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जंतुओं में जनन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब

मनुष्य में निषेचन से शिशु के जन्म तक की प्रक्रिया का वर्णन करें?

मनुष्य में नर युग्मक शुक्राणु में मादा युग्मक अंडाणु सलयन कर आंतरिक निषेचन करते हैं। परिणाम स्वरुप युग्मनज का निर्माण होता है। युग्मनज विकसित होकर भ्रूण में परिवर्तित होता है।  युग्मनज कोशिकाओं का एक गोला होता है जिसमें कोशिकाएं समूह बनाकर उत्तक व अंगों में बदलने लगती है। इस प्रकार युग्मनज से विकसित हुई  संरचना भ्रूण कहलाती है। भ्रूण गर्भाशय की दीवार में रोपित होकर पोषण ग्रहण करने लगता है। परिणाम स्वरुप शरीर के भिन्न-भिन्न बनने लगते हैं।  यह अवस्था गर्भाशय कहलाती है। गर्भ मातृ शरीर से अपरा के द्वार पोषण,शवसन तथा उत्सर्जन की पूर्ति करता है। गर्भधारण करने से परसों तक लगभग 280 दिन का समय गर्भवती कहलाता है।  इस प्रकार पूर्ण विकसित ( शरीर के सभी विकसित अंगों के साथ) नवजात शिशु जन्म लेता है।

नर जनन तंत्र का वर्णन करें।

जनन तंत्र उन अंगों का समय होता है जो सत्तानोत्पति में सहायता करता है । नर जनन अंग–  वृषण, शुक्राणु नलिका, शिशन। इनमें से वृषण नर के मुख्य जनन अंग है तथा शेष सभी सहायक जनन अंग है।

  • वृषण-प्रत्येक मनुष्य में अंडाकार अखरोट के मां के वृषण होते हैं जो त्वचा की पतली थैली, वृषण कोष के अंदर तथा उधर के नीचे वाले भाग में स्थित होते हैं। प्रत्येक वृषण से एक नली निकलती है डीजे शुक्रवाहिनी कहते हैं।
  • शुक्राणु नलिका- यह एक लंबी तथा कुंडलिका की सरंचना है।  यह शुक्राणुओं को सचित करती है और उन्हें गतिमान बनाती है।  वृषण से निकलने के बाद शुक्राणु नलिका सीधी हो जाती है तथा उसका व्यास बढ़ जाता है।  अब इसे शुक्रवाहिनी कहते हैं और यह मूत्राशय से आने वाली नली मूत्र मार्ग से जुड़ जाती है।
  • शिशन- एक पेशीय अंग द्वारा शरीर के बाहर खुलता है जो  कि शिशन कहलाता है। मूत्र तथा शुक्र दोनों एक ही मार्ग शिशन से निकलते हैं।  शिशन में बहुत अधिक रोहित प्रवाहित होता है। शिशन शुक्राणुओं को मादा जननांगों में छोड़ देता है।

मादा जनन तंत्र का वर्णन करें?

मांदा  जनन अंगो के समूह को मादा का जनन तंत्र कहते हैं।-

अंडाशय, अंडर वाहिनी नली, गर्भाशय।

  • अंडाशय- मादा  में एक जोड़ी अंडा से होते हैं।  इसमें अंड कोशिका ( या अंडाणु) बनाती है।
  • अंड वाहिनी नली- यह अंडाशय और गर्भाशय के बीच स्थित बहुत ही कुंडली तो ऐसी न लगाएं हैं जिनका मुक्त सिरा कीप की तरह फैला वह होता है ताकि अंडाशय से निकलने वाले अंडे को ग्रहण कर सकें।  मादा के अंडे का निषेचन भी इस नली के अंदर होता है। दोनों ओर अंडवाहिनीया मिलकर एक कोष्ठ बनाती है जिसे गर्भाशय कहते हैं।
  • गर्भाशय- 71/ 2 x 5 x 21/2 सेंटीमीटर माप का एक आडू के आकार का अंग है जो अंड वाहिनी नली से जुड़ा होता है। गर्भाशय की काय में तीन परते होती है- अंतः स्तर , मध्य स्तर, बाह्रा स्तर।  गर्भाशय से एक कोष्ठ में खुलता है जिसे योनि कहते हैं, जो 9 सेंटीमीटर लंबी झील्ली युक्त नलिका होती है। इसका ऊपरी सिरा गर्भाशय में निचला सिरा एक छिद्र (भग) में खुलता है।

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