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अशोक के अभिलेख

आज इस अर्तिवले में हम आपको अशोक के अभिलेख के बारे में बताने जा रहे है.

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अशोक के अभिलेख

  • सम्राट अशोक के अब तक 40 से भी अधिक अभिलेख प्राप्त हो चुके हैं.
  • यह अभिलेख उसकी साम्राज्य सीमा के निर्धारण के साथ-साथ उसके धर्म एवं प्रशासन संबंधी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी देने में काफी मदद करते हैं.
  • गुर्जरा का लघु शिलालेख और मास्की का लघु शिलालेख केवल यह दो ऐसे धर्मलेख हैं जिनमें अशोक का नाम पाया जाता है.
  • अशोक के अभिलेखों का विवरण तीन वर्गों में किया जा सकता है-
  1. शिलालेख.
  2. स्तंभ लेख
  3. गुहा लेख.

शिलालेख और अभिलेख

अशोक के चतुर्दशी शिलालेख के नाम से प्रसिद्ध है शिलालेख 14 विभिन्न लेखों का एक समूह है जो आठ भिन्न-भिन्न स्थानों से प्राप्त हुए हैं .

  1. शाहबाजगढ़ी, (पेशावर पाकिस्तान में स्थित)
  2. मानसेहरा  (हजारा, पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित )
  3. कालसी (देहरादून, पश्चिम उत्तराखंड में स्थित )
  4. गिरनार (काठियावाड़ , गुजरात में जूनागढ़ के समीप स्थित है)
  5. जौगढ़  (ओडिशा के गंजाम जिले में स्थित)
  6. धौली  ,(उड़ीसा के पुरी जिले में स्थित)
  7. येर्रागुडी (आंध्र प्रदेश के कुर्नुल जिले में स्थित)
  8. सोपारा (महाराष्ट्र के थाना ठाणे जिले में स्थित है)

लघु शिलालेख

यह शिलालेख 14 शिलालेखों के मुख्य वर्ग में सम्मिलित नहीं है और इसलिए इन्हें लघु शिलालेख कहा गया है. यह निम्नलिखित स्थानों से प्राप्त हुए हैं

  1. रूपनाथ (मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले  मैं स्थित)
  2. गुर्जरा (मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित )
  3. सासाराम (बिहार)
  4. भाब्रू  (वैराट, राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित )
  5. मास्की (कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित )
  6. ब्रहाहगिरी (कर्नाटक चितलदुर्गे जिले में स्थित )
  7. सिद्धपुर (ब्रहागिरि से 1 मील पश्चिम में स्थित )
  8. पालकी गुंडू (गवीमठ से 4 मील की दूरी पर कर्नाटक के रायचुर जिले में स्थित )
  9. राजुल मंडगिरि(आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में स्थित )
  10. अहरौरा (उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित )
  • कर्नाटक के गुलबर्गा जिले में स्थित सत्राती नामक स्थान अशोक कालीन शिलालेख प्राप्त हुआ है जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के कर्मचारियों ने जनवरी 1989 में खोजा था.

स्तंभ लेख

अशोक सप्त  स्तम्भलेखा के अंतर्गत लेखों की संख्या हालांकि सात है, परंतु यह 6 भिन्न-भिन्न स्थानों में पाषाण स्तम्भों पर उत्कीर्ण पाए गए हैं. ये है-

दिल्ली- मेरठ

यह पहले मेरठ (उत्तर प्रदेश) में था तथा बाद में फिरोजशाह तुगलक द्वारा से दिल्ली में लाया गया.

लौरिया अरेराज

यह स्तंभ लेख बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में राधिया के पास लौरिया-अरेराज में स्थित है.

रामपुरवा

यह स्तंभलेख भी चंपारण बिहार में पाया गया है.

लघु स्तंभ -लेख

अशोक के राजकीय घोषणाएँ जिन स्तम्भों पर उत्कीर्ण उन्हें साधारण तौर से लघुस्तम्भ में लेख कहा जाता है. यह निम्नलिखित स्थानों से मिलते हैं-

  1. सांची (रायसेना जिला, मध्य प्रदेश)
  2. सारनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
  3. कौशांबी (इलाहाबाद के समीप कोसम, उत्तर प्रदेश)
  4. रुम्मिनदेई (नेपाल की तराई में परारिया ग्राम के समीप)
  5. निग्ललिव् (निगली सागर नामक बड़े सरोवर के तट पर,  नेपाल की तराई में रुम्मिनदेई से लगभग 13 मील पश्चिमोत्तर में स्थित है)
  • कौशांबी के लघु स्तम्भ-लेख में अशोक अपने महामात्रो  को संघ-भेद रोकने का आदेश देता है.
  • रुम्मिनदेई स्तंभ लेख में अशोक द्वारा इस स्थान की धर्म-यात्रा पर जाने का विवरण है.
  • निग्लीव के लेख में कनकमुनि के स्तूप के संवर्धन की चर्चा हुई है.

शिलालेखों- अभिलेखों में उत्कीर्ण महत्वपूर्ण बातें

  • धौली तथा जौगढ़ के अभिलेखों में लिखा है- सभी मनुष्य मेरी संतान है………….
  • गिरनार लेख से पता चलता है कि अशोक ने मनुष्य तथा पशुओं के लिए अलग-अलग चिकित्सालयों की स्थापना करवाई है.
  • रुम्मिनदेई अभिलेख- एकमात्र अभिलेख, जिसमें कराधान की चर्चा है. अभिषेक के 20 में वर्ष में अशोक द्वारा लुंबिनी की यात्रा और वहां का भूमिकर घटाकर 1\8  कर दिया गया.
  • डी आर भंडारकर ने केवल अभिलेखों के आधार पर अशोक का इतिहास लिखा.
  • अशोक के प्राय सभी अभिलेख प्राकृत भाषा में तथा ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं. परंतु शाहबाजगढ़ी तथा मानसेहरा अभिलेख की लिपि खरोष्ठी है, जबकि तक्षशिला तथा लघमान से प्राप्त अभिलेख अरामेइक लिपि में लिखे गए हैं.
  • कंधार के पास शरे-कुना  नामक स्थान से प्राप्त अभिलेख यूनानी तथा अरामाइक की लिपि है.
  • मास्की,  गुर्जरा, नेतृत्व उड़े गोलम के लेखों में अशोक का नाम मिलता है.
  • इलाहाबाद स्तंभ लेख पर अशोक के अतिरिक्त समुद्रगुप्त तथा अकबर के दरबारी बीरबल के अभिलेख मिलते हैं.
  • भाब्रू शिलालेख मैं अशोक ने बौद्ध ग्रंथों में विश्वास प्रकट किया है एवं इसी में अशोक के धम्म का उल्लेख भी मिलता है.

अशोक के स्तंभों में उकेरीत  प्रमुख आकृतियां:

  • बसाढ़ स्तंभ : सिंह,
  • संकिसा : हाथी,
  • रामपुरवा :  सांड,
  • लौरिया नंदनगढ़ : सिंह,
  • सांची : चार सिंह ,
  • सारनाथ : स्तंभ पर गज , बेल, तथा सिंह की आकृतियां उत्कीर्ण है.
  • ब्राह्मी लिपि बाएं से दाएं और खरोष्ठी लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी. परंतु अशोक के एर्रगुडी शिलालेख में ब्राही लिपि दाएं से बाएं लिखी हुई है.
  • पांचवां स्तंभ लेख में अशोक विभिन्न जानवरों के वध करने, जंगल जलाने, एक जीव को दूसरे जीव को खिलाने, निश्चित दिनों में मछली मारने, जानवरों को बधिया करने, पशुओं और घोड़े को दागने पर प्रतिबंध लगाता है. किसी लेख में उल्लेख है कि राज्य अभिषेक के समय से 26 वर्षों तक 25 बार कैदियों को रिहा किया गया है.
  • अशोक का सबसे लम्बा स्तम्भ लेख उसका सातवाँ लेख है. उसका सबसे छोटा लेख रुम्मिनदेई में स्थित है.
  • अशोक साँची, सारनाथ और कौशाम्बी के अपने लघु स्तम्भ लेखो में अपने महामात्रोको संघभेद रोकने का आदेश देता है.
  • अशोक के अभिलेखों की भाषा संस्कृत में होकर पाली थी और यह उस समय आम जनता की  भाषा थी.
  • अशोक के प्रांतों की राजधानी का उल्लेख धौली तथा गोड के शिलालेखों में मिलता है.

शिलालेख विषय

पहला

जानवरों के मारने और निरर्थक उत्सवों पर प्रतिबंध. प्रतिदिन केवल दो मोर और एक हिरण शाही रसोई के लिए मारे जाने का आदेश.

दूसरा

चिकित्सकीय मिशन सभी दिशाओं में भेजे गए,  वृक्ष लगाए, सड़कों का निर्माण करवाया गया और कुएं खोदे गए.

तीसरा

युक्त , राज्जुक  और प्रादेशिक को प्रत्येक पांचवें साल राज्य में निरीक्षण के लिए जाने का आदेश तथा धम्म के प्रसार के कार्य में हाथ बंटाने का आदेश. ब्राह्मणों के प्रति दया और मित्र तथा माता पिता का आदर करना.

चौथा

भेरी घोष का स्थान धम्म घोष द्वारा लिया गया.

पांचवा

शासन के 13 वर्ष में धम्ममहामात्रों की नियुक्ति की गई.

छठा

वह हर समय, कहीं भी और किसी भी मामले के जल्दी निपटारे के लिए उपलब्ध.

सातवां

सभी संप्रदायों के बीच सहिष्णुता का आहान.

आठवां

धम्म यात्राओं का वर्णन, अशोक द्वारा बोधगया की यात्रा.

नौवां

धम्म के अलावा सभी रीतियों व्यर्थ है. धम्म में दासों और नौकरों के प्रति आदर.

दसवां

वह प्रसिद्ध का आकांक्षी नहीं है, लोग सिर्फ धम्म का पालन करें.

ग्यारहवां

दान पर बल

बाहरवां

अशोक द्वारा धर्म की सार बुद्धि पर जोर.

तेहरवां

कलिंग पर विजय, एक लाख मरे और इससे कई गुना लोगों का जीवन तबाह हुआ.

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