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उत्तर प्रदेश में नगर निकाय एवं प्रशासनिक सुधार

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राज्य में नगर निकाय एवं प्रशासनिक सुधार

सन 1916 में उत्तर प्रदेश में नगर स्वायत शासन की स्थापना संयुक्त प्रान्त टाउन एरिया अधिनियम-1916 के साथ संयुक्त प्रांत नगर पालिका अधिनियम-1916 के अंतर्गत की गई। प्रदेश के नगरों में से नदी नियमों के तहत नगर निगम, नगर पालिका परिषद नगर समिति एवं अधिसूचित क्षेत्र समिति स्थापित की गई है।

नगर निकायों का वितरण

प्रदेश  सरकार द्वारा स्थानीय स्वशासन कानून अधिनियम, 1994 में नामक नया कानून क्षेत्र में संविधान संशोधन के तहत पारित किया गया, जिसके अंतर्गत प्रदेश के संपूर्ण नगरिया क्षेत्र को तीन भागों में बांटा गया है-

  • नगर  निगम- 5 लाख से अधिक आबादी वाले नगरीय क्षेत्र।
  • नगर पालिका परिषद- एक लाख से 5 लाख तक की आबादी वाले क्षेत्र।
  • नगर पंचायत- 15,000 से एक लाख की आबादी वाले नगरीय क्षेत्र।

नगर निगम

नगर निगम में एक में तथा अन्य सदस्य होते हैं। मैयर नगर निगम का प्रमुख होता है, जो व्यस्क जनता द्वारा प्रत्यक्ष रुप से 5 वर्षों के लिए चुना जाता है, पद ग्रहण की इस वर्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। नगर निगम में निर्वाचित मनोनित तथा पदेन यह तीन प्रकार के सदस्य होते हैं।

निर्वाचित सदस्य प्रत्येक वार्ड से एक-एक चुना जाता है, उनके लिए यह आवश्यक है कि उनका नाम निर्वाचक सूची में हो, उम्र 21 वर्ष से कम ना हो तथा विधान मंडल का सदस्य होने की योग्यता रखता हो। मनोनीत सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाता है तथा नगर क्षेत्र के पदेन सांसद, विधायक, राज्य सभा विधान परिषद सदस्य पदेन सदस्यों में आते हैं।

सदस्यों के निर्वाचन में आरक्षण के नियमों का पालन किया जाता है। नगर निगम का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा इसका विघटन किया जा सकता है। नगर निगम का चुनाव विघटन की तिथि 6 माह के भीतर करना आवश्यक है। नगर निगम का बजट निगम के सचिव (आयुक्त) द्वारा तैयार किया जाता है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 13 नगर निगम है।

नगर पालिका परिषद

नगर पालिका परिषद की भी सरंचना नगर निगम जैसी होती है, निर्वाचित सदस्यों की संख्या 25 से 55 होती  तथा मनोनीत सदस्यों की संख्या 3 से 5 के बीच होती है। वर्तमान में प्रदेश में नगर 193 नगर पालिका परिषद है।

नगर पंचायत

नगर पंचायत का अध्यक्ष प्रधान होता है, जो प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है। इसमें भी तीन प्रकार के सदस्य होते हैं।- निर्वाचित, मनोनीत एवं पदेन निर्वाचित सदस्यों की संख्या 10 से कम एवं 24 से अधिक नहीं हो सकती। मनोनीत सदस्यों की संख्या दो अथवा तीन होती है। वर्तमान में प्रदेश में 422 नगर पँचायते है ।

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