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जीवाणु की वजह से होने वाले मानव रोग

आज इस आर्टिकल में हम आपको जीवाणु की वजह से होने वाले रोगों के बारे में बताएँगे और उनके वजह से कौन से अंग सबसे ज्यादा प्रभावित होते है और उन रोगों से कौन कौन से लक्षण देखने को मिलते है.

जीवाणु की वजह से होने वाले मानव रोग

निमोनिया किसकी वजह से होता है?

डिप्लोकोकस न्युमोनी नामक जीवाणु के वजह से होता है और इसमें हमारे फफडे बहुत ज्यादा प्रभावित होता है. इस रोग में फेफड़ो में संक्रमण, फेफड़ों में पानी भर जाना, बहुत तेज बुखार होना और सांस लेने में दिक्कत होना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

टिटनेस किसकी वजह से होता है?

यह क्लोस्ट्रीडियम टिटेनी, बैसील्स टिटेनी नामक जीवाणु की वजह से होता है. इसमें हमारा तंत्रिका तंत्र और मासपेशियों बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. इसके होने पर शरीर में झटके लगना, जबड़ा खुला रहना और बेहोशी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

बाट्युलिज्म किसकी वजह से होता है?

यह क्लोस्ट्रीडियम बाट्युलिज्म जीवाणु की वजह से होता है और इसमें भी हमारा तंत्रिका तंत्र और सांस प्रणाली प्रभावित होती हैं. इसकी वजह से साँस लेने में दिक्कत और एक वस्तु का दो दिखने जैसे लक्षण देखने को मिलते है.

मियादी बुखार किसकी वजह से होता है?

यह सालमोनेला टाइफी नाम के जीवाणु की वजह से होता है. जिसमें हमारी आंते बहुत ज्यादा प्रभावित होती है और इसमें बुखार, दुर्बलता, अधिक प्रकोप होने पर आंतो में छेद हो जाना जैसे लक्षण देखे जाते हैं.

कुष्ट रोग किसकी वजह से होता है?

यह माइक्रोबैकीटरियम लेप्री की वजह से होता है. इसमें हमारी लवा और तंत्रिका तंत्र बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. जिससे हमारे शरीर में गांठे बन जाना, हाथ और पैर के उतको का धीरे-धीरे नष्ट होना जैसे लक्षण पाए जाते हैं.

श्रय रोग किसकी वजह से होता है?

यह रोग टयुबराकुलोसिस की वजह से होता है. जिसमें हमारे शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होते हैं और इसमें सबसे ज्यादा फफडे प्रभावित होते हैं. जिस से तेज बुखार, खांसी, दुर्बलता, सांस फूलना, बलगम आना और बलगम के साथ खून का आना जैसे लक्षण देखे जाते हैं.

हैजा किसकी वजह से होता है?

यह रोग विब्रीओ कोलरे की वजह से होता है. इसमें हमारी आंते बहुत ज्यादा प्रभावित होती है और इसकी वजह से निर्जलीकरण, वमन, दस्त और तेज बुखार जैसी समस्या देखने को मिलती है.

डिप्थीरिया किसकी वजह से होता है?

यह रोग कोरिनोबैक्टीरियम डीपथेरी की वजह से होता है. जिसमें हमारे स्वास नली बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. जब हम सांस लेते हैं तो इसमें बहुत ज्यादा पीड़ा होती है और हमारा दम घुटने जैसे लक्षण भी इसमें देखने को मिलते हैं.

काली खांसी किसकी वजह से होता है?

यह रोग हेमोफिलस परटूसिस की वजह से होता है. जिसमें हमारा स्वास तंत्र बहुत ज्यादा प्रभावित होता है. इसकी वजह से निरंतर खांसी आने जैसे लक्षण देखने को मिलते है.

सिफिलस किसकी वजह से होता है?

यह रोग ट्रेपोनीमा पेलेडियम की वजह से हो जाता है और इसमें हमारा मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और प्रजनन अंग बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. इसकी वजह हमारे प्रजनन अंग के आसपास चक्के बन जाना, लकवा और त्वचा के ऊपर दाने होने जैसे लक्षण देखे जाते है.

प्लेग किसकी वजह से होता है?

यह पासटयुरेला पेसिट्स की वजह से होता है जिसमें हमारे का काख, फफडे और लाल रक्त कणिका बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. जिसकी वजह से तेज बुखार, काख में गिलटी बनना और बेहोशी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

मेनिनजाइटिस किसकी वजह से होता है?

यहां रोग निसिरिया मेनिनजाइटिस की वजह से होता है. इसमें हमारे मस्तिष्क के ऊपर झिल्लियाँ और मस्तिष्क बहुत ज्यादा प्रभावित होता है जिसकी वजह से तेज बुखार और दिमाग में सूजन जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

जीवाणु की रोकथाम के लिये टिकाकरण

  • टिटनेस के बचाव के लिए पेनिसिलिन प्रतिजैविक का इंजेक्शन लेना चाहिए. बचाव के लिए ATS का इंजेक्शन तीन बार लेना चाहिए. बच्चे को डीपीटी का टीका लगवाना चाहिए.
  • टिटनेस का अंतिम अवस्था लॉक-जा है यह बैसील्स टिटेनी नामक जीवाणु से होता है जो अधिकांश जंग लगे लोहे पर, घोड़े की लीद या मल में पाया जाता है. इस रोग को धनुष्टंकार भी कहा जाता है.
  • हैजा से बचाव के लिए पीने के पानी में ट्रॉपिकल क्लोराइड तथा चुना अथवा क्लोरोजन से पानी को शोधित करना चाहिए.
  • टाइफाइड से बचाव के लिए बच्चों को TAB का टीका लगवाना चाहिए.
  • नवजात शिशु को तीन टिके लगाये जाते हैं. उसे कुकुर खांसी, टिटनेस और डिप्थीरिया के प्रतिरक्षित करने के लिए दिया जाता है यह जीवाणु जनित रोग है.
  • श्रय रोग के औषधियों के रूप में स्ट्रेपटोमाइसिन, PAS,आइसोनिजाड का उपयोग किया जाता है. बचाव के लिए BCG का टिका लगवाना चाहिए.
  • डिप्थीरिया से बचाव के लिए डीपीटी का टीका लगाया जाता है.
  • प्लेग के उपचार के लिए स्ट्रेपटोमाइसिन की दवाई दी जाती है. बचाव के लिए जिंक सल्फेट, DDT बेन्जिना हेक्सा क्लोराइड का छिडकाव करना चाहिए.
  • कोढ़ के लिए डेपसोन, क्लोफाजिमिन और रैफेमिसिन ओषधि का उपयोग किया जाता है.
  • काली खांसी से बचने के लिए DPT का टिका लगवाया जाता है.

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