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मध्यप्रदेश में खेलकूद और खेल पुरस्कार

मध्यप्रदेश में खेलकूद गतिविधियों के विकास एवं उनके प्रचार-प्रसार हेतु राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर 1975 को खेलकूद एवं युवक कल्याण विभाग की स्थापना की, जिसका प्रमुख कार्य राज्य में खेलकूद गतिविधियों को संचालित करना एवं ग्रामीण अंचलों में उन्हें प्रोत्साहन देना है। यह विभाग अपनी खेलकूद संबंधी गतिविधियां मध्य प्रदेश राज्य क्रीड़ा परिषद की सलाह पर संचालित करता है।

मध्य प्रदेश की नई खेल नीति

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने प्रदेश की नई खेल नीति को मंजूरी 28 अगस्त 2003 को प्रदान की है।  नई खेल नीति की प्रमुख विशेषताएं हैं-

  • ओलंपिक खेलों में स्वर्ण, रजत तथा कांस्य पदक जीतने पर एक करोड़, 30 लाख था ₹20 लाख का नगद पुरस्कार।
  • 5 वर्ष में गांव गांव में खेल मैदान तथा 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिला मुख्यालय में खेल परिसर।
  • ढाई सौ प्लाटों वाली आवासीय कॉलोनियों में खेल मैदान की अनिर्वायता।
  • ढाई सौ से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में खेल प्रशिक्षक का प्रवधान।
  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर तथा ग्वालियर में अलग-अलग खेलों के लिए उत्कृष्टता संस्थान।
  • एक करोड रुपए से स्पोर्ट फंड की स्थापना।
  • विश्व तथा एशियाई खेलों के पदक विजेता को द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरी मिलेगी।

खेल नीति 2005

खेल नीति 2005 के निम्नलिखित उद्देश्य रखे गए-

  • खेलो में प्रदेशों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा उठाना।
  • प्रदेश में युवाओं की ऊर्जा को राज्य एवं देश के विकास के लिए प्रोत्साहित करें उसका उपयोग करना।

मध्यप्रदेश में खेलकूद

  • क्रीडा परिषद मूलतः एक परामर्शदात्री समिति है. यह खेल संघों तथा संस्थाओं को मान्यता प्रदान करती है। पुरस्कारों आदि के बारे में भी यह अपनी अनुशंसाए राज्य सरकार को देती रहती है।
  • भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, इंदौर व उज्जैन प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है।
  • मध्यप्रदेश के इंदौर में 1890 में पारसी क्लब की स्थापना के साथ ही क्रिकेट की शुरुआत हुई थी। सन 1934 में मध्यप्रदेश में क्रिकेट एसोसिएशन का गठन हुआ था।
  • 1941 में महाराजा यशवंत राव ने कर्नल सीके नायडू के नेतृत्व में होलकर क्रिकेट की स्थापना की जो बाद में मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में परिवर्तित हो गई।
  • सी के नायडू में जगदाले, कैप्टन सिटी सरवटे, सतीश मल्होत्रा, माधव राव सिंधिया, भगवान दास, सक्सेना, गुलरेज अली, रमेश भाटिया, नरेंद्र मेनन, संजीव राव, राजेंद्र निगम, नरेंद्र हिरवानी व कु राजेश्वरी दोलकिया राज्य के प्रमुख क्रिकेट खिलाड़ी हैं।
  • मध्य प्रदेश में 19 अक्टूबर 1940 को राज्य में बैडमिंटन एसोसिएशन की स्थापना हुई इसका मुख्यालय जबलपुर में है।
  • मध्य प्रदेश क्रीड़ा परिषद खेल एवं युवा कल्याण विभाग की एक सलाहकारी संस्था है। यह प्रति विष प्रदेश के सर्वोत्कृष्ट सीनियर खिलाड़ियों को राज्य के शीर्ष पुरस्कार विक्रम पुरस्कार से सम्मानित करती है। श्रेष्ठ जूनियर खिलाड़ियों को एकलव्य पुरस्कार तथा खेल प्रशिक्षकों को विश्वामित्र पुरस्कार दिए जाते हैं।

मध्यप्रदेश शासन द्वारा घोषित किए गए वर्ष 2016 के विक्रम एकलव्य व विश्वामित्र पुरस्कार का विवरण इस प्रकार है-

मध्य प्रदेश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार (2017)

एकलव्य पुरस्कार (2017)

  • मनीषा कीर (शूटिंग), भोपाल
  • प्रत्यक्षा सोनी (सॉफ्ट टेनिस), भोपाल
  • विश्वजीत सेंधव (रोएईग) भोपाल
  • हर्षिता तोमर (सेलिंग), भोपाल
  • माला कीर (काया किंग- कैनोइंग) भोपाल
  • सुदीप्ति हजेला (घुड़सवारी) इंदौर
  • तितिक्षा मराठी (तेराकी) इंदौर
  • ज्योति पारखे (सॉफ्टबॉल), इंदौर
  • आकाश रुढेलु (कबड्डी), इंदौर
  • इसीका साह (बिलियर्ड स्नूकर) इंदौर,
  • पीयूष सिंह (वेटलिफ्टिंग) जबलपुर
  • अंचित कौर (फेसिंग), ग्वालियर
  • प्रियम जैन (वुशु) अशोकनगर
  • पलाश सामदिया (कराते) शिवपुरी।

विक्रम पुरस्कार (2017)

  • प्रिंस प्रमार (काया किंग- कैनोइंग), टीकमगढ़
  • सवेछा जाटव (वुशु), जबलपुर
  • संजय सिंह राठौड़ (शूटिंग), आगरा मालवा
  • सोना किर (रोइग) भोपाल
  • रीना सिंधिया (कराते) जबलपुर
  • सेल चाल्र्स (सेलिंग) भोपाल
  • अफ्फान यूसुफ (हॉकी) भोपाल
  • नरेंद्र समेलिया ( खो खो), इंदौर
  • सरिता रैकवार (पावर लिफ्टिंग) जबलपुर
  • धर्मेंद्र अहिरवार (तेराकी-  दिव्यांग) ग्वालियर।

विश्वामित्र पुरस्कार (2017)

  • 2017 का विश्वामित्र पुरस्कार तरुणा चावरे ( मलखंभ) उज्जैन
  • दविंदर सिंह खनूजा ( पावर लिफ्टिंग), इंदौर

स्वर्गीय श्री प्रभात जोशी खेल पुरस्कार (2017)

मलखंब खेल को प्रोत्साहन देने के लिए स्थापित इस वर्ष का स्वर्गीय श्री प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार मलखंब खिलाड़ी चंद्रशेखर चौहान, उज्जैन को प्रदान किया जाए।

लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2017)

स्वर्गीय प्रभाकर कुलकर्णी, इंदौर को मरणोपरांत, उनके क्रिकेट, खो-खो एवं कबड्डी के किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा।

अन्य पुरस्कार

उप पुरस्कारों में विक्रम पुरस्कार व विश्वामित्र पुरस्कार के तहत एक ₹1,00,000 की राशि दी जाती है जबकि एकलव्य पुरस्कार के तहत ₹50,000 की राशि पुरुष खिलाड़ियों की जाती है।

गुलाबराय चडढ़ा कप, यश कप, राजेंद्र सिंह का पर, राधेश्याम अग्रवाल का, ट्राईपन क्राउंन शील्ड, ए.पी.जे.एन. कप, मास्टर अरविंद खांडेकर चैलेंज शिल्ड आदि बैडमिंटन खेल से संबंधित है। बी एम कपाड़िया, सी डी  देवरस, प्रणव बोस, एम तांबे अशोक सेदा, पार्थी गांगुली आदि प्रमुख राज्य स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी है। मध्यप्रदेश में टेबल टेनिस एसोसिएशन की स्थापना 1957 में जबलपुर में हुई थी, रीवा जैन (1974 राष्ट्रीय चैंपियन) मुख्य खिलाड़ी है। वर्ष 2002 के राष्ट्रीय खेलों (हैदराबाद) में मध्य प्रदेश 3 स्वर्ण, 8 रजत व 15 कांस्य (कुल 26 पदक) पदकों के साथ 14 वें स्थान पर रहा।

27 जुलाई 2012 को लंदन ओलंपिक में डाउ केमिकल्स को प्रयोग बनाए जाने की विरोध में राजधानी भोपाल में भोपाल गैस त्रासदी  के पंडितों के संगठन ने भोपाल ओलंपिक की आयोजन का निर्णय लिया वर्ष 1984 में यूनियन कार्बाईड में गैस रिसाव के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे तथा बाद में डाउ केमिकल्स ने यूनियन कार्बाइड को खरीद लिया था।

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेल पुरस्कार की राशि को 29 अगस्त 2011 को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। विक्रम पुरस्कार की धनराशि ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 और 19 वर्ष से कम आयु के खेल प्रतिभाओं को दिए जाने वाले एकलव्य पुरस्कार की राशि 25000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है।  खेल प्रशिक्षकों को राज्य की ओर से दिया जाने वाला विश्वामित्र सम्मान और खेल के क्षेत्र में दिए गए विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाने वाला लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार की धनराशि भी ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी गई है।

मध्य प्रदेश सरकार ने मलखान को राजकीय खेल घोषित करने का निर्णय 10 अप्रैल 2013 को किया। राज्य सरकार ने एक नई योजना मिशन ओलंपिक 2020 की शुरुआत करने का निर्णय लिया। इस योजना के तहत ओलंपिक 2020 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य के चुने हुए खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना है।  इसके तहत 9 वर्ष की आयु से दैनिक प्रति भावना खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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