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ए.सी. परिपथ से जुड़े सवाल और उनके जवाब

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यदि परिपथ RLC परिपथ में R = 5Ω XL = 15Ω तथा XC = 15Ω हो, तो उसका तूल्य अपघात होगा-

किसी ऐसी परिपथ का Q  होता है बराबर-

XL\R

किसी परिपथ में संधारित्र के एक्रॉस वोल्टता (VC)तथा कुंडली के एक्रॉस वोल्टता (VL)-

एक दूसरे के विपरीत कार्य करने वाले होते हैं

1000 V उच्चतम मान वाली वोल्टता का RMS मान होगा-

707 V

RLC परिपथ में अनुनाद की स्थिति में होता है –

XL = XC

1 kHz आवृत्ति की तरंगदैर्ध्य होगी –

3 x 105मी

डेल्टा संयोजन में लाइन वोल्टता बराबर होती है-

फेज वोल्टता

विद्युत वितरण प्रणाली में प्रयोग किया जाता है-

स्टार संयोजन

असंतुलित लोड के शक्ति मापन की उपयुक्त विधि है-

तीन वाट मीटर विधि

यदि ए.सी. लाइन से 8-10  इंडक्शन मोटर्स से सायोंजित हो, तो पावर फैक्ट्री होगा-

लैंगिग

यूनिटी पावर फैक्टर पर कोण θ का मान होता है-

0

यदि 3 फेज 400 वोल्ट ए.सी. लाइन से सिंगल फेज ए.सी. लाइन प्राप्त की जाए तो उसकी वोल्टता  होगी-

230 V

ए.सी. परिपथ में विद्युत धारा का वह घटक जो विद्युत शक्ति व्यय नहीं करता, है-

वाटलेस घटक

श्रेणी अनुनादीय परिपथ की आवृति का सूत्र है-

fr = 1\2π√L.C

ए.सी. का औसत मान  उसके आर.एम.एस. मान से ……  होता है।

बराबर

ए.सी. परिपथ में शक्ति व्यय होता है केवल-

प्रतिरोध में

ए.सी. परिपथ की शक्ति खपत ज्ञात करने का सूत्र है-

P= V.I. cosθ

ए.सी. परिपथ में आयाम घटक का मान होता है –

1.414

आवर्ती तरंगदैर्ध्य तथा तरंग गति में संबंध होता है-

V.f.λ

किसी आल्टरनेटर की घूर्णन दिशा ज्ञात करने का नियम है-

फ्लैमिंग का दाएं हाथ का नियम

1 THZ =

1012HZ

श्रेणी प्रकार के परिपथ के शक्ति घटक की गणना के लिए प्रयुक्त सूत्र है-

cos = R\Z

यदि एक RLC परिपथ में R, L एवं C  के एक्रॉस वोल्टता क्रमश: VR, VL एवं VC हो तो आरोपित ए.सी. वोल्टता होगी-

V2R +(VL – VC )2

दिष्ट धारा जनित्र का, आर्मेचर परतदार होता है-

भंवर धारा हानियों को कम करने के लिए

क्रोड परतों को सामान्य रूप से …….  का बनाया जाता है।

सिलिकोन इस्पात

एक दिष्ट धारा जनित्र में यदि P ध्रुवो की संख्या एवं N मोटर में घूर्णन प्रति मिनट (rpm) की संख्या हो, तो चुम्बकीय उत्क्रमण की आवृति होगी-

N.P\120

दिक परिवर्तक ब्रशों के लिए पदार्थ सामान्य रूप से होता है-

कार्बन

दिक परिवर्तक खंडों के बीच में प्रयुक्त विद्युतरोधी पदार्थ सामान्य रूप से होता है-

अभ्रक

एक दिष्टधारा श्रेणी मोटर की घूर्णन की दिशा को परिवर्तित किया जा सकता है-

अंतर्विनियम आपूर्ति प्रांतों द्वारा, अंतर्विनियाम क्षेत्र प्रांतों द्वारा

यदि एक दिष्टधारा मोटर को प्रत्यावर्ती धारा आपूर्ति के आर-पार संयोजित किया जाता है-

मोटर संगत तुल्यकालिक चाल पर चलेगा

धारा भेदी यौगिक दिष्ट धारा मोटरों का उपयोग …..  की आवश्यकता होने पर, हो सकता है।

उच्च प्रारंभिक बलाघूर्ण

विद्युत तापक के तार सामान्य रूप से ……  के बने होते हैं।

नाइक्रोम

एक मानक 25 W  बल्ब एक 750 W तापक के साथ श्रेणी में अधिष्ठापित है, अब यदि इस बल्व को एक 60 W बल्ब द्वारा बदल दिया जाए तो-

तापक  के निर्गम में वृद्धि होगी

तापक कुंडली के रूप में 0.05Ω सेमी प्रतिरोध वाला एक नाइक्रोम का तार 200W, 200V पर एक तापक के लिए प्रयुक्त किया गया है, आवश्यक तार की लंबाई की लंबाई होगी-

40 मीटर

एक डेल्टा परिपथ जालक्रम में प्रत्येक तत्व का मान R  है, समतुल्य स्टार परिपथ जालक्रम में प्रत्येक तत्व का मान होगा –

R/3

इलेक्ट्रॉन वोल्ट में क्या नापा जाता है?

ऊर्जा

किरचॉफ का नियम ……..   वाले परिपथों के लिए प्रयोज्य नहीं है?

वितरित प्राचलो

L = 2.02 H के साथ समरूपी कुंडली का युग्मन गुणांक K = 0.8  है, अन्योन्य प्रेरकत्व का मान होगा-

16 mH

एक परिपथ के लिए यदि v = 50 sin (2000 t + 5) एंपियर हो, तो धारिता का मान होना चाहिए-

120 माइक्रोफैरड

एक श्रेणी परिपथ में R = 8Ω एवं C = 30μF है। किस आवृत्ति पर धारा वोल्टता  से 30 अग्र होगी ?

f = 500 हर्ट्ज

चुंबकीय गुंजन ……..  के कारण उत्पन्न होती है।

चुंबकीय बलों

विद्युत उत्सर्जन बतियों में प्रकाश उत्पन्न होता है-

कैथोड किरण उत्सर्जन

विद्युत उत्सर्जन बतियों के लिए ……..  इलेक्ट्रोड़ों का प्रयोग किया जाता है।

टंगस्टन

सोडियम वाष्प उत्सर्जन बति का रंग होता है-

पीला

प्रकाश का रंग निर्भर करता है-

तरंगदैर्ध्य

प्रकाश द्वारा प्रदीप्त किए जाने पर वैद्युतिक प्रतिरोध में परिवर्तन होने वाला पदार्थ कहलाता है-

प्रकाश चालकीय

परिशुद्धता कार्य के लिए आवश्यक प्रदीप्त स्तर …… के क्रम का होता है।

50-100 ल्यूमेन/मी2

प्रतिदीप्ति नलिका परिपथ में चोक का कार्य है-

आर्क की शुरुआत करना एवं स्थिर रखना

एक संधारित्र को ट्यूब लाइट परिपथ के प्रदत किया जाता है –

रेडियो व्यतिकरण का परिहार (दूर करने) हेतु।

तीन क्रोड नम्य  केबिल के मामले में उदासीन का रंग होता है-

भूरा

दिष्ट धारा में केबिलों की धारा दहन क्षमता प्रत्यावर्ती धारा के अपेक्षा अधिक होती है मुख्यत:

सनादियों की अनुपस्थिति के कारण

फ्यूज तार सामान्यतः ……  से बनाए जाते हैं।

टिन- सीसा मिश्र धातु

पुन: तारयोग्य फ्यूज की तुलना में एक HRC  फ्यूज में-

प्रचालन की उच्च चाल होती है

10 अश्वशक्ति, 3 कला, 400 वॉल्ट, 560 हर्ट्ज वाला एक प्रेरण मोटर पूर्णभार पर 15 एंपियर लेता है, यदि एक प्रत्यक्ष युगपत प्रवर्तक का प्रयोग करके मोटर को चालू करना हो, तो fyu धारा अनुमताक होगी –

30 एंपियर

अनुरक्षण के लिए मोटर के किस हिस्से पर अधिकतम सावधानी की आवश्यकता पड़ती है?

स्टेटर कुंडलनों

एक डायनेमोमापी प्रकार के वाटमापी का प्रयोग किया जा सकता है-

प्रत्यावर्ती के साथ-साथ दिष्ट धारा पर भी

एक डायनेमोमापी प्रकार की वाटमापी में –

वर्ग-नियम सकेल होता है

एक RC युग्मिक प्रबंधक में ट्रायोड का प्रयोग करके युग्मन संधारित्र के लिए कौन सी संधारित्र को वरीयता दी जाती है?

विद्युत अपघटनी

दिष्ट धारा आपूर्ति वोल्टता के साथ एक श्रेणी में संयोजित दो ट्रांजिस्टरों में एक परिपथ अंतर्विष्ट है, यह परिपथ जाना जाता है-

पूरक सममित के रूप में

पूरक सममिति  के लिए कौनसे ट्रांजिस्टरों का प्रयोग किया जाता है?

PNP एवं NPN

एक अंकिय कंप्यूटर में-

संख्यात्मक एवं असंख्यात्मक आंकड़ों में से किसी को भी मेमोरी में अनिश्चित रुप से नहीं रख सकते।

आवती का मापन …….  का प्रयोग करके नहीं किया जा सकता है।

CRO

दिष्टधारा मोटर का प्रारंभिक प्रतिरोध सामान्यतया होता है-

निम्न

170 A शीर्ष  का RMS मान होगा-

120 A

जब दो तरंगे कला से बाहर 90 पर होती है तो-

एक का अपना शीर्ष मान होगा, जबकि दूसरे का अपना शून्य मान होगा।

यदि V1 = A sint एवं v2 = A sin (t-o) हो, तो –

V2, V1  से पश्च है

वायु का पारवैद्युत सामर्थ्य है, करीब –

0.3 kV/mm

करिचोफ वोल्टता नियम ……. वाले परिपथों के लिए प्रयुक्त होता है।

केवल रैखिक तत्वों

यदि एक परिपथ में उर्जा या विद्युत वाहक बल का कोई स्रोत नहीं होता तो यह परिपथ जाना जाता है-

निष्क्रिय परिपथ- जाल के रूप में

एक लेड-एसिड बैटरी के विद्युत-अपघटय में सामान्य अशुद्धि है-

लेड क्रिस्टल

फ्लेमिंग का दाहिनी हस्त का नियम प्रेरित विद्युत वाहक बल का दिशा के संबंध में ……..  से सहसंबंध स्थापित करता है।

चुंबकीय अभिवाह, गति की दिशा एवं प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा

प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा का पता लगाने के लिए फ्लेमिंग का दाहिना- हस्त नियम का प्रयोग करते समय अंगूठा इंगित करता है-

चालक की गति की दिशा को यदि तर्जनी अभिवाह की रेखाओं की ओर इंगित करती है।

उत्थापकों के लिए कौन से दिष्ट धारा मोटर को वरीयता दी जाती है?

श्रेणी मोटर

दिष्ट धारा मोटर के साथ प्रयुक्त प्रवर्तकों में स्व-भारण गुणधर्म होते हैं –

क्योंकि इन मोटरों को उच्च प्रारंभिक बलाघूर्ण होता है ।

दिष्टधारा शंट मोटरों में यदि भार को कम कर दिया जाता है तो-

चाल प्राय: स्थिर रहेगी

यदि एक दिष्ट धारा मोटर का पश्च विद्युत वाहक बल अचानक शून्य हो जाए, तो क्या होगा?

मोटर चलना जारी रहेगा

एक दिष्ट धारा मोटर की चाल –

भार धारा के समानुपाती होती है

पश्चविद्युत वाहक बल के अनुक्रमानुपाती  होती है।

1a के समानुपाती

शून्य भार पर कौन सा मोटर का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए?

श्रेणी मोटर

ट्रांसफार्मरों के मामले में स्टार\स्टार  संयोजन ओं का प्रयोग किया जाता है-

छोटा, उच्च वोल्टता  ट्रांसफार्मरों के लिए

ट्रांसफार्मरॉ के मामले में डेल्टा\ डेल्टा संयोजन का प्रयोग किया जाता है-

बड़ा, निंम्न वोल्टता  ट्रांसफार्मरॉ के लिए

शक्ति आपूर्ति ट्रांसफार्मर के मामले में किस प्रकार के ट्रांसफार्मर संयोजन की वरीयता दी जाती है-

डेल्टा\स्टार

3- कला,-4  तार निकाय का प्रयोग सामान्य रूप से होता है-

द्वितीयक संचरण पर

………. वोल्टताओ से परे के लिए पिन प्रकार के विद्यूतरोधियों का सामान्य रूप से प्रयोग किया जाता है-

1000V

स्टार- डेल्टा प्रवर्तक का प्रयोग करते समय –

प्रारंभिक वोल्टता कम हो जाती है।

तीन- अला प्रेरण मोटरों को चलाने की किस विधि में प्रारंभिक वोल्टता कम नहीं होती है?

सर्पी वलय प्रवर्तक

किस मोटर में गति नियंत्रण के लिए सबसे अधिक विस्तृत प्रकार की विधियां होती है?

दिष्ट धारा शंट मोटर

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