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भारतीय रेलवे में नया विकास


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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र

900 से अधिक ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगभग सभी कोचों में जोड़ा गया है तथा यह कार्य अन्य ट्रेनों में भी प्रगति पर है. भारतीय रेलवे के यात्री डिब्बों में लगाए जा रहे जैव शौचालयों  में मानव अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एनारोबिक + डाइजेशन प्रक्रिया लागू होती है. रेलवे ट्रैक पर कोई अपशिष्ट नहीं किया जाता है, अपितु अपशिष्ट, कोच के नीचे फिट किए गए टैंक में व्यवस्थित रहता है.

एक तरह से अपशिष्ट का उपयोग बायो गैस (मुख्यतया मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड) के रूप में परिवर्तित किया जाता है. एक तरह से अपशिष्ट को वातावरण में प्रदूषित होने से बचाने कि यह एक सफल प्रक्रिया है, जिसे स्वास्थ्य के लिए हितकारी बनाया जाता है.

राष्ट्रीय रेल और परिवहन विश्वविद्यालय

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वडोदरा में भारत के पहले राष्ट्रीय रेल और परिवहन विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी. भारतीय रेलवे व्यापक तकनीकी बुनियादी ढांचे का उत्थान करने हेतु स्थापना की गई. यह भारत के कौशल विकास कार्यक्रम को बढ़ाने में काफी योगदान देता है और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में मदद करता है तथा यह नवीन को तेजी से प्रारंभ करने में मदद करता है.

इसका योगदान मेक इन इंडिया को व्यापक रूप से प्रभावकारी बनाने में किया जाता है. अत्याधुनिक विधि से इनकी कक्षाओं में शिक्षण की नई तकनीक अपनाने का प्रयास किया गया है. इस विश्वविद्यालय को एक डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम 2016 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है. सरकार भी अप्रैल 2018 तक 26 जुलाई के लिए प्रयासरत है.

रो-रो सेवा

रो-रो का अर्थ है चलते रहो, उठाते रहो, अर्थात: इस प्रक्रिया या व्यवस्था से तात्पर्य किसी सामान को उसके बीच स्थित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे को सुगम बनाना है. रेलवे कोचों से सामान, ट्रकों पर लादकर उस के निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाता है. इस सेवा के माध्यम से ईंधन की बचत तथा माल ढुलाई की दूशवारियों को रोकने से मुक्ति मिल गई है.

इस सेवा में सड़कों पर होने वाले प्रदूषण से भी मुक्ति मिली है, क्योंकि गंतव्य तक माल ढुलाई अब ट्रेन काफी हद तक पूरी करेगी. यह सेवा राजधानी शहरों में विकसित की जा रही है. रो -रो सेवा जो भारी और हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए दिल्ली एनसीआर को बाईपास करने का एक ही विकल्प उपलब्ध कराएगा.

टक्कर और रोधी उपकरण (एसीडी )

एसीडी पूरी तरह एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली है, जो रेलवे प्रणाली पर टकराव कम करने और रेलवे की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए बनाया गया है. यह सिग्नल रहित प्रणाली है और खतरनाक टक्कर को रोकने के लिए ट्रेन के संचालन में सुरक्षा के, आंतरिक्त कवरेज प्रदान करता है, जो लापरवाही तथा उपकरणों की विफलता से घटित होता है. एसीडी प्रणाली, सामान्य काम कर रहे ट्रेन ऑपरेशन का परिसंचरण में अवरोध नहीं करता है.

एसीडी प्रणाली, रेड सिग्नल ओर इंटर लाकिंग प्रणाली है और किसी भी मौजूदा सिग्नल लिंग या इंटर लॉकिंग प्रणाली से बेहतर व्यवस्था है, जो ट्रेन परिचालन को बिना बदले बेहतर कार्य करता है. टक्कर विरोधी उपकरणों (एसीडी) को नेटवर्क प्रदान किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के उपकरण शामिल होते हैं, जिससे लोकोमोटिव और गार्ड के लिए बोर्ड एसीडी और ट्रेक स्थित एसीडी, क्रोशिंग सतरीय, लोको शेड एसीडी, तथा ससुचन प्रणाली के एसीडी नेटवर्क आदि. यह सभी वितरण प्रणाली के सिद्धांत कार्य करते हैं.

यह प्रणाली दृश्य- सर्वे प्रणाली, ट्रेन संबंधी है जो मार्ग (रोड) पर रेलवे क्रॉसिंग के लिए अत्यंत उपयोगी है . साधारणतया यह चेतावनी और नियमन प्रणाली है, जो इनवलों – मीटर रीडर था ढलानों पर लागू की जाती है. 2,000 से अधिक टक्कर रोधी उपकरण, 2700 किमी के पथ पर चलाने की शुरुआत हो चुकी है,जिसमें से 1900 किमी पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे और कोकण रेलवे कार्यवृत्त की जाएगी.


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