूसरी ओर अधातुएं विद्युत ऋणात्मक हैऔर वे इलेक्ट्रॉनिक ग्रहण करके ऋण आयन बनाती है। यह ऋण आयन तथा धनायन एक दूसरे को आकर्षित करके आयनिक/वैद्युत संयोजी आबंध बनाते हैं। यह आबंद इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण बनते हैं. इन आबंधों के बनने के कारण परमाणु अक्रिय गैसों जैसा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त कर लेते हैं तथा स्थिर हो जाते हैं.

ऐक्वा रेजिया किसे कहते हैं?

सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल व सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 का ताजा मिश्रण ऐक्वा रेजिया या अम्लराज कहलाता है। यह प्रबल संक्षारक होने के कारण सोने या प्लैटिनम को भी गला सकता है।

आयनिक यौगिक के 4 गुणों की सूची बनाएं।

  • आयनिक यौगिक ठोस, कठोर तथा भंगुर होते हैं।
  • उनके क्वथनांक तथा गलनांक उच्च होते हैं।
  • वे जल में सामान्यत: घुलनशील तथा कार्बनिक विलायको, जैसे कैरोसिन, पेट्रोल में अघुलनशील होते हैं।
  • वे विलयन की अवस्था में तथा गलित अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।

उदाहरण- सोडियम क्लोराइड (NaCl) कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2

खनिज व अयस्क में अंतर

खनिज अयस्क
पउन प्राकृतिक पदार्थों को जिनमें धातुओं के यौगिक पाए जाते हैं खनिज कहलाते हैं। जिन खनिजों में से धातु लाभदायक तथा सुविधा पूर्वक ढंग से प्राप्त की जा सकती है, उन खनिजों को अयस्क कहते हैं।
कुछ खनिजों में धातु की प्रतिशत मात्रा पर्याप्त मात्रा होती है जबकि अन्य खनिजों में धातु की प्रतिशत मात्रा बहुत कम होती है। सभी अयस्कों में धातुओं की प्रतिशत मात्रा पर्याप्त होती है।
कुछ खनिजों में आपत्तिजनक अशुद्धियां होती है जो धातु के निष्कर्षण में बाधा डालती है। अयस्कों कोई भी आपत्तिजनक अशुद्धियां नहीं होती है।
सभी खनिजों को धातु निष्कर्षण में उपयोग नहीं किया जा सकता यानी सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं। सभी अयस्कों को धातु निष्कर्षण के लिए उपयोग किया जाता है।

धातुएँ में प्रकृति में कैसे पाई जाती है ?

धातु प्रकृति में मुख्य रूप से तीन रूपों में पाई जाती है।

निम्न अभिक्रियाशील धातु

सोना, चांदी, प्लैटिनम एवं तांबा प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं। चांदी, कॉपर, ऑक्साइड व सल्फाइड के रूप में भी पाई जाती है।

मध्य अभिक्रियाशील धातुएँ

Zn, Fe, Pb आदि धातुएँ पृथ्वी की भू-पर्पटी में ऑक्साइड, सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती है।

उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ

इस वर्ग की धातुएँ जैसे K, Na, Ca, Mg व Al इतनी अच्छी अधिक अभिक्रियाशील होती है जो कभी भी स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाई जाती है। यह भी ऑक्साइड, सल्फाइड या कार्बोनेट के रूपों में पाई जाती है।

धातुक्रम से क्या अभिप्राय है? इसकी कौन-कौन सी विधियां है?

धातुक्रम

वे सभी प्रक्रम जो अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने में अपनाए जाते हैं, संयुक्त रूप से धातुक्रम कहलाते हैं. धातुक्रम के तीन चरण  निम्नलिखित है-

अयस्क का सांद्रण या समृद्धिकरण

जब अयस्क पृथ्वी के अंदर से, खानों से निकाला जाता है तो उस में रेत, मिट्टी, कंकड़, चट्टानी पदार्थ आदि अशुद्धियां होती है। इन अशुद्धियों को गैंग कहते हैं। इन अशुद्धियों को दूर करने का प्रकरण सांद्रण कहलाता है। इसे निम्नलिखित विधियों द्वारा किया जा सकता है-

द्रव चालित प्रच्छालन, झाग प्लवन, विद्युत चुंबकीय पृथक्करण, रासायनिक ( सांद्रण) पृथककरण।

अपचयन

धातु को उसके यौगिकों, जैसे ऑक्साइड, सल्फाइड आदि से प्राप्त करने की क्रिया, अपचयन कहलाती है। अपचयन के लिए निम्नलिखित तीन विधियों उपयोग में लाई जाती है- भर्जन, निस्तापन, विद्युत अपघटनी, अपचयन।

धातु परिशुद्धिकरण

धातु से अशुद्धियां हटाकर उसे शुद्ध बनाने की क्रिया परीद्धिकरण कहलाती है। धातुओं परीशुद्धिकरण में निम्नलिखित विधियां उपयोग की जा सकती है- द्रवण, आसवन, विद्युत अपघटनी परिष्करण।

भर्जन और निस्तापन में अंतर

भर्जन निस्तापन
इसमें सल्फाइड अयस्क को ऑक्सीजन/वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है। इसमें सामान्यतः कार्बोनेट ऐसे की वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है।
इसमें सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इसमें कार्बोनेट धातु ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।
इस प्रक्रिया में SO2 गैस निकलती है। इस प्रक्रिया में CO2 गैस निकलती है।
2PbS + 3O2 -> 2PBS + 2SO2 ZnCO3 -> ZnO + CO2

अभिक्रियाशील धातु के निष्कर्षण का वर्णन करें?

अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अधिक क्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलियन जागृत अवस्था से विस्थापित कर देती है। सभी धातुओं की क्रियाशीलता एक सामान्य होने के कारण ऐसा होता है। अगर धातु (A) धातु (B) को उसके विलियन से विस्थापित एक कर देती है तो यह धातु (B) की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील है।

धातु (A) + (B)  का लवण विलयन -> (A) का  लवण विलयन + धातु (B)

धातुओ के परिष्करण की विभिन्न विधियों के नाम लिखें?

द्रवण, ऑक्सीकारक परिष्करण, आसवन, विद्युत अपघटन परिष्करण, परी शुद्धिकरण, वाँन आर्केल विधि।

यशदलेपन से आप क्या समझते हैं? यह कैसे किया जाता?

लोहे पर जिंक की परत चढ़ना यशदलेपन कहलाता है। इस प्रकरण के द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है। लोहे के अध्ययन के लिए इसे गलित जस्त में डाला जाता है। जिंक धातु लोहे के ऊपर एक परत बना लेती है। जिंक अत्यंत क्रियाशील होने के कारण वायु की ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके जिंक ऑक्साइड की परत लोहे के ऊपर बनाती है। यह परत लोहे को आगे जंग लगने से रोकती है।

पीतल, काँसा, टाँका, वह स्टेनलेस स्टील के संगठन व उपयोग लिखें?

क्रमांक मिश्र धातु संगठन उपयोग
1 पीतल Cu = 60 –  90%

Zn = 40 – 10%

  • बर्तन, सिक्के, ताले, पेंच सजावटी वस्तु में
2 काँसा Cu = 88 – 96%

Sn = 12 – 4

  • बुत, सिक्के, यान, बर्तन
3 टाँका Sn = 50%

Pb = 50%

  • इलेक्ट्रिक सर्किट जोड़ने में तार के टूटे से जोड़ने में
4 स्टेनलेस स्टील Fe = 83%

C = 1%

Cr = 15%

Ni = 1%

  • शल्य चिकित्सा के औजार घर के बर्तन
  • सजावटी सामान

शुद्ध लोहे में कार्बन क्यों मिलाया जाता है?

शुद्ध लोहा अत्यंत नर्म होता है, इसलिए इसका इसी अवस्था में उपयोग करना सरल नहीं है। शुद्ध लोहे में कार्बन की थोड़ी मात्रा (लगभग 0.5%) मिलाकर इसे कठोर और प्रबल बनाया जा सकता है। इसी प्रकार लोहे के साथ निकेल एवं क्रोमियम मिलाकर स्टेनलेस इस्पात बनाया जाता है जो कठोर व जंग प्रतिरोधी होता है।

कॉपर की वस्तुएं वायु में काफी समय बाद हरी क्यों हो जाती है? ऊपर की दो मिश्र धातुओं के नाम दे।

कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र CO2 के साथ अभिक्रिया करके कॉपर कार्बोनेट बनाता है, जिसका रंग हरा होता है। यही हरे रंग की परत होती है। कॉपर की दो मिश्र धातुएं पीतल, काँसा


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close