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मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण खनिज भंडार


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अग्नि मिट्टी अधिकतम कोयले की खानों में मिलती है तथा 1600 फै. तक नहीं जलती है। वर्तमान में जबलपुर, पन्ना तथा शहडोल में साउथ खनन होता है। कठोरता की दृष्टि से हीरे के बाद आने वाला कोरडम एलुमिनियम का प्राकृतिक ऑक्साइड है। इसका उपयोग समतल शीशे और क्वार्टरज सतह आदी के घिसने में होता है। मध्यप्रदेश में कोरडम सीधी जिले में मिलता है।

1725 के पूर्व विश्व में भारत हीरो का एकमात्र उत्पादक तथा वितरक रहा था। भारत के उत्पादक क्षेत्रों में विंध्या प्रदेश महत्वपूर्ण रहा है। यह हीरे की खाने दो समांतर पेटियों में है। जो उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिमी तक विस्तृत है। सर्वाधिक प्रमुख पेटी पन्ना जिले में कोटरिया से मझगांव सतना जिले तक फैली हुई है। यहां हीरे का कुल अनुमानित भंडार 10.01 लाख कैरेट का है। सतना की मंझगांव खदानों में प्रत्येक 100 टन चट्टान में 11.7 कैरेट हीरे मिलते हैं।

गेरू में हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड होती है, जो चिकनी मिट्टी या महीन बालों के साथ मिली होती है। मध्यप्रदेश में प्राचीन काल से ही गैर उत्खनन का कार्य होता रहा है एवं अभी मध्य प्रदेश भारत में अग्रणी है। पन्ना, सोहाकल, नागौर तथा कोठी गैरु के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। कांच बनाने के क्वार्टज अथवा सिलिका बालू का उपयोग होता है। अति उत्तम बालू में 99% से अधिक सिलिका होती है। रीवा व मुरैना में सिलिका बालू निकाली जाती है। देवास और जबलपुर में भी सिलीका बालू का उत्पादन है।

मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण खनिज भंडार

खनिज इकाई भंडार ( प्रमाणित + संभावित ) भारत मध्य प्रदेश देश के कुल भंडारों का प्रतिशत
हीरा हजार केरेट 1045.31 1045.31 100%
प्रोफाइलाइट लाख टन 23.37 14.64 62.91%
डायस्पोर लाख टन 28. 59 1.45 5.07%
तांबा अयस्क लाख टन 394.37 198.319 50.28%
डोलोमाइट लाख टन 738.18 82.43 11.16%
रॉक फास्फेट लाख टन 34.77 18.14 52.17%
मैंगनीज अयस्क लाख टन 141.97 34.99 24.64%
 कोयला  लाख टन 251472.70 21063.03 8.37%
चूना पत्थर लाख टन 14926.39 1651.82 11.06%
कोल बेड मीथेन # लाख धन मीटर 1434.00 14.00 10.00%
  • मध्यप्रदेश में फेल्सपार जबलपुर और शहडोल में पाया जाता है। जबलपुर जिले में लमहेटा घाट पर फ्लैशपार का उत्खनन सन 1904 से हो रहा है। यह न केवल जबलपुर की चीनी मिट्टी उद्योग में काम आता है बल्कि भारत के विभिन्न भागों को भी भेजा जाता है।
  • सन 1944-48 के मध्य से राज्य के छिंदवाड़ा जिले में बेरगांव तथा विधि खेड़ा में इसका उत्खनन प्रारंभ किया गया था। इसका उपयोग चीनी मिट्टी के बर्तन, ताम्र चेन्नई की वस्तुएं तथा कांच बनाने में होता है। मध्य प्रदेश में चूने के पत्थर के विशाल संचित भंडार है।  जहां चूने का पत्थर उत्तम श्रेणी का होता है जिसमें 40-45% चुने की मात्रा होती है। यही कारण है कि गत वर्षो में सीमेंट उद्योग का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है।
  • अविभाजित मध्यप्रदेश में चूने के पत्थर के भंडार का अनुमानित आकार लगभग 400 करोड़ टन आँका गया है। किंतु इसके बड़े भंडार छत्तीसगढ़ के क्षेत्र में चले गए। अब मध्य प्रदेश में कटनी, मुंडवारा, बटवारा मेंहगांव में केसुर (धारा जिला) में इसके भंडार हैं।
  • सिलीमेंनाइट का उपयोग रिफेक्ट्री उद्योग में होता है। विंध्या प्रदेश में कोरन्डम के साथ सिलिमेनाइट पिपरा में मिलता है। सीधी जिले में पिपरा के निकट सिलीमेंनाइट् सतह पर पाया जाता है। जहां लगभग 101,600 टन संचित भंडार है।
  • स्टिएटाइट, टॉल्क और सोप स्टोन एक ही खनिज के विभिन्न नाम है मध्यप्रदेश में झाबुआ, न नरसिंहपुर तक सटीएटाईट मिलता है।  इसका उपयोग बिजली के सामान बनाने तथा प्रयोगशाला की इमेज ओं की पुलिस है इत्यादि के लिए होता है। इसका पाउडर पेंट बनाने के काम आता है।
  • सिंगरौली क्षेत्र के झींगरदह में 102 मीटर तथा नो नगर में 10.0 – 12.1 मीटर मोटी कोयले की तहे है।  मध्यप्रदेश में उपस्थित कोयले के भंडारों का आगामी 600 वर्षों तक उपयोग हो सकता है। कोयले को काला हीरा भी कहा जाता है। कोयले के भंडारण की दृष्टि से विंध्य क्षेत्र का प्रथम स्थान है।
  • जबलपुर, होशंगाबाद, दतिया, शिवपुरी और झाबुआ जिलों में शीशा मिलता है।
  • ग्रेफाइट काला शीशा या प्लम्बगो कहलाता यह पेंसिल उद्योग में प्रयुक्त होता है यह मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पाया जाता है।
  • मध्यप्रदेश में जबलपुर के सलीमबाद क्षेत्र में, बालाघाट होशंगाबाद, नरसिंहपुर और सागर जिले में तांबा पाया जाता है।
  • फास्टफॉराइट (रॉक फास्फेट) की खदानें प्रमुखता झाबुआ जिले में है। झाबुआ में अनुपात 43.5 लाख टर्न फास्फोफॉराइट है। जिस की शुद्धता 10 से 20.7% तक है। सागर तथा छतरपुर जिलों में भी इसके भंडार है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शहडोल और अनूपपुर जिले में गैस भंडार खोजा है।
  • भारत में कोल रिजर्व का 100.7% हिस्सा मध्य प्रदेश में है। सीधी जिले में कोयले की घनी परत है, जो एशिया में सबसे घनी है। भारत में मध्य प्रदेश सीमेंट का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

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