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गुरुत्वाकर्षण से जुडी जानकारी

गुरुत्वाकर्षण

दो पिंडो के बीच एक आकर्षण बल कार्य करता है, जिसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं. गुरुत्व बल वह आकर्षण बल है. जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है.

पृथ्वी के गुरुत्व के कारण ही पृथ्वी पर वायुमंडल स्थित है, गुरुत्व के कारण ही वायुमंडल के कण पृथ्वी को छोड़कर नहीं जा पाते. चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान, पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण के मान का 1\6 होता है. जब लकड़ी तथा स्टील की गेंद को निर्वात में एक साथ नीचे गिराया जाता है, तो दोनों गेंद एक साथ पृथ्वी पर पहुंचती है क्योंकि पृथ्वी द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल सभी वस्तुओं पर एक समान लगता है.

लिफ्ट में पिंड का भार-परिवर्तन

जब लिफ्ट ऊपर की ओर जाती है, तो लिफ्ट में स्थित पिंड का भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है. जब लिफ्ट नीचे की ओर जाती है, तो लिफ्ट में स्थित पिंड का भार घटा हुआ प्रतीत होता है. जब लिफ्ट एक सामान्य वर्ग से ऊपर या नीचे गति करती है, तो लिफ्ट में स्थित पिंड के भार में कोई परिवर्तन प्रतीत नहीं होता है.

डबलडेकर बसों में ऊपरी हिस्से में यात्रियों को खड़े होने की अनुमति नहीं होती है, क्योंकि मुड़ते समय गुरुत्वाकर्षण का केंद्र अन्यत्र होने के कारण इनके पड़ने की संभावना अधिक रहती है. पहाड़ पर चढ़ते समय यात्री सदैव आगे की ओर को झुकते हैं, ऐसा करने से यात्री का गुरुत्व केंद्र उनके पावों के बीच से होकर गुजरता है तथा उनके अधिक संतुलन  स्थायित्व प्राप्त होता है.

उपग्रह

किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले पिंड को उस ग्रह का उपग्रह कहते हैं. चंद्रमा, पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जबकि INSAT-B, पृथ्वी का कृत्रिम उपग्रह है. उपग्रह की कक्षीय चाल उसके द्रव्यमान पर निर्भर करती है. एक ही त्रिज्या की कक्षा में भिन्न-भिन्न द्रव्यमान के उपग्रहों की चाल समान होती है. उपग्रह की कक्षीय चाल कक्षीय त्रिज्या पर निर्भर करती है.

पृथ्वी तल के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 8 किमी/से होती है. पृथ्वी के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल 84 मिनट होता है. भू-स्थायी उपग्रह पृथ्वी तल से लगभग है 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर पृथ्वी का परिक्रमण करता है.

पलायन वेग

  • पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर फेंके जाने पर वह गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है तथा कभी वापस नहीं आता है. पृथ्वी तल पर इसका मान 11.2 किमी/से होता है.
  • चंद्रमा पर पलायन वेग 2.38 किमी/से  है, जिसके कारण वहां वायुमंडल का अभाव है.

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