ScienceStudy Material

ध्वनि से जुड़े सवाल और उनके जवाब


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114
Contents show

तीन प्रकार के मुख्य वाद्य यंत्रों के नाम लिखिए?

  1. डोरी वाले वाद्य यंत्र (तंतु वाद्य) जैसे- सितार, वीणा, हार्प, सतुर एवं वायलिन।
  2. वात अथवा रीड वाद्य यंत्र (सुशीर वाद्य) जैसे- बांसुरी, शहनाई एवं नाद स्वरम व वाध।  
  3. आघात अथवा झिल्ली वाद्य यंत्र- (अवनाद्य  वाद्य) जैसे- ढोल, तबला, ढोलक।

बाँसूरी में ध्वनि किस प्रकार उत्पन्न होती है?

बांसुरी में जब सीधी फूँक मारी जाती है तो बाँसूरी का वायु स्तंभ कंपित होकर सूस्वर ध्वनि उत्पन्न करता है।

आघात तथा झिल्ली वाद्य यंत्रों में से प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।

झिल्ली वाले वाद्य यंत्र- ढोल, तबला, ढोलक।

डोरी वाले वाद्य यंत्रों के दो उदाहरण दीजिए।

डोरी वाले वाद्य यंत्र में खींची हुई डोरिया या तार होते हैं जिन्हें कर्षण , हत्या धनुर्वाधन (गज से बजा कर) द्वारा कंपित कराया जाता है, जैसे सितार, विणा,संतूर, और वायलिन इत्यादि।

किसी बाजार में ध्वनि के कोई चार स्रोत बताइए।

वाहनों के होरन, साइकिल की घंटी, लाउडस्पीकर की ध्वनि, फेरी वालों की ध्वनि।

एकतारा क्या होता है? इसकी कार्यविधि किस कारक पर आधारित है?

इसे नारियल का खोखला खोल या मिट्टी के बर्तन को तानित झिल्ली के द्वारा तैयार किया जा सकता है। इसमें एक ही धातु की तार उपयोग में लाई जाती है। इसलिए इसे एकतारा कहते हैं।

इसकी तार को उंगली के द्वारा कर्षित कर छोड़ देते हैं जिससे इस में कंपन पैदा होता है। इसी कंपन के द्वारा सुस्वर अर्थात संगीत निकलता है।

मनुष्य की आवाज किस प्रकार उत्पन्न होती है?

जब हम बोलते हैं तो कंठ नली की मांसपेशियों वाक्- तंतु कस देती है। फेफड़ों के माध्यम से वायु कसे हुए तंतुओं में से गुजरती है और इस कारण वाक्- तंतु में कंपन होता है। वाक्- तंतुओं में उत्पन्न कंपन द्वारा आवाज की ध्वनि उत्पन्न होती है।

क्या सभी जंतु वाक्-तंतुऑ द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं?

कुछ जंतु जैसे कुत्ते, बिलिया, गाय आदि वाक यंत्रों द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं परंतु सभी जंतुओं में वाक तन्तु नहीं होते, जैसे चिड़िया अपनी श्वास नली में उपस्थित थे उपास्थि छल्लो ,जिन्हें  शब्दिनी कहते हैं। की सहायता से ध्वनि उत्पन्न करती है। मक्खियां अपने पंखों को तेजी से कंपित करके मर्मर ध्वनि उत्पन्न करती है।

क्या कारण है कि स्त्रियों की आवाज पुरुषों की आवाज से पतली होती है?

ध्वनि का पतला या मोटा होना ध्वनि के तारत्व पर निर्भर करता है। स्त्रियों की आवाज का तारत्व, पुरुषों की आवाज पुरुषों की आवाज से पतली होती है।

बच्चे की वाक-ध्वनि व्यस्क पुरुष की वाक ध्वनि से तीक्ष्ण क्यों होती है?

बच्चे की वाक-ध्वनि व्यस्क पुरुष की वाक-ध्वनि की अपेक्षा तीक्ष्ण होती है क्योंकि बच्चे की वाक-ध्वनि की आवर्ती पुरुष की वाक- ध्वनि की अपेक्षा अधिक होती है।

चंद्रमा पर एस्ट्रोनाट्स एक दूसरे की आवाज क्यों नहीं सुन सकते?

चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है। चूंकि ध्वनि के संचार के लिए किसी भौतिक माध्यम का होना बहुत जरूरी, इसलिए तो निरमा पर एस्ट्रोनाट्स एक दूसरे की आवाज नहीं सुन सकते हैं। वे एक दूसरे के साथ रेडियो तरंगों के द्वारा संपर्क करते हैं।

रेलवे लाइन के साथ कान लगा कर हम दूर से आती रेल गाड़ी की आवाज  कैसे सुन सकते हैं, जो अभी दिखाई नहीं दे रही होती है?

हम जानते हैं कि सामान्य तापमान पर लोहे में ध्वनि का वेग लगभग 5000 मीटर प्रति सेकंड होता है जो कि वायु में ध्वनि के वेग से बहुत अधिक है। इसलिए हम रेलवे लाइन जो की लोहे की गार्डरो की बनी होती है, से कान लगा कर बहुत दूर से आती हुई गाड़ी की आवाज सुन सकते हैं जो कि अभी दिखाई नहीं दे रही होती है।

आवर्तकाल, आवृत्ति तथा आयाम को परिभाषित कीजिए।

  • आवर्तकाल- कंपित वस्तु द्वारा एक दोलन पूरा करने में,लिए गए समय को और आवर्तकाल कहते हैं।  इसका SI मात्रक सेकंड है।
  • आवृत्ति- कंपित वस्तु में प्रति सेकेंड होने वाली दोलनों की संख्या को दोलनों की आवृत्ति कहते हैं। इसका SI  मात्रक हर्टज है।
  • आयाम- कंपित वस्तु अपनी माध्य स्थिति से इधर-उधर जिस अधिकतम दूरी तक जाती है, उसे आयाम कहते हैं।  इसका SI मात्रक मीटर है।

ध्वनि की प्रबलता तथा तारत्व में अंतर लिखिए।

ध्वनि की प्रबलता- ध्वनि की उत्तेजना के दर्जे को ध्वनि की प्रबलता कहते हैं। यह उत्तेजना का दर्जा स्रोत के तेज या हल्के कंपनों पर निर्भर करता है। जब कंपन अधिक तेज होते हैं तब ध्वनि प्रबलता अधिक तथा  जब कंपन हल्की होती है तो ध्वनि प्रबलता भी कम होती है।

तारत्व- यह ध्वनि की विशेषता है जिससे हम मोटी या पतली आवाज को पहचानते हैं। यह विशेषता ध्वनी स्रोत की आवृत्ति ( प्रति सेकंड कंपन संख्या) पर निर्भर करती है। जब ध्वनि स्रोतों की आवृत्ति अधिक होती है तब तारत्व भी अधिक होता है।

ध्वनि की उन विशेषताओं के नाम बताइए जो हमें विभिन्न ध्वनियों में भिन्नता करने में सहायता करती है?

ध्वनि प्रबलता- ध्वनि की प्रबलता कंपित वस्तु के आयाम पर निर्भर करती है। कंपन का आयाम जितना अधिक होगा ध्वनि की प्रबलता उतनी ही अधिक होगी।

ध्वनि तारत्व- ध्वनि की यह विशेषता है जो कि ध्वनि तरंगों के कंपन की आवर्ती द्वारा निर्धारित होती है। उच तारत्व  ध्वनि की तुलना में क्रक्स होती है। उच्च तारत्व ध्वनि में उच्च आवृत्ति होती है।

तारत्व को परिभाषित कीजिए।

तारत्वध्वनि की विशेषता है जो ध्वनि तरंगों के कंपन की आवृत्ति द्वारा निर्धारित होती है। उच्च तारत्व ध्वनि निम्न तारत्व ध्वनि की तुलना में करकस होती है अर्थात उच्च तारत्व ध्वनि मे उच्च आवृत्ति होती है।

कौन-सी ध्वनि में उच्च आवृत्ति होती है- मच्छर द्वारा उत्पन्न भनभनाहट की ध्वनि में अथवा शेर द्वारा दहाड़ने की ध्वनि में?

मच्छर द्वारा उत्पन्न भनभनाहट की ध्वनि की आवर्ती उच्च होती है जबकि शेर द्वारा दहाड़ने की ध्वनि की आवृत्ति अपेक्षाकृत कम होती है। इसके कारण मच्छर की आवाज शेर की आवाज से तीखी होती है।

ध्वनि की प्रबलता किस पर निर्भर करती है?

ध्वनि की प्रबलता कंपित वस्तु के आयाम पर निर्भर करती है। आयाम अधिक होने पर ध्वनि की प्रबलता भी अधिक होती है जब आयाम छोटा हो तो उत्पन्न ध्वनि मंद होती है।

ध्वनि की तीक्ष्णता या तारत्व को कौन निर्धारित करता है?

ध्वनि की तीक्ष्णता तारत्व  को कंपन की आवर्ती निर्धारित करती है। यदि कंपन की आवर्ती अधिक हो तो हम कहते हैं कि ध्वनि तीखी है।  यदि कंपन की आवृत्ति कम हो तो ध्वनि का तारत्व भी कम होता है। इसका सहज अनुमान ड्रम व सीटी की ध्वनि से लगाया जा सकता है। ड्रम मंद आवर्ती से कंपित होता है। अत: ड्रम कम तारत्व  की ध्वनि उत्पन्न करता है जबकि सीटी की आवृत्ति अधिक होने से अधिक तारत्व की ध्वनि उत्पन्न होती है।

पक्षी व शेर की  ध्वनि की तुलना करो।

पक्षी उच्च तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करता है जबकि शेर की दहाड़ का तारत्व मंद होता है। तथापि शेर की दहाड़ अत्यधिक प्रबल है जबकि पक्षी की ध्वनि दुर्बल होती है।  इसी प्रकार एक महिला की आवाज किसी पुरुष की अपेक्षा अधिक आवृत्ति अपेक्षा अधिक तीखी होने का भी यही कारण है।

अपश्रव्य तरंगे, श्रव्य प्रास का पराश्रव्य तरंगें क्या है?

  • अपश्रव्य तरंगे-वे तरंगे जिनकी की आवर्ती 20 हर्ट्ज से कम हो उन्हें अपश्रव्य तरंगे कहते हैं। इन्हें हम नहीं सुन सकते जैसे भूकंप से निकली तरंगे।
  • श्रव्य परास या श्रवण परास- वे तरंगे जिनकी आवर्ती 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज के बीच हो उन्हें श्रव्य परास कहते हैं।  इन्हें हम सुन सकते हैं।
  • पराश्रव्य  तरंगे- वे तिरंगे जिनकी आवर्ती 20000 हर्ट्ज से अधिक हो उन्हें पराश्रव्य तरंगे कहते हैं। इन्हें भी हम नहीं सुन सकते। जिन्हें कुत्ते और चमगादड़ सुन सकते हैं।

पराश्रव्य ध्वनि के क्या उपयोग है?

  1. पात्र- धावित्र में।
  2. चिकित्सा के क्षेत्र में निदानार्थ -उधार के रूप में तथा जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द निवारक के रूप में।
  3. पराश्रव्य – कर्मविक्षण द्वारा गर्भवती स्त्रियों में गर्भ की वृद्धि का अध्ययन करने में।
  4. उद्योगों में धातु तथा अन्य संरचनाओं में दोष ढूंढने तथा विभिन्न भागों में मोटाई ज्ञात करने।
  5. मरीज के शरीर के अंदर कैंसर का पता लगाने और उसका मूल्यांकन करने में।
  6. समुंद्र की गहराई मापने में।

ध्वनि प्रदूषण किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखो तथा हमारे लिए  ध्वनि का कौन सा सत्र सामान्य है?

उच्च तीव्रता वाली  ध्वनी या अवांछनीय शोर जो सुनने में तीखा लगता है और शरीर के लिए हानिकारक है ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। अंतर ध्वनि का जो रूप मानव गतिविधियों को  बाधित करें, कार्य क्षमता को नकारे सुनने पर तनाव हो, ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।

मात्रक- ध्वनि का मात्रक का डेसीबल है। डेसीबल मीटर से मापा जाता है।  20- 40 डेसीबल सामान्य ध्वनि, 40 से 85 डेसीबल वहन करने योग्य और 250 डेसीबल से ऊपर की ध्वनि नुकसानदायक है।

ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के उपाय लिखो?

  1. उद्योग, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे आबादी से दूर होने चाहिए।
  2. सौर उत्पन्न करने वाली मशीनों में ग्रीसिंग करनी चाहिए।
  3. ऊंचे संगीत जैसे लाउडस्पीकर पर पाबंदी होनी चाहिए।
  4. भवनों को साउंड -प्रूफ बनाने की तकनीकी अपनाओ।
  5. बड़े उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को ईयर प्लग पहनने की सलाह दी जाती है।
  6. विद्यालयों ( शिक्षण संस्थाओं), अस्पतालों, न्यायालयो, प्रयोगशाला आदी का शांत क्षेत्र घोषित करना चाहिए।
  7. शक्तिशाली पटाखों के बजाने पर रोक लगानी चाहिए।

More Important Article


Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/media-functions.php on line 114

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /www/wwwroot/examvictory.com/html/wp-content/themes/jannah/framework/classes/class-tielabs-filters.php on line 340

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close