History

मध्य प्रदेश का स्वाधीनता संग्राम में योगदान

भारत में अंग्रेजी शासन की न्यू ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा डाली गई ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना सन 1600 ईसवी में हुई। कर्नल डयूरेड की सतकर्ता और कर्नल स्टाकले कर्नल ट्रैवरन कप्तान लूडलो एवं कप्तान कोब के इंदौर रहने के बावजूद 1 जुलाई 1857 को प्रातः सादत खां और भागीरथ के नेतृत्व में कॉल करने सेना को अपने नियंत्रण से बाहर बता कर अप्रत्यक्ष देशभक्तों को सहायता दी थी।

होल्कर की सेना और अंग्रेजो के मध्य कोठी के सामने युद्ध हुआ। इसमें 20 अंग्रेज अधिकारी मारे गए और लगभग 13 लाख रुपए का माल देशभक्तों के हाथ लगा। कर्नल डयूरेड बचे वे अपने साथियों, महिलाओं तथा बच्चों को लेकर सिहोर चला गया। जहां भोपाल की बेगम सिकंदर ने उसकी मदद की। अमझेरा के राजा बख्तावर सिंह ने भोपाल की अंग्रेजी छावनी पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया। अंग्रेज अधिकारियों ने भागकर झाबुआ के राजपूत राजा के यहां शरण ली। बाद में राजा बख्तावर सिंह को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर फांसी दे दी गई।

तात्या टोपे, जिन्होंने नाना साहब पेशवा के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। 6 दिसंबर को सर कॉलिन केम्प्बबैल द्वारा पराजित हुए, साथ ही उन्होंने उत्तरी मध्य भारत में अंग्रेज विरोधी अभियान जारी रखा।  जनवरी 1857 में सर ह्यूरोज ने सागर तथा बुंदेलखंड में विद्रोह को दबा दिया।

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई 4 अप्रैल 1858 को कालपी पहुंची, इन दोनों की सेनाएं 22 मई 1858  को कालपी में ह्यूरोज की सेना से हार गई तब रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ग्वालियर की ओर बढ़े। जहां उन्होंने महाराजा सिंधिया को प्राप्त कर ग्वालियर के किले पर अधिकार जमा लिया। महाराजा सिंधिया आगरा चले गए, किंतु ह्यूरोज ने पीछा नहीं छोड़ा और ग्वालियर पर आक्रमण कर दिया। दोनों सेनाओं में युद्ध हुआ रानी लक्ष्मीबाई ने पुरुष वेश में लड़ते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। किंतु भी बुरी तरह से घायल हुई और 28 जून, 1858 को युद्ध भूमि में ही वीरगति को प्राप्त हुई।

1960 में जबलपुर में क्रांतिकारी दल का गठन हुआ तथा 1915 में होमरूल लीग की स्थापना की गई। 1923 में यहां से आरंभ हुआ झंडा सत्याग्रह तो संपूर्ण प्रदेश में प्रसिद्ध हुआ। 1938 में भोपाल राज्य प्रजामंडल की स्थापना हुई। सरदार पटेल की योजना के अंतर्गत देशी रियासतें विलीनीकरण के समझौते पर हस्ताक्षर करती गई।  जिनमें आज के मध्य प्रदेश में 1 फरवरी तथा 25 अगस्त 1948 के बीच पुरानी सी.पी. एंड बरार के महाकौshल की 15 विंध्य प्रदेश की 35 तथा मध्य भारत की 26 रियासतें एवं भोपाल रियासत शामिल है।

1857 में मध्य प्रदेश में प्रथम संविधान का आंदोलन केवल एक अन्य स्थलों में ग्वालियर, शिवपुरी, राधौगढ़, महू, सीहोर, भोपाल,  मनक हरि, नागौद, जैतपुर, पठारी, शाहगढ़, मालथोन, खुरई, सागर, हटा, फुटेरा, दमोह, हिंडोरिया, विजय राघौगढ़, स्लीमानाबाद, राहतगढ़, बाल कोट, गढ़ाकोटा,  कटंगी, देवरी, हीरापुर, जबलपुर, साहेपुर, मदनपुर, नरसिंहपुर, बेरठा, रामगढ़, नारायणगंज, मंडला, धुमरी, वीछिया, सिवनी, होशंगाबाद, सोहागपुर, पंचमढ़ी, हरदा, बेतूल, मुलताई व अब्बापानी आदि प्रमुख है।


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