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हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज व्यवस्था

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ग्रामीण विकास

हिमाचल प्रदेश में विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन तथा विभिन्न क्षेत्रों के विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना है। राज्य में निम्नलिखित राज्य तथा केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं/कार्यक्रम लागू हो रहे हैं।

स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना

प्रदेश में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना वर्ष 1999-2000 से चलाई गई है। यह योजना एक हॉलिस्टिक पैकेज है जिसमें स्वरोजगार के पहलुओं जैसे स्व-सहायता ग्रुपों में गरीबों का संगठन, प्रशिक्षण, उधार प्रौद्योगिकी, विपणन, तथा संरचना इत्यादि को शामिल करना है। यह योजना उधार व उपदान कार्यक्रम का समायोजन है। एस. जी. एस. वाई. योजना के अंतर्गत उपदान सहायता समान रूप से परियोजना कीमत का 30% होगी। जिसकी अधिकतम सीमा ₹7500 निर्धारित है अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं विकलांग व्यक्ति के परिवारों को 50% तथा प्रति व्यक्ति ₹10,000 या 1.25 लाख रुपए जो भी कम हो उत्पादन के रूप में दिए जाते हैं। एस.जी.एस.वाई. स्कीम गरीब परिवारों में से संवेदनशील परिवारों पर केंद्रित की गई है। स्वरोजगार स्कीम के अंतर्गत 50% अनुसूचित जाति/जनजाति, 40% महिलाएं, तथा 3% विकलांग लाभान्वित होंगे। इस योजना पर खर्च केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा 75.25 अनुपात के आधार पर किया गया है।

राज्य में इस योजना से अभी तक 10,371 स्वयं सहायता ग्रुप बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2009-10 के दौरान दिसंबर 2009 तक 1,142 स्वयं सहायता ग्रुप बनाए गए हैं। 627 ग्रुप, जिनके परिवार 6,223 गरीबी रेखा से नीचे के हैं ने आर्थिक कार्यकलाप का काम आरम्भ कर दिया है। इन ग्रुपों को 496.91 लाख रूपय सहायता अनुदान तथा 1825.83 लाख रूपय ऋण के रूप में दिए गए हैं। इसके अलावा 1,536 व्यक्ति के चारों को एस.जी.एस.वाई. के अंतर्गत सहायता दी गई है। इन स्वरोजगारों को 120.05 लाख रूपय सहायता अनुदान तथा 659.07 लाख रूपये ऋण के रूप में दिए गए हैं। ऋण जुटाने का लक्ष्य जो 2,237.90 लाख रुपए है की तुलना में 2,484.90 लाख रुपए का ऋण 627 स्वयं सहायता समूहों तथा 1,536 स्वरोजगारों को बांटे गए हैं।

स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत विशेष परियोजनाएं

हाईडैम की स्थापना

प्रदेश में भारत सरकार ने स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के विशेष घटक के अंतर्गत 400 हाईडेमो की स्थापना की परियोजना को स्वीकृति दी है जिसकी कुल लागत 1047.20 रुपए है जिसमें 770.48 लाख रुपए उपदान के रूप में तथा 161.40 लाख रूपए ऋण के रूप में तथा 115.32  लाख रूपये लाभार्थी अंश के रूप में शामिल है। उपदान की राशि को भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा 75.25 के अनुपात में खर्च किया जाएगा। सितंबर 2009 तक 268 हाईडैम प्राप्त किए जा चुके हैं, जिनमें से 208 हाईड्रमों की स्थापना पर 414.33  लाख रुपए खर्च हो चुके हैं ।

गोल्ड माइंज परियोजना

प्रदेश में भारत सरकार द्वारा जिला बिलासपुर के लिए स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 840.35 लाख रुपए की लागत से एक गोल्ड माइंज नामक परियोजना स्वीकृत की गयी है, जिसमें 327.76 लाख रूपए उपदान के रूप में तथा 512.59 लाख रुपए ऋण के रूप में शामिल है। उपदान की राशि को भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा 75.25 के अनुपात में व्यय किया जाएगा। इस परियोजना के अधीन तीन मुख्य गतिविधियां, पुष्प उत्पादन, रेशम उत्पादन तथा खुम्ब उत्पादन शामिल है। सितंबर 2009 तक 271.31 लाख रूपए सहायता के रूप में एवं 416.76 लाख रूपय ऋण के घटक के रुप में खर्च किए जा चुके थे तथा 770 लाभार्थियों को पुष्प उत्पादन, रेशम उद्योग तथा मशरूम की खेती से लाभ पहुंचाया गया है।

ग्रामीण वस्तुओं का विपणन

प्रदेश में भारत सरकार द्वारा सुकृत इस परियोजना की कुल लागत 914.52  लाख रुपए है जिसमें 759.52 लाख रूपय उपदान के रूप में तथा 145.00 लाख रूपय ऋण के रूप में शामिल है। उपदान की राशि भारत सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा.75.75  के अनुपात में खर्च। इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में 50 हिमाचल ग्रामीण भंडारों तथा एक केंद्रीय ग्रामीण भंडार का निर्माण किया जाएगा। सितंबर 2009 तक 24 ग्रामीण भंडारों का कार्य निर्माण पूरा कर लिया गया है। 8 ग्राम भंडारों का कार्य प्रगति पर है। जिन पर 350.46  लाख रूपय खर्च हो चुके हैं।

मिल्व लाइव स्टोक इंप्रूवमेंट

जिला सोलन में भारत सरकार ने 886.95 लाख रुपए की लागत से एक मिल्व लाइव स्टोक इंप्रूवमेंट परियोजना स्वीकृति की है जिसमें 705.15 लाख रूपए उत्पादन के रूप में तथा 171.80 लाख रुपए ऋण के रूप में शामिल है। उपदान की राशि को भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा 75.25 के अनुपात में व्यय किया जाएगा। इस परियोजना के अधीन में दुग्ध उत्पादन गतिविधियों को विकसित किया जाएगा। अभी तक इस परियोजना के कार्यन्वयन डी.आर.डी.ए. सोलन को 572.61 लाख रुपए दिए जा चुके हैं और सितंबर 2009 तक 368.62 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

कृषि में विविधकरण द्वारा ग्रामीण विकास

राज्य में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 1,385.32 लाख रुपए की लागत से यह परियोजना स्वीकृत की गई है जिसमें 1204.00 लाख रुपए अनुदान के रूप में और एक 181.32 लाख रुपए ऋण के रूप में सम्मिलित है। उपदान की राशि भारत सरकार द्वारा 75.25 के अनुपात में व्यय की जानी है। अभी तक इस परियोजना के अधीन मेडिसिन एंड एरोमेटिक प्लांट्स, फूल तथा बगीचे वाले विभिन्न प्रकार के पौधों का विकास, रेशम उत्पादन, पशुपालन की उत्तम तकनीकी पर चलना आदि गतिविधियों को विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के कार्य हेतु जिला मंडी को 963.20  लाख रुपए दिए जा चुके हैं जिसमें से सितंबर 2009 तक 781.21 रुपए गया हो चुके हैं।

रेशम उत्पादन व डेरी विकास द्वारा आत्मनिर्भरता

जिला हमीरपुर के लिए भारत सरकार द्वारा 1,499.90 लाख रुपए जिसमें 981.00 लाख रूपए सहायता के रूप में एवं 519.00 लाख रुपए ऋण के घटक के रूप में है, की लागत से रेशम व डेरी विकास हेतु यह परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। उपदान की राशि भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा 75.25  के अनुपात में व्यय की जानी है। अभी तक इस योजना के कार्यान्वयन हेतु जिला हमीरपुर को 872.84 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। जिसमें सितंबर 2009 तक 848.11 लाख रूपय सहायता के रूप में एवं 475.20  लाख रुपए ऋण के घटक के रूप में व्यय हो चुके हैं।

ग्रीन गोल्ड

भारत सरकार द्वारा मेडिसिनल प्लांट्स, एरोमेटिक प्लांट्स, फल व बगीचे फूलों वाले विभिन्न प्रकार के पौधे, गेर मौसमी सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन तथा इंप्रूव्ड डेरी मैनेजमेंट हेतु जिला चंबा के लिए 1488.73  लाख रूपय जिसमें 1361.23 लाख रूपय सहायता के रूप में एवं 127.50 लाख रूपय ऋण के घटक के रूप में तथा लाभार्थी एस के रूप में की लागत युक्त यह परियोजना स्वीकृत है। उत्पादन की राशि भारत सरकार तथा प्रदेश सरकार द्वारा 75.25  के अनुपात में व्यय की जाएगी। अभी तक इस परियोजना के कार्यान्वयन हेतु जिला चंबा को 1088.90 लाख लाख रुपए मुहैया कराए गए हैं जिसमें से सितंबर 2009 तक 857.35 लाखों रुपए व्यय हो चुके हैं।

इन्टेंसिव डेरी डेवलपमेंट

जिला कांगड़ा के लिए भारत सरकार द्वारा 1,301.25  लाख रुपए की लागत के इंटेसिव डेयरी डेवलपमेंट नामक एक परियोजना जिसमें 1151.40 लाख रूपये सहायता के रूप में एवं 149.85 लाख रूपय ऋण के घटक के रूप में तथा लाभार्थी अंश के रूप में स्वीकृत की गई है। उपदान की राशि भारत सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा 75.25 के अनुपात में व्यय की जानी है। इस परियोजना को लागू करने के लिए कांगड़ा जिले के ग्रामीण विकास अभिकरण को 921.12 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। जिसमें से 721.98 लाख रुपए सितंबर 2009 तक व्यय हो चुके हैं।

मेडिसिनल प्लांट्स, एरोमेटिक प्लांट्स की कृषि, मूल्य वृद्धि, विधायक विपणन (राज्य स्तरीय)

भारत सरकार नहीं है प्रयोजनों विकास खंडो जैसे- मशोबरा,  रामपुर, चिरगांव, पच्छाद,बंजार, कुल्लू, तिस्सा, बम्सन और अम्ब के लिए स्वीकृत की है। इस प्रयोजना की कुल लागत मूल्य 1448.35  लाख रुपए है। यह परियोजना बायोटेक विभाग द्वारा कार्य निर्मित की जा रही है तथा इसके लिए मूल्य 300.61 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। सितंबर 2009 तक मूल्य 56.19  लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।

ग्रामीण विकास की कुशलता का विकास- ग्रामीण लैबस (राज्य स्तरीय)।

राज्य में भारत सरकार द्वारा यह परियोजना मूल्य 250.00 लाख रुपए से स्वीकृत की गई है। अभी तक इस परियोजना के अंतर्गत मूल्य 100.00 रुपए प्राप्त हो चुकी है जिसमें सितंबर 2009 तक मूल्य 100.00  लाख रुपए व्यय कर दिए गए हैं। यह प्रिज्मा डॉ रेड्डीज फाउंडेशन हैदराबाद द्वारा लागू की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत सितंबर 2,096 से नीचे रहने वाले ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा ग्रामीण युवकों को रोजगार प्रदान किया गया है।

वाटरशैड

राज्य में इस परियोजना के अंतर्गत तीन परियोजनाएं क्रमश: एकीकृत वाटरशैड विकास कार्यक्रम सूखाग्रस्त क्षेत्र कार्यक्रम तथा मरुस्थल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम के प्रारंभ से 2009-10 (दिसंबर 2009) तक एकीकृत बंजर कार्यक्रम के अंतर्गत 67 परियोजनाएं (876 माइक्रो वाटर शेड) जिनकी कुल लागत मूल्य 254.12 करोड रुपए है तथा 452311 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाना प्रस्तावित है। सूखाग्रस्त कार्यक्रम के अंतर्गत थे कार्यक्रम के प्रारंभ से वर्ष 2009-10 (दिसंबर 2009) तक 412 सूक्ष्म जलागम स्वीकृत है जिनकी कुल लागत मूल्य 116.50  लाख रुपए तथा 205833 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाना प्रस्तावित है। मरुस्थल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यक्रम के प्रारंभ से दिसंबर 2009 तक के 552 सूक्ष्म जलागम जिनकी कुल लागत मूल्य 159.20 करोड रुपए है तथा 212770 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाना प्रस्तावित है जिसकी तुलना में आई.डब्ल्यू.डी.पि. परियोजना के अंतर्गत ए 176.90 करोड, डी.पी.ए.पी. के अंतर्गत से 67.52 करोड रुपए देता डी.डी.पी. के अंतर्गत से 80.99  करोड रुपए दिसंबर 2009 तक खर्च किए गए हैं।

इंदिरा आवास आवास योजना

इंदिरा आवास योजना केंद्रीय प्रायोजित योजना है। इस योजना के अंतर्गत बी.पी.एल. लाभभोगी को ₹38,500b रुपए प्रति परिवार नए मकान बनाने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा द्वारा किया जा रहा है। केंद्र तथा राज्य सरकार 75.25 के अनुपात में गाना पर खर्च करती है। वर्ष 2009-10 में 8212 नए मकानों के निर्माण का लक्ष्य है, तथा दिसंबर 2009 तक 4,222 नए मकान बनाए गए तथा शेष मकान बनाने का कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना के अधीन दिसंबर 2009 तक 1,768.68 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना

राज्य में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार के रोजी-रोटी कमाने वाले व्यक्ति की यदि मृत्यु हो जाती है तो शोक सतृप्त परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2009-10  में जिलों को मुआवजा ₹9700000 दिसंबर 2009 तक जिलों को निर्मुक्त कर दिए गए हैं।

अटल आवास योजना

राज्य में यह योजना इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर चलाई जा रही है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले ग्रामीण गृहहिन परिवारों को आवास सुविधा प्राप्त हो सके, इसके लिए सरकार ने 1.4.2008 को अटल आवास योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को गृह निर्माण हेतु ₹38500 दिए जाते हैं जबकि इससे पहले चलाई जा रही प्रायोजित योजना के अंतर्गत राशि ₹27500 थी। दिसंबर 2009 तक 5,175 नये आवास निर्माण के लक्ष्यों की तुलना में समस्त गृहों को लाभार्थियों को स्वीकृत किया जा चुका है, 2,314 मकानों का निर्माण किया गया है तथा शेष मकान निर्माणधीन है तथा इन पर 1,196.18 लाख रूपय खर्च हो चुके हैं।

पूर्ण स्वच्छता कार्यान्वयन परियोजनाएँ

प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की समस्त स्वच्छता के दृष्टिगत विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में पूर्ण स्वच्छता अभियान परियोजनाओं को लागू कराया जा रहा है। इस परियोजना को जो प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जानी है केंद्र सरकार ने जब से योजना शुरू की है तब से दिसंबर 2009 तक 47.87  करोड रुपए की धनराशि जारी कर दी है जिसमें से दिसंबर 2009 तक 36.35 करोड रुपए इस परियोजना में व्यय हो चुके हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

सितंबर 2005 में संसद द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया है। इस अधिनियम में ग्रामीण क्षेत्रों में गृहस्थियों की आजीविका की सुरक्षा को प्रत्येक ऐसी गृहस्थी की जिसके व्यस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 100  दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने का प्रावधान है। यह अधिनियम-2 फरवरी 2006 से उन जिलों में लागू माना जाएगा जिन्हें भारत सरकार ने नामित किया है, हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा और सिरमौर को इस योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में लाया गया था। 1 अप्रैल, 2007 से द्वितीय चरण में जिला कांगड़ा व मंडी को भी इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।1.4.2008 से शेष 8 जिलों को भी इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। वर्ष 2009-10 में दिसंबर 2009 तक भारत सरकार द्वारा 33177.61 लाख रुपए प्रदेश के संपूर्ण जिलों को जारी किए जा चुके हैं जिसके विरुद्ध प्रदेश सरकार के राज्यपाल के रूप में 2599.69 लाख रुपए भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत जिलों के पास मूल्य 49271.60 लाख रूपय उपलब्ध है जिसमें 16820.88  लाख रूपए आरंभिक शेष के रुप में सम्मिलित हैं। दिसंबर 2009 तक मूल्य 35268.51 लाख व्यय किए जा चुकी है तथा 179.84 लाख दिवस सृजित किए गए तथा 39,3083 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

पंचायतीराज व्यवस्था

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 12 जिला परिषद, 77 पंचायत समितियां तथा 3,243  ग्राम पंचायतें हैं। 73वें संशोधन के कारण भारतीय संविधान के अनुसार पंचायतीराज संस्थाओं को हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज एक्ट में समय-समय पर किए गए प्रावधानों के अनुरूप विभिन्न शक्तियां और कार्य सौंपे गए हैं। ग्राम सभाओं को विभिन्न कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थियों के चयन की शक्तियां प्रदान की गई हैं।  पंचायती राज संस्थाओं को सरकार ने और अधिकार व कार्य सोंपें जिनमें तकनीकी सहायक पंचायत सहायक अध्यापिका पंचायत चौकीदार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/ साईं का अंशकालीन जलवाहक नियुक्ति आदि शामिल है। कनिष्ठ अभियंता एवं लेखापाल के खाली पद पर अनुबंध के आधार पर कनिष्ठ अभियंता तथा लेखापाल लिपिक आशुटंकण की नियुक्ति का अधिकार ग्राम पंचायत समिति को तथा सहायक अभियंता  विकास की नियुक्ति का अधिकार जिला परिषद को प्रदान किया गया है। ग्राम सभा को ग्राम पंचायत की योजना तथा परियोजना का अनुमोदन करने तथा ग्राम पंचायत द्वारा विभिन्न कार्यों में खर्च की गई धनराशि से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। पंचायती राज संस्थाओं को समस्त प्राथमिक पाठशाला भवनों का स्वामित्व सौंपा गया है। ग्राम पंचायतों को भूमि मालिक कों से भूरा को एकत्रित करने की शक्ति प्रदान की गई है तथा इकट्ठे राशि के उपयोग करने के बारे में पंचायत स्वयं फैसला लेगी।  ग्राम पंचायतों को आय बढ़ाने वाले परिसंपत्तियों के सर्जन हेतु बिना सरकार के पूर्व अनुमति के ऋण प्राप्त करने , विभिन्न प्रकार के कर, शुल्क एवं जुर्माना आदि के लिए शक्ति प्रदान की गई है। ग्राम पंचायतों द्वारा ऋण हुआ है इससे पूर्व ग्राम सभा का अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है। मोबाइल टावर लगाने एवं शुल्क अधिरोपित करने के लिए ग्राम पंचायतों को अधिकार दिए गए हैं। किसी भी तरह के खनिज के खनन के लिए जमीन पट्टे पर देने से पूर्व संबंधित पंचायत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है ।

ग्राम पंचायत को दंड प्रक्रिया संहिता धारा 125 के अधीन गुजारा भत्ता के लिए ₹500 प्रति माह तक गुजारा भत्ता प्रदान करने हेतु आदेश देने की शक्ति प्राप्त है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक रुपए प्रति बोतल की दर से शराब की बिक्री पर शेष ग्राम पंचायतो हस्तांतरित किया गया है और इस से प्राप्त निधि को है विकास कार्यों के कार्य नमन पर खर्च करेगी।

यह अनिवार्य किया गया है कि कृषि पशुपालन प्राथमिक शिक्षा, वन, स्वास्थ और परिवार कल्याण, बागवानी, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, राजस्व और कल्याण विभाग के गांव सत्र में कृत्य कारी, उस ग्राम की बैठकों में भाग लेंगे जिस की अधिकारिता में वे तैनात हैं और यदि ऐसे गांव सत्र के कृत्य कारी बैठकों में उपस्थित नहीं होते हैं तो ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के माध्यम से उनके नियंत्रण अधिकारी को मामले की रिपोर्ट करेगी, जो रिपोर्ट प्राप्त होने की तारीख से 1 मार्च के अंदर ऐसे कृत्य कार्यों को के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा और ऐसी रिपोर्ट पर की गई कार्यवाही के बारे में ग्राम पंचायत के माध्यम से ग्राम सभा को सूचित करेगा।

पंचायती राज संस्थाओं के हंसता रेत प्रमुख कार्य का विवरण निम्नानुसार है-

ग्राम पंचायत के प्रधानों को नियम- 11 हिमाचल प्रदेश नियम, 1978 के अंतर्गत 1 उत्पादित 37 प्रजातियां के निगम के लिए परमिट जारी करने के लिए वन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

महिलाओं को स्वस्थ करने हेतु पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% है आरक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त महिला शक्ति अभियान को भी आरंभ कर दिया गया है जिस से उनकी क्षमता में वृद्धि होगी।

ग्राम पंचायत के उपप्रधान के प्रत्येक निर्वाचन का प्रावधान भी किया गया है।

सरकार ने पंचायतों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने हेतु योजना प्रारंभ की है तथा इसे योजना के अंतर्गत पंचायतों द्वारा शुद्ध अतिरिक्त स्रोतों को सृजित करने से प्राप्त राशि के बराबर राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त देशों द्वारा स्वच्छता, तरल\ठोस  कूड़ा प्रबंधन तथा स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत अर्जित की गई राशि के बदले में दोगुनी राशि प्रदान की जाएगी। वर्ष 2011 और 2012 में 15.1 करोड रुपए का बजट प्रावधान किया गया है।

पंचायती राज पदाधिकारियों को दिए जाने वाले मासी की दरों में राज्य सरकार ने दिनांक 1 अप्रैल 2014 से बढ़ोतरी की है।’ मनुष्य की संशोधित दरों के अनुसार अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष जिला परिषद को ₹6500 तथा ₹4500 प्रति मास अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से पंचायत समिति को ₹3800 तथा ₹2400 प्रति माह तथा प्रधान प्रधान ग्राम पंचायत समिति को ₹2100 एवं ₹1800 प्रति माह से मानदेय प्रदान किया जा रहा है।इसके अतिरिक्त सदस्य जिला परिषद सदस्य पंचायत समिति के मानदेय की संशोधित दरें क्रमश ₹2400 की ₹2100 प्रतिमाह कर दी गई है। और ग्राम पंचायत के सदस्यों को मास में अधिकतम दो बैठकों में भाग लेने हेतु फीस की दर को ₹200 प्रति बैठक कर दिया गया है।

राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पदाधिकारियों को, पंचायत से संबंधित कार्य करने हेतु भ्रमण के लिए, दैनिक एवं यात्रा भत्ते की अदायगी हेतु अनुदान प्रदान है करने का फैसला किया गया।

राज्य सरकार ने सरकारी विश्रामगृह में जिला परिषद तथा पंचायत समिति के पदाधिकारियों को भ्रमण के दौरान ठहरने की सुविधा प्रदान की है। सरकार ने पंचायत चौकीदारों को वर्दी उपलब्ध करवाने हेतु मूल्य ₹40 प्रति वर्ष का अनुदान प्रदान करने का फैसला लिया है और इस वित्त वर्ष में ग्राम पंचायत को इस मद में मूल्य 27.24 लाख रूपय से बढकर 3.40 लाख रुपए कर दिया गया है। चालू वित्त वर्ष से ग्राम पंचायत को संशोधित मापदंडों के अनुसार राशि उपलब्ध कराई जा रही है और इस वर्ष के दौरान संशोधित मापदंडों के आधार पर 130 ऐसी ग्राम पंचायतों, जिनमें पंचायत घर निर्मित नहीं थे, 4.42  करोड रुपए की राशि पंचायत घर निर्माण के लिए उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त 1.0 करोड रुपए की राशि 100 ऐसी ग्राम पंचायतों को प्रदान की गई है जिन का गठन वर्ष 2005 में किया गया है। और जिन्हें पुराने मापदंडों के आधार पर पंचायत घर निर्माण हेतु ₹200000 प्रति ग्राम पंचायत है किधर से दिए गए थे। इसके अलावा ग्राम पंचायत को अतिरिक्त भवन निर्माण हेतु ₹100000 प्रति पंचायत चरणबद्ध ढंग से उपलब्ध कराए जा रहे हैं और चालू वित्त वर्ष में मूल्य 6.30 करोड रुपए की राशि 630 ग्राम पंचायतों को इसे प्रयोजन के लिए प्रदान की जा चुकी है।

सरकार ने फैसला लिया है कि पंचायत समिति के कार्यालय को अपग्रेड करने व बैठक कक्ष एवं अध्यक्ष पंचायत समिति के कार्यालय के लिए फर्नीचर हेतु मूल्य ₹2 लाख प्रति पंचायत समिति के दर से उपलब्ध किए जाएंगे जिसके लिए 1.50  करोड रुपए का प्रावधान किया गया है और चालू वित्त वर्ष से अब तक ₹9800000 की राशि 49% समितियों को इस प्रयोजन के लिए उपलब्ध कराई जा चुकी है।

पंचायत सहायकों का मासिक श्रमिक मूल्य ₹2340 से बढ़ाकर ₹3120 कर दिया गया है। पंचायत सहायकों सचिव पंचायत कार्यों के निष्पादन के लिए भी अधिकृत किया गया है और उन्हें ग्राम पंचायत निधि के संचालन हेतु वित्तीय शक्तियां दी गई है। पंचायत क्षेत्र के लोगों को प्रतिदिन सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से पंचायत सहायक या पंचायत सचिव की प्रत्येक पंचायत उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए 225 पंचायत सहायकों के नए पद सृजित किए गए हैं।

पंचायतों को पदोन्नति करने की  दृष्टिगत यह फैसला लिया गया है कि वरिष्ठ पंचायत सहायकों को अनुरोध के आधार पर पंचायत सचिव पदोन्नत किया जाएगा। ईश्वर से 260 पंचायत सहायकों को अनुबंध के आधार पर पंचायत सचिव पदोन्नति करके उन्हें मूल्य ₹4680 मस्ती की परी श्रमिक दिया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को उनकी पंचायतों में भूमिका एवं दायित्वों के दृष्टिगत प्रशिक्षण प्रदान किया जाना आवश्यक है। प्रभावी रूप से प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए यह जरूरी है कि आवश्यक प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया जाए। श्री सरकार ने फैसला लिया है कि पंचायती राज संस्थान बैजनाथ के भवन जहां मंडल कांगड़ा तथा मंडल मंडी के कुछ भाग के निर्वाचित पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है को अपग्रेड किया जाएगा। प्रशिक्षण संस्थान बैजनाथ के अपग्रेडेशन के लिए मूल्य 230 करोड रुपए की राशि 2 वर्षों में उपलब्ध करा दी जाएगी तथा चालू वित्त वर्ष में इसी प्रयोजन हेतु मूल्य 1.15  करोड रुपए की राशि चिन्हित की गई है।

पंचायत समिति में अनुबंध के आधार पर कनिष्ठ अभियंताओं के 40 नए पदों का सृजन किया गया है।

पंचायत समिति द्वारा अनुबंध पर नियुक्त अभिनेताओं को जिन्होंने 8 वर्ष कार्यकाल दिनांक 31.3.2008  तक बनने हेतु लिया है कि सेवाओं को जिला परिषद के अंतर्गत नियमित कर दिया जाएगा।

पंचायतों को तकनीकी सुविधा प्रदान करने के दृष्टिगत 840 तकनीकी सहायक नियुक्ति किए गए हैं तथा दो से 5 पंचायतों हेतु एक तकनीकी सहायक का सर्कल तैयार किया गया है तथा इन्हें मूल्य ₹50000 से 1।50 लाख तक के मूल्यांकन करने को अधिकृत किया गया है।

सरकार ने मनाली में 5 मंजिला पंचायत भवन निर्मित करने का फैसला किया है जिसको बनाने हेतु 69.85  लाख रुपए की धनराशि खर्च होगी।

पंचायती राज व्यवस्था

  1. हिमाचल प्रदेश में तीन चक्र पंचायती राज संस्थाओं का गठन किया गया है- ग्राम स्तर पंचायत,विकासखंड छतरपुर पंचायत समिति और जिला स्तर जिला परिषद।
  2. हिमाचल प्रदेश में सर्वप्रथम पंचायतों की स्थापना पंचायत अधिनियम, 1952 के अधीन की गई। इसके पश्चात हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज अधिनियम, 1968 पास किया गया जो वर्तमान में लागू है। इस अधिनियम में भी 1987 में काफी संशोधन किए गए हैं। और का गांवों के उन सभी व्यक्तियों के ग्राम सभा होगी जिनकी आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो।
  3. 1 ग्राम सभा बनाने के लिए कम से कम जनसंख्या 1000 और अधिक से अधिक 5000 होनी चाहिए। प्रत्येक ग्राम सभा अपने सदस्य में से अपने लिए 1 ग्राम पंचायतों चुनेगी।
  4. ग्राम पंचायत के 1 प्रधान और एक उप प्रधान सहित 7 से 11 सदस्य होंगे जिनका चुनाव ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा गुप्त मतदान के द्वारा किया जाएगा।
  5. महिला या हरिजन सदस्य चुने जाने या कम चुने जाने पर सभी क्लब का प्रावधान किया गया है। उस ग्राम सभा के लिए उनकी जनसंख्या 2000 से कम हो ग्राम पंचायत के 7 सदस्य होंगे 1200 से 3500  तक की जनसंख्या वाली पंचायत के लिए 9 और इससे ऊपर जनसंख्या वाले पंचायत के लिए 11 सदस्य होंगे यह ग्राम पंचायत के लिए चुनी जाएगी।
  6. ग्राम पंचायत में महिलाओं को 30% आरक्षण देने का प्रावधान है।
  7. ग्राम पंचायत जहां अपने क्षेत्र में विकास कार्यों का प्रबंध देख रहे थे करेगी वही उसे सिविल और अपराधिक शक्तियां भी दी गई है।वह ₹500 के विवादों का फैसला करके डिग्री दे सकती है।
  8. भारतीय दंड संहिता में वर्णित है, उन अपराधियों को जो हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1968 में दर्शाए गए हैं, ग्राम पंचायती सुन सकती है और जुर्माने की सजा भी दे सकती है।
  9. प्रदेश में खंड स्तर पर पंचायत समिति गठित की जाती है। इसके लिए दो पंचायत ने मिलकर एक प्रतिनिधि भेज दी है ।क्षेत्र के विधानसभा सदस्य से संबंध होते हैं कुछ अधिकारी एस के पदेन सदस्य होते हैं।
  10. पंचायत समिति के सदस्य गुप्त मतदान द्वारा ढाई साल के लिए एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुनते हैं। संमब्द्ध और पदेन सदस्य वोट नहीं डाल सकते हैं।
  11. जिला छतरपुर जिला परिषद का गठन किया जाता है प्रत्येक पंचायत समिति का अध्यक्ष 40 से कम पंचायतों वाली पंचायत समिति का एक और इससे अधिक पंचायतों वाली पंचायत समिति के दो (गुप्त मतदान से निर्वाचित है) प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं। इसके साथ ही जिले के विधानसभा सदस्य, लोकसभा एवं राज्यसभा के सदस्य एवं जिला देश के अन्य सदस्य होंगे, परंतु इन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा।
  12. जिला परिषद भी एक सदस्य व उपाध्यक्ष ढाई साल के लिए चुनती है।
  13. इस समय हिमाचल प्रदेश में बारा जिला परिषद,77  पंचायत समिति एवं 3243 ग्राम पंचायत है।
  14. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम तथा हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत राज्य सरकार के 15 विभागों से संबंधित कार्य, शक्तियां एवं उत्तरदायित्व पंचायती राज संस्थाओं को स्थानांतरित किए गए हैं।
  15. पंचायतों को विभिन्न सार्वजनिक निर्माण जैसे- पाठशाला में कमरों का निर्माण, रास्ते, सिंचाई तथा पेयजल योजना तथा नालियों का निर्माण इत्यादि सौंपे गए हैं। जिसके लिए पंचायतों को पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाता है। पंचायती राज संस्थाओं को सरकार ने और अधिकारियों पर हैं, जिम में प्राथमिक पाठशाला में ग्राम विद्या उपासक की नियुक्ति पंचायत सहायक सिलाई अध्यापिका, तकनीकी, पंचायती, चौकीदारी, आंगनवाड़ी, कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायक, प्राथमिक पाठशाला में अशकालिक जलवा आदि शामिल है।
  16. लिपिक, आशुटकक के रिक्त  पद पर अनुबंध के आधार पर कनिष्ठ लेखपाल की नियुक्ति का अधिकार पंचायत समिति को तथा सहायक अभियंता (विकास) की नियुक्ति का अधिकार जिला परिषद को दिया गया है। सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय पंचायती राज संस्थाओं द्वारा दिया जाएगा।
  17. ग्राम  सभा को सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे- गृह निर्माण हेतु अनुदान, इंदिरा आवास योजना तथा पेंशन योजना इत्यादि के लिए लाभार्थियों के चयन हेतु सशक्त किया गया है।
  18. पंचायती राज संस्थाओं को समस्त प्राथमिक पाठशाला भवनों व हेड पंपों  का स्वामित्व सौंपा गया है। इन भवनों के रख रखाव एवं मरम्मत की जिम्मेदारी भी ग्राम पंचायतों की होगी।
  19. पंचायती राज संस्थाओं को प्रथम वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार धन उपलब्ध कराया जा रहा है।

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