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मध्य प्रदेश में विद्युत उत्पादन और पॉवर स्टेशन


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जिन स्थानों पर कोयले से विद्युत उत्पादन किया जाता है उन्हें तापीय विद्युत गृह कहते हैं. तापीय विद्युत उत्पादन के लिए निम्न कोटि के कोयले की आवश्यकता पड़ती है. मध्य प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में ताप विद्युत का आधिक्य है. वर्ष 2015-16 में राज्य में कुल विद्युत प्रदाय 62,791 मिलियन यूनिट है, जबकि वर्ष 2016-17 में विद्युत प्रदाय 61,144 मिलीयन यूनिट रहा, जो कि गत वर्ष की तुलना में कम रहा है। मध्य प्रदेश में वर्ष 2016-17 में वर्ष 2015-16 की तुलना में 4.9% कम विक्रय की।

वर्ष 2016-17 में विद्युत उपयोग के अंतर्गत सर्वाधिक विद्युत उपयोग 40.4% कृषि क्षेत्र में किया गया है। इसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन हेतु भी करिए उपभोग का प्रतिशत 23.9 प्रतिशत है। अगस्त 2017 की स्थिति में प्रदेश में कुल 42 ग्राम अविद्धुतीकृत थे जिनमें से 22 ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य परंपरागत रुप से लाइन विस्तार से एवं 20 ग्रामों को विद्युतीकरण का कार्य गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से किया जाना है। अमरकंटक ताप विद्युत केंद्र शहडोल जिले में सोहागपुर कोयला क्षेत्र में स्थित है। इस केंद्र को जलापूर्ति सोन नदी से और कोयला आपूर्ति वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड सोहागपुर क्षेत्र की अमला तथा चचाई कोयला खानों से की जाती है।  विद्यांचल बृहत ताप विद्युत परियोजना सीधी जिले में बढ़ने के समीप है। इसके समीप सिंगरौली की विशाल कोयला खाने हैं। इसकी कुल क्षमता 2260 मेगा वाट है।

सतपुड़ा ताप विद्युत केंद्र इटारसी स्टेशन से 80 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में सतपुड़ा पहाड़ियों के उत्तरी ढाल पर बेतूल जिले के पत्थर खेड़ा कोयला क्षेत्र में स्थित है। इस विद्युत केंद्र को जलापूर्ति तवा नदी पर बांध बनाकर की गई है। संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र शहडोल जिले में बिरसिंहपुर में स्थित है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य की सीमा छिंदवाड़ा जिले में पेंच ताप विद्युत गृह स्थापित किया गया।

मध्य प्रदेश में विद्युत प्रदाय

मध्य प्रदेश विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा
संयुक्त उपक्रम जल परियोजना
वर्ष ताप विद्युत जल विद्युत कुल इंदिरा सागर सरदार सरोवर ओकारेश्वर केंद्रीय विद्यालयों एवं डीवीसी से निजी क्षेत्र एवं पारीक एवं अन्य प्रदेश की प्रणाली में पदार्थ विद्युत
2012-13 14,814 3,152 17,966 2,887 2,017 1,256 2,09,943 3,927 48,028
2013-14 14,180 3,655 17,835 4,049 3,250 1,620 20,576 6,385 51,104
2014-15 15,231 2,720 2,951 2,542 621 1,121 22,104 12,530 56,210
2015-16 16,927 2,033 18,960 1,940 1,194 953 22,144 19,788 62,791
2016-17 13,193 2,930 16,123 3,253 1,785 1,417 20,657 2,153 61,144

उत्तर प्रदेश की रिहंद परियोजना में मध्य प्रदेश का हिस्सा है और उत्तर प्रदेश सरकार ने हिस्सा देना स्वीकार कर लिया. मध्यप्रदेश में गैस पर आधारित पहला विद्युत गृह गवालियर के निकट भांडेर में स्थापित किया जा रहा है। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों अतिरिक्त ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का पता लगाने उन्हें अधिकाधिक उपयोग में लाने तथा उनके विकास के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम, की स्थापना अगस्त 1982 में की गई। निगम ने व्यवसायिक तौर पर वर्ष 1983-84 से कार्य करना प्रारंभ किया।

ग्रामों की उन्नति के लिए भारत सरकार ने सन 1960 ग्रामीण विद्युतीकरण निगम की स्थापना की। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम की स्थापना अगस्त 1982 में की गई। पवन ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए देवास के पास 15 मेगावाट क्षमता का व्यवसाय के विंड फार्म स्थापित किया जा रहा है।

प्रदेश में कि 31 मार्च 2015 की स्थिति में कुल 477 ग्राम अविध्युतीकृत जिसमें से 324 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य परंपरागत रूप से लाइन विस्तार कर मार्च 2016 तक 153 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से दिसंबर 2016 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है उक्त कार्य पूर्ण होने के पश्चात प्रदेश के सभी ग्राम विद्युतीकरण हो जाएंगे। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 400 मेगावाट महेश्वर हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर योजना की शुरुआत है. नदी पर 6 मई 2011 से शुरु की गई।

प्रदेश में उर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 9 अक्टूबर 2014 को इंदौर में सम्पन्न ग्लोबल समीट सोलर पावर इन एमपी विषय के संबंध में कहा गया कि 2014 में प्रदेश में 356 मेगावाट की ऊर्जा क्षमता है जो वर्ष 2017 तक बढ़कर 2654 मेगा वाट हो जाएगी। देश का सबसे बड़ा सुंदर पावर प्लांट (130 मेगावाट) प्रदेश के नीमच नामक स्थान पर स्थापित किया जा रहा है।

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